मालधन (उत्तराखंड):सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालधन के मुख्य गेट पर आज जनआक्रोश का बड़ा विस्फोट देखने को मिला। महिला एकता मंच के बैनर तले जुटीं सैकड़ों महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने अस्पताल की बदहाली और चिकित्सकों की कमी को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। 20 से अधिक गांवों की लगभग 40 हजार की आबादी के लिए यह अस्पताल इकलौता सहारा है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यह सिर्फ एक ढांचा बनकर रह गया है।
आक्रोशित ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि अस्पताल में सिर्फ कागजों पर सुविधाएं हैं, जबकि हकीकत में मरीजों को रामनगर या हल्द्वानी रेफर करने के सिवा यहां कुछ नहीं होता। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती और सुविधाएं बहाल नहीं की गईं, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन के लिए सडकों पर उतरने को बाध्य होगी।

चार प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार के मूड में ग्रामीण
धरना-प्रदर्शन के दौरान स्थानीय नागरिकों और संगठन के कार्यकर्ताओं ने सरकार के समक्ष चार मुख्य मांगें रखीं:
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति: अस्पताल में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, और प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनकोलॉजिस्ट) को तुरंत तैनात किया जाए।
- जांच सुविधाओं की बहाली: एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सभी प्रकार की पैथोलॉजी जांच की सुविधाएं तत्काल प्रभाव से शुरू हों।
- 24×7 इमरजेंसी और दवाएं: अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं चालू रखी जाएं और पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।
- मूलभूत ढांचागत सुधार: अस्पताल परिसर में बिजली, पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय और नियमित साफ-सफाई का समुचित प्रबंध हो।
‘वोट बैंक समझा, इलाज भूल गए’ – नेताओं पर सीधा हमला
कार्यक्रम का संचालन कर रही विनिता ने कहा कि मालधन और आसपास की 40 हजार से अधिक आबादी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी इसी एक केंद्र पर है। लेकिन विडंबना यह है कि गंभीर बीमारी या प्रसव जैसे मामलों में मरीजों को दूसरे शहरों में भागना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों का समय और मेहनत की कमाई दोनों पानी की तरह बह जाती हैं।
वहीं पुष्पा ने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद विधायक और सांसद जनता के सुख-दुख से नदारद हैं। क्षेत्र की जनता को महज वोट बैंक समझकर इस्तेमाल किया गया है। जब तक अस्पताल की हालत में सुधार नहीं होता, यह संघर्ष जारी रहेगा।
महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा मार: स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती से आक्रोश
मंच की संयोजक ललिता रावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के बजाय अन्य मुद्दों पर ध्यान भटकाया जा रहा है।
भगवती ने आरोप लगाया कि पिछले साल जब ग्रामीणों ने बाजार बंद कर विधायक कार्यालय का घेराव किया था, तब जाकर अस्पताल में प्रसूति और अन्य सुविधाएं चालू की गई थीं। लेकिन अब उन सुविधाओं को भी धीरे-धीरे छीन लिया गया है। यहां तैनात डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को दूसरी जगहों पर अटैच कर दिया गया है, जो क्षेत्र की जनता के साथ सीधा धोखा है। स्वास्थ्य हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है और इसे हासिल करने के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।
विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन, 15 दिन का अल्टीमेटम
इस प्रदर्शन को कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। धरना स्थल पर समाजवादी लोक मंच से जगमोहन रावत, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अध्यक्ष प्रभात ध्यानी, मनमोहन अग्रवाल, जमन आर्य, और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से तुलसी छिमवाल, आसिफ, कौशल्या, ममता और देवी समेत बड़ी तादाद में स्थानीय पुरुष व महिलाएं शामिल हुए।
प्रदर्शन के समापन पर महिला एकता मंच की ओर से सरस्वती जोशी ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को 15 दिनों की मोहलत दी जा रही है। अगर तय सीमा के भीतर सभी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो मालधन की जनता विशाल और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।