उत्तरकाशी (मोरी): उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का मोरी विकासखंड इन दिनों एक खौफनाक दौर से गुजर रहा है। यहां जंगलों के करीब रहने वाले लोगों के लिए वन्यजीवों का आतंक अब दिन-प्रतिदिन जानलेवा बनता जा रहा है। ताजा मामला फिताड़ी गांव से सामने आया है, जहां भालू के एक अचानक और हिंसक हमले ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
बगीचे में घात लगाए बैठे भालू ने किया हमला
मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह फिताड़ी गांव का रहने वाला 24 वर्षीय युवक अनुरोध राणा अपने बगीचे की तरफ जा रहा था। उसे तनिक भी अंदाजा नहीं था कि बोसनी तोक के पास मौत घात लगाकर बैठी है। जैसे ही अनुरोध उस रास्ते से गुजरा, भालू ने उन पर हमला कर दिया। भालू का हमला इतना अचानक और भीषण था कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। युवक की जानलेवा चीखें सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों के शोर मचाने के बाद भालू वहां से भागा, जिससे युवक की जान तो बच गई, लेकिन वह बुरी तरह जख्मी हो गया।
सड़क की बदहाली बनी सबसे बड़ी दुश्मन
इस घटना के बाद जो तस्वीर सामने आई, वह उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क मार्ग की बदहाल स्थिति पर एक बड़ा सवालिया निशान है। गांव तक जाने वाली मुख्य सड़क लंबे समय से बंद है, जिसके कारण एंबुलेंस या कोई भी चारपहिया वाहन मौके तक नहीं पहुँच पाया। जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे ग्रामीणों के पास अस्पताल ले जाने के लिए सड़क मार्ग का सहारा नहीं था। आखिर में, ग्रामीणों ने मजबूर होकर डांडी-कंडी का सहारा लिया। अनुरोध को उसी पर बैठाकर कई किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्तों से पैदल ले जाया गया, तब जाकर उसे किसी तरह अस्पताल पहुँचाया जा सका।
ग्रामीणों में खौफ, प्रशासन के प्रति आक्रोश
फिताड़ी और आसपास के गांवों में अब भालू के डर से दहशत का माहौल है। लोग अब अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं। घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्राम प्रधान कृष्णा राणा ने साफ तौर पर कहा कि सड़क मार्ग बंद होने के कारण एक जीवन पर संकट और गहरा हो गया था। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सड़क ठीक होती, तो एंबुलेंस के जरिए युवक को तुरंत उपचार मिल जाता।
ग्रामीणों ने अब वन विभाग को चेताया है कि वे क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाएं और जंगली जानवरों के प्रति पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। लोगों का कहना है कि वे अब और अधिक हादसों का इंतजार नहीं करेंगे। वन्यजीवों का बढ़ता दखल और आधारभूत सुविधाओं का अभाव, मोरी के सीमांत क्षेत्रों के लोगों के लिए अब एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। वन विभाग ने घटना का संज्ञान लिया है, लेकिन स्थानीय लोग अब जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी खौफनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।