देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intense Revision) प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में वोटर लिस्ट से नाम कटने की शिकायतों और फार्म-07 के बढ़ते इस्तेमाल ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखने और वोटर कार्ड काटने की किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए कांग्रेस ने अब जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालने का बड़ा प्लान तैयार किया है।
पार्टी का साफ कहना है कि किसी भी वैध नागरिक का नाम सूची से गैर-कानूनी या नियम विरुद्ध तरीके से नहीं हटने दिया जाएगा। इसके लिए राज्य की सभी विधानसभाओं में एक विशेष निगरानी और सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है।
फॉर्म-07 का चक्रव्यूह: पात्र वोटरों के नाम हटने की आशंका
SIR प्रक्रिया के दूसरे चरण में हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जिले से ऐसी कई खबरें सामने आ रही हैं जहाँ बड़े पैमाने पर फॉर्म-07 जमा किए गए हैं। फॉर्म-07 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए होता है।
कांग्रेस का आरोप है कि फॉर्म-07 के जरिए ऐसे लोगों के नाम भी हटाने की कोशिश की जा सकती है जो वास्तव में पात्र मतदाता हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ किया है कि पार्टी की पहली प्राथमिकता हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा करना है। अगर किसी भी योग्य वोटर का नाम हटाया जाता है तो कांग्रेस इसके खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक लड़ाई लड़ेगी।
विधानसभा से लेकर बूथ तक पैनी नजर: समन्वयकों की फौज तैनात
SIR प्रक्रिया की धांधली रोकने के लिए कांग्रेस ने राज्य की विधानसभाओं में संगठनात्मक तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर डाल दिया है। हर विधानसभा क्षेत्र में विशेष समन्वयक और सह-समन्वयकों की नियुक्तियां कर दी गई हैं।
प्रदेश महासचिव (संगठन) राजेंद्र भंडारी ने सभी नव-नियुक्त समन्वयकों को तुरंत प्रभाव से अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में काम शुरू करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन समन्वयकों का मुख्य काम क्षेत्र में वोटर लिस्ट अपडेट पर नजर रखना और किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत प्रदेश मुख्यालय को देना होगा।
BLA और जमीनी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार
यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सीधे धरातल पर उतारा जा रहा है। विधानसभा समन्वयकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर:
- विधानसभा अध्यक्षों और ब्लॉक/नगर अध्यक्षों के साथ तालमेल बिठाएं।
- मंडल पदाधिकारियों और बूथ लेवल एजेंट (BLA) को सक्रिय करें।
- घर-घर जाकर यह जांचें कि किसी पात्र वोटर का नाम गलती से या जानबूझकर तो नहीं काटा गया है।
बूथ स्तर तक फैले इस नेटवर्क के जरिए जैसे ही किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने से जुड़ी आपत्ति या फॉर्म-07 का मामला सामने आएगा, कांग्रेस की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आपत्ति दर्ज कराएगी और संबंधित चुनाव अधिकारी से जवाब मांगेगी।
उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़
उत्तराखंड में मतदाता पुनरीक्षण को लेकर शुरू हुआ यह अभियान राज्य की भावी राजनीति का रुख तय कर सकता है। कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक प्रशासनिक निगरानी अभियान नहीं है, बल्कि जनता के मौलिक अधिकार और निष्पक्ष चुनाव की नींव को बचाने की मुहिम है।
विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सीधी तैनाती से साफ है कि आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट के इस मुद्दे पर प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।