उत्तराखंड STF का बड़ा एक्शन: बाजपुर में नकली दवाइयों की फैक्ट्री का भंडाफोड़, नामी ब्रांड्स के नाम पर बन रही थीं जीवन रक्षक दवाएं, अवैध शराब भी बरामद
उत्तराखंड STF का बड़ा एक्शन: बाजपुर में नकली दवाइयों की फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब और होलोग्राम भी जब्त
बाजपुर: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने ऊधमसिंहनगर जनपद के बाजपुर में एक बड़े नकली दवा सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) के कुशल निर्देशन में एसटीएफ कुमाऊँ यूनिट, औषधि विभाग, स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग ने बाजपुर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक प्लांट पर छापा मारकर नकली और अपमिश्रित (मिलावटी) एलोपैथिक दवाइयों के अवैध निर्माण का भंडाफोड़ किया।
इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके से एक मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है, जिसकी पहचान धीरेंद्र पुत्र ब्रह्म सिंह, निवासी बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस के आयुर्वेदिक और फूड लाइसेंस की आड़ में देश की नामी फार्मास्यूटिकल कंपनियों के नाम से फर्जी दवाइयां बना रहा था।
फूड लाइसेंस की आड़ में चल रहा था करोड़ों का खेल
एसटीएफ और ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने जब बाजपुर औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट संख्या F-13 और F-14 में स्थित कोविल बायोटेक पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। पकड़े गए आरोपी धीरेंद्र ने पूछताछ में कुबूल किया कि उसके पास एलोपैथिक दवाइयां बनाने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। वह केवल फूड और आयुर्वेदिक लाइसेंस की आड़ लेकर STADMED, Macleods, Intas, और Sun Pharma जैसी देश की बेहद प्रतिष्ठित और नामी कंपनियों के नकली रैपर, फॉयल और बोतलों का इस्तेमाल कर रहा था। इन नामी ब्रांड्स के नाम पर धड़ल्ले से नकली एलोपैथिक जीवन रक्षक दवाइयां बाजार में सप्लाई की जा रही थीं।
लाखों की तादाद में जीवन रक्षक दवाएं बरामद
पुलिस टीम ने जब आरोपी की निशानदेही पर एनएच-74 स्थित एक गोपनीय गोदाम की तलाशी ली, तो वहां से 1 लाख से अधिक नकली टैबलेट और 15 हजार से ज्यादा सिरप की बोतलें बरामद की गईं। बरामद दवाओं में से ज्यादातर ऐसी दवाइयां हैं जिनका उपयोग आम लोग और मरीज एसिडिटी (एंटासिड), बैक्टीरियल इन्फेक्शन (एंटीबायोटिक), शरीर में दर्द और सूजन, नसों के दर्द (न्यूरोपैथिक पेन), प्रोस्टेट की बीमारियों, कैल्शियम-विटामिन की कमी और खून बढ़ाने (आयरन सप्लीमेंट) के लिए करते हैं। इन नकली दवाओं के सेवन से मरीजों की जान को सीधा खतरा हो सकता था।
बरामद की गई प्रमुख दवाओं की सूची में शामिल हैं:
- CEFIFINE-200: 11,200 टैबलेट
- GABAPIN: 28,500 टैबलेट
- VELTAM PLUS: 36,000 टैबलेट
- ALKASOL: 2,400 सिरप बोतलें
- OSTOCALCIUM B12: 9,560 सिरप बोतलें
- RUBIRED SUSPENSION: 1,600 बोतलें
- इसके अलावा भारी मात्रा में NIMUFIN, SUNCLAV और SOMPRAZ जैसी दवाइयां भी जब्त की गई हैं।
दवाइयों के साथ ही मौके से भारी मात्रा में नामी कंपनियों के प्रिंटेड लेबल, रोल, और दवाइयां बनाने व पैक करने के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरण जैसे एस.एस. टैंक, फिलिंग मशीन, सीलिंग मशीन और लेबलिंग मशीन भी जब्त की गई है।
नकली दवाओं के साथ हरियाणा की अवैध शराब का भी सिंडिकेट
इस छापेमारी में एसटीएफ को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी। नकली दवाइयों के इस काले कारोबार के साथ ही आरोपी अवैध अंग्रेजी शराब की तस्करी में भी लिप्त था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर हरियाणा से भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब मंगवाता था और उसे उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में सप्लाई करता था।
गोदाम और फैक्ट्री से मैकडॉवेल्स (MacDowell No.1) के 1,632 क्वार्टर, चंडीगढ़ मार्क वाली III RCS शराब की 1,016 बोतलें, 500 खाली ढक्कन, 7 बंडल नकली रैपर और 1,000 नई खाली कांच की बोतलें बरामद की गई हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों के पास से उत्तराखंड आबकारी विभाग की नकली सील और फर्जी होलोग्राम के 3 बंडल भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल शराब को असली दिखाने के लिए किया जाता था।
विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज, नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
पकड़े गए आरोपी धीरेंद्र के खिलाफ थाना बाजपुर में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं 338(3), 276, 277, 278, 318, 319 और 336 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, अवैध शराब और फर्जी होलोग्राम बरामद होने के मामले में उत्तराखंड आबकारी अधिनियम के तहत अलग से वैधानिक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखंड ने बताया कि एसटीएफ प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य आरोपियों और इसके अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस और ड्रग्स विभाग की टीमें लगातार जांच और दबिश दे रही हैं। जल्द ही इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा।
कार्रवाई में शामिल संयुक्त टीमें:
एसटीएफ टीम: इंस्पेक्टर विकास चौधरी, सब-इंस्पेक्टर विपिन चंद्र जोशी, सब-इंस्पेक्टर के.जी. मठपाल, हेड कांस्टेबल महेंद्र गिरी, रविंद्र सिंह, किशोर कुमार, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और तकनीकी सहायक किशन चंद्र शर्मा।
ड्रग्स विभाग टीम: सीनियर इंस्पेक्टर नीरज कुमार, मीनाक्षी बिष्ट, इंस्पेक्टर निधि शर्मा, शुभम कोटनाला और अर्चना उप्पल।
स्थानीय पुलिस टीम: सब-इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह मेहता और कांस्टेबल समीर चौहान।
आबकारी टीम: इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह बिष्ट और कृष्ण चंद।