रुद्रपुर में उग्र हुआ किसानों का आंदोलन: पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ी, JCB पर जमाया कब्जा; कलेक्ट्रेट से 100 कदम दूर डटे प्रदर्शनकारी
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय रुद्रपुर शुक्रवार को अचानक किसान आंदोलन के उग्र रूप का गवाह बन गया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर आयोजित तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन के पहले ही दिन हालात तब बेकाबू हो गए, जब सैकड़ों आक्रोशित किसानों ने सुरक्षा के लिए लगाई गई पुलिस की पहली बैरिकेडिंग को उखाड़ फेंका और कलेक्ट्रेट परिसर की तरफ धावा बोल दिया।
प्रदर्शनकारियों के आक्रामक तेवरों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने रास्ता रोकने के लिए खड़ी की गई सरकारी जेसीबी (JCB) को भी अपने कब्जे में ले लिया। फिलहाल किसान कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट से महज 100 कदम की दूरी पर दूसरी बैरिकेडिंग पर जमे हुए हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

सुबह 11:30 बजे से शुरू हुआ था शांतिपूर्ण धरना
घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे हुई। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से जुड़े किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रामपुर-नैनीताल मुख्य मार्ग पर कलेक्ट्रेट के ठीक सामने इकट्ठा हुए और धरने पर बैठ गए। शुरुआत में माहौल शांत था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, किसानों का आक्रोश बढ़ता गया। नारेबाजी और प्रशासनिक अनदेखी के आरोपों के बीच दोपहर होते-होते किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया।

दोपहर 1:15 बजे तोड़ी पहली बैरिकेडिंग, JCB पर कब्जा
धरना शुरू होने के ठीक दो घंटे बाद, यानी दोपहर सवा 1 बजे के आसपास आंदोलन ने अचानक उग्र मोड़ ले लिया। कलेक्ट्रेट की तरफ कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। लेकिन गुस्साए किसानों के हुजूम के सामने पुलिस के ये इंतजाम बौने साबित हुए।
किसानों ने धक्का-मुक्की के बीच पहली बैरिकेडिंग को तोड़ डाला। पुलिस ने आगे के रास्ते को पूरी तरह बंद करने के लिए बीच सड़क पर जेसीबी मशीन खड़ी कर रखी थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उस पर भी अपना नियंत्रण बना लिया। जेसीबी को कब्जे में लेने के बाद किसान नारेबाजी करते हुए दूसरी बैरिकेडिंग तक जा पहुंचे।

कलेक्ट्रेट गेट से 100 कदम दूर भारी तनाव
फिलहाल रुद्रपुर कलेक्ट्रेट के ठीक बाहर स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। किसान दूसरी बैरिकेडिंग पर अड़े हुए हैं और यहां से प्रशासनिक परिसर का मुख्य प्रवेश द्वार सिर्फ 100 कदम की दूरी पर है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी किसानों को समझा-बुझाकर रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने की जिद पर कायम हैं।

PAC और फायर ब्रिगेड अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल
कलेक्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय की सुरक्षा को देखते हुए इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उत्तराखंड पुलिस के साथ-साथ पीएसी (PAC) की अतिरिक्त टुकड़ियों और दमकल (Fire) विभाग की टीमों को मौके पर अलर्ट मोड पर रखा गया है। आसपास के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग मजबूत कर दी गई है ताकि स्थिति को और ज्यादा बिगड़ने से रोका जा सके। एलआईयू (LIU) और खुफिया एजेंसियां किसानों की अगली रणनीति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं।

आखिर क्यों सड़कों पर उतरे हैं किसान?
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का यह धरना-प्रदर्शन तीन दिनों तक चलने वाला है। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन स्तर पर लगातार अनदेखी की जा रही है।
किसानों की दो सबसे प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- मुफ्त बिजली सुविधा: किसानों और आम नागरिकों के लिए 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का प्रावधान किया जाए।
- जमीन का मालिकाना हक: क्षेत्र के 20 गांवों में पिछले 50 वर्षों से रह रहे हजारों परिवारों और काश्तकारों को उनकी जमीनों का पक्का मालिकाना हक दिया जाए।

आगे क्या? प्रशासन की बढ़ीं धड़कनें
तीन दिवसीय आंदोलन के पहले ही दिन जिस तरह से किसान बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट के मुहाने तक पहुंचे हैं, उसने जिला प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। यदि शुक्रवार शाम तक बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो शनिवार और रविवार को आंदोलन और ज्यादा आक्रामक रूप ले सकता है। रुद्रपुर में पुलिस बल पूरी तरह से अलर्ट पर है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को पुख्ता किया जा रहा है।