उत्तरकाशी।उत्तरकाशी जिले के डुंडा क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब देर रात सड़क किनारे पक्की दीवार पर एक खूंखार गुलदार (तेंदुआ) आराम से बैठा हुआ दिखाई दिया। अंधेरे के बीच राहगीरों और वाहन चालकों की नज़र जैसे ही इस वन्यजीव पर पड़ी, लोगों के पसीने छूट गए। दीवार पर जमे इस गुलदार का दृश्य देखकर राहगीरों ने तुरंत गाड़ियों की रफ्तार धीमी की और सुरक्षा के लिहाज से अपने वाहनों के भीतर से ही इसका वीडियो बना लिया।
सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे डुंडा और आसपास के इलाकों में दहशत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग, दोपहिया वाहन चालक और रात के समय आवाजाही करने वाले राहगीर अब पूरी तरह खौफ के साए में हैं।
खट्टूखाल की खौफनाक घटना से सहमे हैं लोग
डुंडा में गुलदार की इस ताजा चहलकदमी ने ग्रामीणों के उस जख्म को फिर से हरा कर दिया है, जो कुछ ही दिन पूर्व खट्टूखाल गांव में देखने को मिला था। खट्टूखाल में हुई दिल दहला देने वाली घटना को लोग अभी तक भूल नहीं पाए हैं, जब खेतों में काम करने के दौरान अचानक झाड़ियों से निकले गुलदार ने मासूम बालिका ऋषिता पर जानलेवा हमला कर दिया था।
गुलदार के इस अचानक हमले से उस वक्त पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई थी। हालांकि, ग्रामीणों की तत्परता और समय रहते की गई मशक्कत के चलते बालिका ऋषिता की जान बचा ली गई थी, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके के लोगों के दिलों में डर का ऐसा ज़हर घोल दिया है कि लोग अब अपने ही खेतों में काम करने जाने से घबरा रहे हैं।
नौनिहालों के चेहरों पर खौफ और ठप पड़ती दिनचर्या
खट्टूखाल की घटना और अब डुंडा में सड़क किनारे गुलदार दिखने के बाद ग्रामीणों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। सबसे ज्यादा असर छोटे-छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले नौनिहालों के चेहरों पर सिर्फ और सिर्फ खौफ साफ नज़र आ रहा है। माता-पिता अपने मासूमों को अकेले स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं और बच्चों को समूह में ही स्कूल भेजा जा रहा है।
ग्रामीण तड़के सुबह खेतों में जाने और शाम को मवेशियों को चारा देने के लिए बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों और आवाजाही से पूरा क्षेत्र आतंक के साए में जीने को मजबूर है।
रात के अंधेरे में सड़क किनारे चहलकदमी
डुंडा में मामला मुख्य मार्ग से जुड़ा है। देर रात जब सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही कम थी, तब यह गुलदार बेझिझक होकर सड़क से सटी ऊंची दीवार पर आकर बैठ गया। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी, क्योंकि दीवार की ऊंचाई और सड़क की दूरी नाममात्र की थी। गुलदार के इस तरह आबादी वाले रास्तों पर निर्भीक होकर बैठने से हर कोई अचंभित और डरा हुआ है।
सूचना मिलते ही वन विभाग अलर्ट मोड पर
घटना की जानकारी जैसे ही वन विभाग को दी गई, महकमा तुरंत एक्शन मोड में आ गया। वन विभाग के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत सर्च टीम रवाना कर दी।
वन विभाग की स्पेशल गश्ती टीम रात से ही डुंडा, खट्टूखाल और उससे सटे जंगलों की सीमाओं पर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। टीम लाउडस्पीकर और टॉर्च के जरिए झाड़ियों व संभावित छिपने के ठिकानों की छानबीन में जुटी है। विभाग का मुख्य उद्देश्य गुलदार को इंसानी आबादी से दूर खदेड़ना और ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान करना है।
वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी
बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्रवासियों के लिए कड़े सतर्कता दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- समूह में करें आवाजाही: खेतों या सुनसान रास्तों पर अकेले जाने के बजाय हमेशा दो या तीन लोगों के समूह में निकलें।
- रोशनी और आहट का ध्यान रखें: रात या तड़के बाहर निकलते समय हाथ में टॉर्च रखें और लाठी को जमीन पर पटकते हुए चलें, ताकि वन्यजीव आहट पाकर दूर हट जाए।
- बच्चों की सुरक्षा: बच्चों को अकेले स्कूल या बाहर न भेजें और शाम ढलने के बाद उन्हें किसी भी हाल में घर से बाहर न खेलने दें।
- मवेशियों की सुरक्षा: पालतू जानवरों और मवेशियों को पूरी तरह से बंद व सुरक्षित बाड़ों में रखें।
पिंजरा लगाने और कड़े इंतजाम की मांग
ऋषिता पर हुए हमले और अब डुंडा में गुलदार की सीधी मौजूदगी के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और डर चरम पर है। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मांग की है कि कागजी सर्च ऑपरेशन के बजाय संवेदनशील इलाकों में तुरंत पिंजरे लगाए जाएं और गुलदार को जल्द से जल्द ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर पकड़ा जाए। फिलहाल वन विभाग की टीम इलाके में मुस्तैद है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी रखे हुए है।
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी