रामनगर/नैनीताल।उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कार्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में सागौन के बेशकीमती पेड़ों की कटान करने वाले तस्करों के खिलाफ वन विभाग और पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद साक्ष्य और कानूनी कार्रवाई से घिरे तीन आरोपियों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया है। इससे पहले मामले में दो अन्य आरोपी पहले ही जेल जा चुके हैं। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग की सख्त पैरवी ने अवैध लकड़ी तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कार्बेट टाइगर रिजर्व की बिजरानी वन रेंज से जुड़ा है। बिजरानी रेंज के तहत आने वाले फूलताल ब्लॉक (आमडंडा पुरानी बीट) के कक्ष संख्या-03 में राष्ट्रीय राजमार्ग के पास 29 मार्च 2025 को सागौन के 6 हरे-भरे पेड़ों का अवैध पातन (कटान) किया गया था। इस मामले का खुलासा होते ही बिजरानी रेंज में वन अपराध संख्या-06/बिजरानी/2024-25 के तहत मामला पंजीकृत किया गया। उप प्रभागीय वनाधिकारी बिजरानी बिन्दर पाल को इस संवेदनशील मामले की जांच सौंपी गई थी।

वाहनों और तस्करों की पहचान
जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों का सुराग लगाया। जांच में सामने आया कि काटी गई सागौन की लकड़ी को वाहन संख्या UK18CA3504 से उत्तर प्रदेश के स्वार (रामपुर) क्षेत्र में भेजा गया था। 28 अप्रैल 2025 को मुखबिर की सटीक सूचना पर रामनगर क्षेत्र से वाहन को जब्त करते हुए आरोपी फरहाद खां (पुत्र बब्बू खां, निवासी केलाखेड़ा रोड, चुनावाला, स्वार, रामपुर) को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
जांच आगे बढ़ी तो इस नेटवर्क में कई अन्य तस्करों के नाम सामने आए:
- सुलेमान (पुत्र शमशेर अली, निवासी बधीपुर धमोला, स्वार, रामपुर)
- समीर (पुत्र तकमील खां, निवासी मिलकदुन्दी, स्वार, रामपुर)
- सलमान (पुत्र स्व. तफसील, निवासी मिलकदुन्दी, स्वार, रामपुर)
- उमेर खान (पुत्र तौफीक खान, निवासी मिलकदुन्दी, स्वार, रामपुर)
- युनुस (पुत्र गुलाम रसूल, निवासी हरिपुरा, बरहैनी, बाजपुर, उधम सिंह नगर)
- यासीन अली (पुत्र शमशेर अली, निवासी राई खत्ता प्लॉट संख्या 20, ग्राम धुलिया, कालाढूंगी, नैनीताल)
नोटीसों की अनदेखी और एनबीडब्ल्यू का वारंट
जांच अधिकारी द्वारा फरार चल रहे आरोपियों को बयान दर्ज कराने और पक्ष रखने के लिए लगातार कई नोटिस भेजे गए। लेकिन आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और फरार रहे। आरोपियों की लापरवाही को देखते हुए जांच अधिकारी ने रामनगर की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में अपील की। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिए।
वारंट जारी होने के क्रम में रामनगर पुलिस ने 16 जून 2026 को आरोपी सुलेमान को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।
हाईकोर्ट से झटका और कोर्ट में सरेंडर
फरार चल रहे अन्य आरोपी उमेर खान, समीर और सलमान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। वन विभाग ने कोर्ट में ठोस दस्तावेजों और पुख्ता अभिलेखों के साथ कार्बेट टाइगर रिजर्व का पक्ष रखा।
विभाग की मजबूत पैरवी के आगे उच्च न्यायालय ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पूरी तरह निरस्त कर दी। हाईकोर्ट से झटका लगने और कानूनी शिकंजा कसने के बाद तीनों आरोपियों (उमेर खान, समीर और सलमान) को 20 अगस्त 2026 को रामनगर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। अदालत ने तीनों को रिमांड पर लेकर जेल भेजने के आदेश दिए।
प्रशासन का कड़ा संदेश
इस कार्रवाई में उप प्रभागीय वनाधिकारी बिन्दर पाल, वन क्षेत्राधिकारी नवीन चन्द्र काण्डे, अधिवक्ता तरुण सिंह बिष्ट, कोर्ट सेल प्रभारी पी.एन. जोशी, वन दरोगा प्रमोद सत्यवली और वन आरक्षी याद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस पूरी कार्रवाई से कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव क्षेत्रों में अवैध पातन, लकड़ी तस्करी या किसी भी तरह के वन अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपराधियों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।