देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में इस बार मानसून की बारिश आफत बनकर बरस रही है। पहाड़ से लेकर मैदान तक पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज हर पल बदल रहा है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के सात प्रमुख जिलों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली चमकने और गरज-चमक के साथ मूसलाधार पानी गिरने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने बिगड़ते हालात को देखते हुए आम जनता और तीर्थयात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
इन 7 जिलों में भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के पर्वतीय अंचलों में भारी से अति भारी बारिश के आसार जताए गए हैं। देहरादून, टिहरी, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिलों में कहीं-कहीं मूसलाधार बारिश का अंदेशा है। इसके अलावा उधम सिंह नगर और मैदानी जिले हरिद्वार में भी गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम केंद्र ने इन सभी प्रभावित इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
राजधानी देहरादून की बात करें तो दिन में आसमान साफ रहने से लेकर आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि, देर शाम या रात के वक्त तेज बौछारें पड़ सकती हैं। देहरादून में अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 23°C के आसपास बने रहने का अनुमान है।
भूस्खलन से थमी जिंदगी: 100 से अधिक सड़कें पूरी तरह ठप
रुक-रुक कर हो रही इस मूसलाधार बारिश ने पर्वतीय जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों से मलबा और विशालकाय बोल्डर (चट्टानें) गिरने के कारण प्रदेश भर में सड़कें लगातार बाधित हो रही हैं। वर्तमान में पूरे राज्य में 100 से अधिक महत्वपूर्ण सड़कें मलबे की वजह से बंद पड़ी हैं।
मार्ग बाधित होने से स्थानीय ग्रामीणों, बीमार मरीजों और राहगीरों को भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। कई इलाकों में तो लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है। सड़कें बंद होने से दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ने लगा है।
उफान पर नदियां, ₹211 करोड़ से ज्यादा का इंफ्रास्ट्रक्चर स्वाहा
मानसून सीजन में हो रही भारी बारिश के कारण राज्य के नदी-नाले उफान पर हैं। निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। बारिश के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के इस सीजन में अब तक सड़कों और पुलों को 211.10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
पीडब्लूडी और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के अनुसार, इस मानसून सीजन में:
- स्टेट हाईवे: 135 सड़कें क्षतिग्रस्त या बाधित हुईं।
- ग्रामीण मार्ग: 1,575 गांव को जोड़ने वाले रास्ते मलबे में तब्दील हुए।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways): 30 बड़े हाईवे प्रभावित हुए।
- जिला मार्ग व अन्य रास्ते: 240 से अधिक मुख्य और अन्य जिला मार्ग बाधित हुए हैं।
प्रशासन मुस्तैद, संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील
लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़कों के टूटने के चलते लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। हालांकि, बार-बार हो रही बारिश और ऊपर से गिरते पत्थरों के कारण राहत व बचाव कार्य में खासी अड़चन आ रही है।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों के किनारे जाने से बचें और अनावश्यक यात्रा न करें। पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय मौसम का अपडेट जरूर लें, क्योंकि अचानक भूस्खलन की वजह से रास्तों में घंटों फंसे रहने का जोखिम बना हुआ है।