पौड़ी गढ़वाल के महरगांव में कुदरत का कहर: भारी बारिश से गिरा दो मंजिला मकान, मलबे में दबे एक ही परिवार के लोग, रेस्क्यू जारी
पौड़ी गढ़वाल:उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसूनी आफत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियों और नदी-नालों के उफान के बीच अब भूस्खलन की वजह से रिहायशी मकानों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इसी बीच पौड़ी गढ़वाल जिले के महरगांव से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहाँ बारिश की मार के चलते एक दो मंजिला पुराना मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोग मलबे के नीचे दब गए।
हादसा मंगलवार सुबह लगभग 7:45 बजे हुआ। जब पूरा गांव सुबह के कामों में व्यस्त था, तभी अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज के साथ दो मंजिला मकान भरभराकर गिर पड़ा। देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में हड़कंप फैल गया। बारिश के बीच हुए इस हादसे के बाद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और अपनी जान पर खेलकर बचाव कार्य शुरू किया।

ग्रामीणों की तत्परता ने बचाई एक महिला की जान
हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने जो हिम्मत और समझदारी दिखाई, उससे एक बड़ी अनहोनी होने से बच गई। मलबे के ढेर से ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद परिवार की एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। महिला को गंभीर चोटें आई थीं, जिसे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस टीम ने तत्काल पास के सतपुली हंस चिकित्सालय में भर्ती कराया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में महिला का इलाज चल रहा है और उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
मलबे में दबे 2 साल के मासूम समेत तीन की तलाश तेज
हालांकि, राहत कार्य के बावजूद तीन लोग अब भी मलबे के भीतर फंसे हुए हैं। चिंता की बात यह है कि लापता लोगों में एक 2 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन, राजस्व विभाग (पटवारी) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुँच गईं। भारी बारिश और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम मलबे को हटाने और बाकी तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चला रही है। मौके पर मेडिकल टीम और एंबुलेंस को अलर्ट पर रखा गया है।

सड़कें ठप, रास्ते खोलने के लिए जेसीबी तैनात
लगातार हो रही बारिश के कारण पौड़ी जिले के कई इलाकों में बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा सड़कों पर आ गिरा है, जिससे दर्जनों ग्रामीण मार्ग पूरी तरह से बाधित हो चुके हैं। महरगांव तक पहुँचने वाले रास्तों पर भी भूस्खलन के कारण आवाजाही ठप पड़ गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल आपदा कंट्रोल रूम का रुख किया और पूरे जिले के हालात की समीक्षा की।
प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सतपुली-गुमखाल मार्ग पर जमा मलबे को जेसीबी मशीनों की मदद से हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। इसके अलावा गुमखाल-द्वारीखाल-महरगांव मार्ग को जल्द से जल्द सुचारू करने के लिए भी भारी मशीनें मौके पर तैनात कर दी गई हैं, ताकि राहत सामग्री और रेस्क्यू टीमों को पहुँचने में कोई बाधा न आए।
बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने के कड़े निर्देश
आपदा कंट्रोल रूम से हालात पर सीधी नजर रख रहीं जिलाधिकारी ने विद्युत और पेयजल विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में बारिश या भूस्खलन की वजह से बिजली के फीडर ब्रेकडाउन हुए हैं, वहाँ तकनीकी टीमें तुरंत पहुँचकर लाइन की मरम्मत करें और बिजली आपूर्ति बहाल करें। इसके साथ ही प्रभावित गाँवों में स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए हैं।
नदी-नालों से दूर रहने की अपील, संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट
उत्तराखंड में मौसम विभाग के अलर्ट और लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। पहाड़ी गदेरों (बरसाती नालों) और नदियों के अचानक उफान पर आने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे नदी-नालों के आसपास न जाएँ। किसी भी तरह के खतरे से बचने के लिए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।
फिलहाल, महरगांव में रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और पूरा जिला प्रशासन मलबे में दबे बाकी तीन लोगों को सकुशल बाहर निकालने के प्रयास में जुटा हुआ है।