संरक्षण की गौरवशाली परंपरा के 90 वर्ष: कार्बेट टाइगर रिजर्व ने धूमधाम से मनाया स्थापना दिवस
रामनगर। भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक माना जाने वाला कार्बेट टाइगर रिजर्व अपनी स्थापना के 90 वर्ष पूरे कर चुका है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर को रिजर्व के विभिन्न इलाकों में पर्यावरण संरक्षण, जन-जागरूकता, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया गया।
क्षेत्र के गर्जिया और ढेला पर्यटन गेट समेत कई प्रमुख स्थानों पर विशेष आयोजन हुए। इस दौरान जैव विविधता की रक्षा, जंगल की सुरक्षा और स्थानीय आबादी की सहभागिता पर जोर दिया गया।

छात्रों और नए वन आरक्षियों ने जाना जंगल का महत्त्व
गर्जिया पर्यटन गेट पर बिजरानी, रामनगर वन प्रभाग, कोसी रेंज और कालागढ़ के वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग ले रहे नए वन आरक्षियों के साथ-साथ राजकीय इंटर कॉलेज ढिकुली के बाघ रक्षक कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्थापना दिवस की खुशियां साझा कीं।
इस मौके पर अधिकारियों ने प्रतिभागियों को कार्बेट टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता, बाघ संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। छात्रों और नव-नियुक्त वनकर्मियों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद स्कूली बच्चों और स्टाफ के बच्चों को गर्जिया पर्यटन जोन का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को करीब से देखा।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए निकाला फ्लैग मार्च
मानसून सत्र के दौरान इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने और लोगों में जागरूकता फैलाने के मकसद से एक फ्लैग मार्च निकाला गया। रिगोड़ा पर्यटन जोन से शुरू होकर यह मार्च गर्जिया, देवीचौड़ा, सुंदरखाल और राष्ट्रीय राजमार्ग-309 से होते हुए धनगढ़ी तक पहुँचा।
इसके बाद धनगढ़ी पुल पर एक बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया गया। पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टीम ने लगभग 25 किलोग्राम कूड़ा-कचरा जमा किया, जिसे सुरक्षित निस्तारण के लिए वेस्ट वॉरियर्स संस्था को सौंप दिया गया।
मानसून के दौरान जंगलों में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने गश्त, कॉम्बिंग, रात में एंबुश और संयुक्त गश्त जैसी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से चलाने की योजना बनाई है।

ढेला गेट पर भी दिखा उत्साह, चलाया स्वच्छता अभियान
इसी प्रकार ढेला पर्यटन गेट पर भी बाघ रक्षक कार्यक्रम के विद्यार्थियों, शिक्षकों और वन विभाग के कर्मचारियों ने मिलकर 90वां स्थापना दिवस मनाया। बच्चों को झिरना पर्यटन जोन का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इसके बाद ढेला गेट से सांवल्दे तक जागरूकता फ्लैग मार्च निकाला गया।
फ्लैग मार्च के अंत में सांवल्दे वन परिसर और सांवल्दे पुल के पास स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें 30 किलोग्राम कूड़ा एकत्र कर निस्तारण के लिए सौंपा गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों और पर्यटकों को प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संदेश देना था।

जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भरता की सौगात
रामनगर स्थित निदेशक सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट और ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी का स्वागत किया गया।
इस अवसर पर कार्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा चलाए जा रहे सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बोक्सा जनजाति की प्रशिक्षु महिलाओं को 10 सिलाई मशीनें और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र बांटे गए। 25 दिनों के इस विशेष प्रशिक्षण में से 15 दिन पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा 90 दिनों का ऑनलाइन और 10 दिनों का एडवांस कोर्स भी चल रहा है। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं अन्य स्थानीय महिलाओं को भी सिखा सकेंगी, जिससे क्षेत्र में आजीविका और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।
वैज्ञानिकों और पशुचिकित्सा छात्रों का प्रशिक्षण
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और 10 पशुचिकित्सा छात्रों को कार्बेट के ‘टाइगर सेल’ और वन्यजीव प्रबंधन की बारीकियों से रूबरू कराया गया। IVRI की यह टीम 5 दिनों के विशेष प्रशिक्षण पर है, जिसमें उन्हें वन्यजीव रेस्क्यू, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जानवरों के इलाज के व्यावहारिक पहलुओं के बारे में सिखाया जा रहा है।
क्षेत्रीय अधिकारियों ने IVRI की टीम को कार्बेट की कार्यप्रणाली और वन्यजीवों के स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

संरक्षण की 90 सालों की गौरवशाली यात्रा
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों ने कार्बेट की जैव विविधता को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। उप निदेशक राहुल मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि कार्बेट टाइगर रिजर्व की यह 90 वर्षों की यात्रा इंसान और प्रकृति के सह-अस्तित्व का अद्भुत उदाहरण है। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण का निर्माण ही इस रिजर्व का मुख्य उद्देश्य है।