रामनगर (उत्तराखंड)। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, भर्ती घोटालों और शिक्षा व्यवस्था के बढ़ते निजीकरण के खिलाफ अब जन-आक्रोश सड़कों पर उतरने लगा है। समाजवादी लोक मंच ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आइसा (AISA) के छात्र नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए जा रहे धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। इस आंदोलन की आग को उत्तराखंड तक पहुंचाते हुए मंच ने आगामी 19 जुलाई (रविवार) को रामनगर के लखनपुर चौक पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
मंच ने युवाओं, छात्रों और आम जनता से एकजुट होने की अपील करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मुख्य मांगों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल प्रभाव से रद्द करना, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाना और विवादास्पद ‘नई शिक्षा नीति 2020’ (NEP) को वापस लेना शामिल है।
भर्ती घोटालों और पेपर लीक से युवाओं में भारी असंतोष: गिरीश चंद्र
रामनगर के पैठ पड़ाव में आयोजित समाजवादी लोक मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता गिरीश चंद्र ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “वर्तमान सरकार खुली तानाशाही पर उतर आई है। देश का युवा सालों-साल तैयारी करता है, लेकिन परीक्षा के दिन पेपर लीक हो जाता है। एक के बाद एक हो रहे इन भर्ती घोटालों ने देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है, जिससे युवाओं में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।”
गिरीश चंद्र ने आगे कहा कि दिल्ली में पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आइसा के छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से सरकार कोई भी सकारात्मक संवाद करने को तैयार नहीं है। लोकतंत्र में बातचीत के रास्ते बंद करना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ता की जगह दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जबरन धरना स्थल से उठा लिया गया, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
जीडीपी का 10% शिक्षा पर खर्च करे सरकार: मुनीष कुमार
बैठक में मौजूद समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने नई शिक्षा नीति 2020 पर गंभीर आरोप लगाए। मुनीष कुमार ने कहा, “जब से इस नई शिक्षा नीति को देश पर थोपा गया है, तब से सरकारी स्कूल और कॉलेजों को लगातार बंद किया जा रहा है या उनका विलय किया जा रहा है। सरकार सोची-समझी रणनीति के तहत शिक्षा के क्षेत्र में कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के पूंजी निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे गरीब बच्चों के लिए पढ़ाई का सपना दूर होता जा रहा है।”
विकसित देशों का उदाहरण देते हुए मुनीष कुमार ने बताया कि दुनिया के समृद्ध और प्रगतिशील देश अपनी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शिक्षा व्यवस्था पर खर्च करते हैं। वहीं, भारत में केंद्र और राज्यों का कुल बजट मिलाकर भी जीडीपी का महज 4% भी शिक्षा पर व्यय नहीं किया जा रहा है।
मंच ने मांग उठाई है कि:
- देश के प्रत्येक नागरिक को पूर्व-प्राथमिक (Nursery) से लेकर परास्नातक (Post Graduation) तक पूरी तरह से निशुल्क, वैज्ञानिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए।
- शिक्षा का माध्यम अनिवार्य रूप से मातृभाषा होना चाहिए।
- शिक्षा के बजट को वर्तमान से बढ़ाकर जीडीपी का कम से कम 10% किया जाए ताकि संसाधनों की कमी दूर हो सके।
- शिक्षा को मुनाफा कमाने और व्यापार करने की वस्तु बनाना तुरंत बंद किया जाए।
रविवार को 11 बजे लखनपुर चौक पर जुटेंगे लोग, जनता से शामिल होने की अपील
समाजवादी लोक मंच की नेत्री ललिता रावत ने क्षेत्र के युवाओं, अभिभावकों, किसानों और आम नागरिकों से इस जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आग्रह किया है। उन्होंने आह्वान किया कि कल, यानी रविवार 19 जुलाई को दिन में 11:00 बजे सभी लोग रामनगर के ऐतिहासिक लखनपुर चौक पर पहुंचें और इस महा-धरना प्रदर्शन का हिस्सा बनकर छात्र और युवा विरोधी सरकार को एक कड़ा संदेश दें।
इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से बीडी नैनवाल, जमन राम, ललित उप्रेती, सरस्वती जोशी, कौशल्या चुनियाल, लक्ष्मी, मदन सिंह, राजेन्द्र सिंह और जगमोहन सिंह आदि शामिल थे। सभी सदस्यों ने एक सुर में सरकार के खिलाफ अंतिम दम तक संघर्ष करने का संकल्प लिया।