रुद्रपुर ARTO में सामने आया हैरतअंगेज मामला: एक ही नंबर और चेसिस की दो स्विफ्ट डिजायर कारें आमने-सामने, फर्जीवाड़े की आशंका
रुद्रपुर। उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय (ARTO) में एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग से लेकर आम लोगों तक के होश उड़ा दिए हैं। आमतौर पर फिल्मों में जुड़वा कारों या फर्जी नंबर प्लेट का खेल देखने को मिलता है, लेकिन रुद्रपुर में यह रीयल लाइफ में देखने को मिला। यहाँ एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर और एक ही चेसिस नंबर वाली दो सफेद स्विफ्ट डिजायर कारें एक साथ दफ्तर के अहाते में आमने-सामने आकर खड़ी हो गईं।
इस अजीबोगरीब घटनाक्रम से ARTO परिसर में हड़कंप मच गया। दोनों गाड़ियाँ न सिर्फ एक ही नंबर से सड़कों पर दौड़ रही थीं, बल्कि उनके तकनीकी दस्तावेज भी पूरी तरह हूबहू निकले। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ही पहचान वाली दो कारें कानूनी रूप से सड़कों पर कैसे पहुँच गईं और इसके पीछे किसका बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?

बीमा रिन्यूअल कराने पहुँचे मालिक को लगा झटका
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी सहदेव कुमार पाल अपने अधिवक्ता हेमंत प्रकाश के साथ रुद्रपुर ARTO कार्यालय पहुँचे। सहदेव अपनी कार (रजिस्ट्रेशन नंबर UK-06 AN-0807) का इंश्योरेंस रिन्यू कराने की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे। इसी दौरान सिस्टम में डेटा चेक करने पर पता चला कि इसी रजिस्ट्रेशन नंबर की कार का बीमा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज होकर चल रहा है।
इस बात का पता चलते ही विभागीय कर्मचारियों के कान खड़े हो गए। जब ARTO के अधिकारियों ने अपना आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाला तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। यह गाड़ी नैनीताल जिले के कालाढूंगी (ग्राम धमोला) निवासी नीरज कुमार के नाम पर भी पंजीकृत पाई गई।
दफ्तर में दोनों कारों को आमने-सामने खड़ा किया गया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उप सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मोहित कोठारी ने नीरज कुमार को भी उनकी स्विफ्ट डिजायर कार के साथ तत्काल ARTO कार्यालय तलब किया। जब दोनों गाड़ियाँ कार्यालय के सामने खड़ी की गईं तो वहाँ मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दंग रह गए। दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही था और जब शुरुआती तकनीकी जाँच की गई तो दोनों का चेसिस नंबर भी हूबहू समान निकला।
प्राथमिक जाँच के बावजूद अधिकारी यह तय नहीं कर सके कि दोनों में से असली गाड़ी कौन सी है और फर्जी चेसिस नंबर किस पर दर्ज किया गया है।

कागजातों में बड़ा खेल: पहचान पत्रों में भी गड़बड़ी
जाँच के दौरान नीरज कुमार ने बताया कि उन्होंने यह गाड़ी केलाखेड़ा के एक लोकल कार डीलर के जरिए खरीदी थी। डीलर ने जिस व्यक्ति के नाम से वाहन ट्रांसफर करने की बात कही थी, उसमें सहदेव कुमार पाल के नाम से जुड़ा एक पहचान पत्र (कार्ड) भी प्रस्तुत किया गया था।
जब अधिकारियों ने उस पहचान पत्र की गहराई से पड़ताल की तो मामला और संदिग्ध हो गया। पहचान पत्र का नंबर तो सहदेव का ही था, लेकिन उस पर लगी फोटो और दर्ज जन्मतिथि किसी अन्य व्यक्ति की निकली। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि गाड़ियों की खरीद-बिक्री में फर्जी दस्तावेजों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है।
डॉक्टर से शुरू हुआ था गाड़ियों का सफर
विभागीय पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि यह स्विफ्ट डिजायर कार शुरुआती दौर में रुद्रपुर के एक नामचीन डॉक्टर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। इसके बाद यह कार समय-समय पर अलग-अलग डीलरों और खरीदारों के हाथों से होती हुई ट्रांसफर की गई। फिलहाल परिवहन विभाग गाड़ी के पुराने ट्रांसफर रिकॉर्ड, एनओसी और संबंधित कार डीलर की भूमिका की बारीक जाँच कर रहा है।
मारुति की टेक्निकल टीम खोलेगी राज
मामले का पेच सुलझाने के लिए अब ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति की स्थानीय एजेंसी से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। मारुति की टेक्निकल टीम दोनों गाड़ियों के मेटल स्ट्रक्चर, चेसिस नंबर की पंचिंग शैली, इंजन नंबर और इंटरनल कोडिंग की गहराई से जाँच कर रही है। जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि चेसिस नंबर के साथ किस स्तर पर छेड़छाड़ (Tampering) की गई है।
ARTO प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक संकेतों के आधार पर एक वाहन की वास्तविक पहचान के कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन दूसरे वाहन के चेसिस नंबर की विस्तृत वैज्ञानिक व तकनीकी रिपोर्ट आना बाकी है। कंपनी की आधिकारिक रिपोर्ट और आरटीओ के पुराने कागजातों का मिलान होने के बाद ही पूरे गिरोह और इस बड़े फर्जीवाड़े से पर्दा उठ सकेगा।