हल्द्वानी:उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में अगर कोई वाहन डीलर बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के शोरूम से दोपहिया वाहन बाहर निकालता है, तो उसकी जेब पर अब तक का सबसे भारी झटका लगने वाला है। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि बिना पक्की नंबर प्लेट और बिना रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटन के सड़क पर बाइक या स्कूटी दौड़ती मिली, तो संबंधित डीलर पर लाइफटाइम टैक्स का 15 गुना तक भारी-भरकम जुर्माना ठोका जाएगा।
सड़कों पर दौड़ रहे बिना नंबर के वाहन, प्रशासन सख्त
क्षेत्रीय भ्रमण और औचक निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया कि कुमाऊं मंडल के अलग-अलग जिलों में कई दोपहिया वाहन बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर के सड़कों पर बेधड़क चलाए जा रहे हैं। कई मामलों में यह देखा गया कि वाहन मालिक नई स्कूटी या बाइक खरीदकर बिना नंबर प्लेट के ही हफ्तों तक सड़कों पर घूमते रहते हैं।
जब नियमों की पड़ताल की गई तो पता चला कि शोरूम संचालक और डीलर ग्राहकों को बिना नंबर अलॉट किए ही वाहन की डिलीवरी थमा रहे हैं। मोटर वाहन अधिनियम और परिवहन नियमों के अनुसार, बिना रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित हुए किसी भी नए या पुराने वाहन को सार्वजनिक सड़क पर चलाना पूरी तरह से अवैध और प्रतिबंधित है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बिना नंबर के वाहन सड़क पर चलना हादसों और आपराधिक घटनाओं के दौरान गंभीर चुनौती खड़ा करता है।
नियमों के उल्लंघन पर सबसे बड़ा एक्शन
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कड़ा फरमान जारी किया है। यदि कोई डीलर किसी ग्राहक को बिना रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित किए गाड़ी हैंडओवर करता है या उसे सड़क पर संचालन के लिए देता है, तो परिवहन विभाग सीधे डीलर के खिलाफ कार्रवाई करेगा। डीलर से उस वाहन पर लगने वाले लाइफटाइम टैक्स (Life Time Tax) का 15 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। यह राशि लाखों रुपये में पहुंच सकती है, जिससे ढिलाई बरतने वाले शोरूम मालिकों और वाहन डीलरों में हड़कंप मच गया है।
हलद्वानी और अल्मोड़ा आरटीओ को 7 दिनों का अल्टीमेटम
इस मनमानी पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए सम्भागीय परिवहन अधिकारी (RTO) हलद्वानी और अल्मोड़ा को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संभागीय परिवहन अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे तुरंत अपनी-अपनी कार्यक्षेत्र सीमाओं में विशेष चेकिंग अभियान चलाएं।
सड़कों पर दौड़ रहे ऐसे तमाम दोपहिया वाहनों को चिन्हित किया जाएगा जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर पोर्टल पर दर्ज नहीं है या जिनकी नंबर प्लेट गायब है। इसके बाद जांच की जाएगी कि गाड़ी किस शोरूम से खरीदी गई है। संबंधित डीलर को ट्रेस करके उस पर तत्काल जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, इस पूरे अभियान और की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट 07 दिनों के भीतर आयुक्त कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
सड़क सुरक्षा और जवाबदेही तय करना मुख्य उद्देश्य
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस कठोर कदम का उद्देश्य सिर्फ चालान काटना या जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि सड़कों पर आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अक्सर देखा गया है कि बिना नंबर वाले वाहन सड़क हादसों के बाद आसानी से फरार हो जाते हैं या फिर आपराधिक गतिविधियों में इनका दुरुपयोग होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
डीलरों पर सीधी जवाबदेही तय होने से अब शोरूम से गाड़ी तभी बाहर निकलेगी जब उसका नंबर आरटीओ पोर्टल से आवंटित हो चुका होगा। इससे जहां एक तरफ सरकार के राजस्व का नुकसान रुकेगा, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को भी बाद में नंबर प्लेट के लिए RTO और शोरूम के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
वाहन खरीदारों और डीलरों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
- डीलरों के लिए: बिना आरटीओ रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा किए और नंबर प्लेट लगाए बिना वाहन ग्राहक को न सौंपें, वरना 15 गुना टैक्स पेनल्टी चुकानी होगी।
- वाहन खरीदारों के लिए: शोरूम से डिलीवरी लेते समय सुनिश्चित करें कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी हो चुका हो। बिना नंबर के वाहन सड़क पर ले जाना पूरी तरह गैर-कानूनी है।