चंपावत (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच सूबे के चंपावत जिले से एक हैरान कर देने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बहादुर बेटी ने अपने पिता की जान बचाने के लिए साक्षात काल बनकर आए गुलदार (तेंदुए) से लोहा ले लिया। बेटी ने न सिर्फ अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने बुजुर्ग पिता को गुलदार के खूनी चंगुल से छुड़ाया, बल्कि सूझबूझ दिखाते हुए उस खूंखार तेंदुए को घर के एक कमरे के अंदर बंद (कैद) भी कर दिया। इस साहसिक घटना के बाद से पूरे इलाके में इस वीर बेटी की बहादुरी की चौतरफा चर्चा हो रही है।
घर में टीवी देख रहे बुजुर्ग पर तेंदुए का जानलेवा हमला
यह सनसनीखेज घटना चंपावत जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत सिमल्टा की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की देर रात सिमल्टा गांव निवासी 64 वर्षीय सुरेश चंद्र पांडे (पुत्र लक्ष्मी दत्त पांडे) रात का खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम से टेलीविजन (टीवी) देख रहे थे। इसी दौरान आबादी क्षेत्र में घूम रहा एक खूंखार गुलदार दबे पांव उनके घर के भीतर दाखिल हो गया। इससे पहले कि बुजुर्ग सुरेश चंद्र पांडे कुछ समझ पाते या शोर मचा पाते, घात लगाकर बैठे तेंदुए ने उन पर सीधा जानलेवा हमला बोल दिया। गुलदार के अचानक हुए इस हमले में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगे।
देवदूत बनकर आई बेटी, मौत के मुंह से खींच लाई पिता की जान
सुरेश चंद्र पांडे की चीख-पुकार सुनकर पास के ही कमरे से उनकी बेटी किरण पांडे मौके पर पहुंच गई। किरण कुछ दिनों पहले ही अपनी ससुराल से मायके आई हुई थी। सामने पिता को खून से लथपथ और गुलदार के चंगुल में फंसा देख किरण एक पल के लिए भी नहीं घबराई। वह अपने पिता के लिए साक्षात देवदूत बनकर सामने खड़ी हो गई। किरण ने बिना अपनी जान की परवाह किए गुलदार पर धावा बोल दिया।
उसने जोर-जोर से चीखना-चिल्लाना शुरू किया ताकि गुलदार का ध्यान भटके और साथ ही उसने गुलदार से सीधे मुकाबला करते हुए अपने पिता को उसके चंगुल से सुरक्षित बाहर खींच लिया। बेटी के इस अप्रत्याशित और आक्रामक रूप को देखकर तेंदुआ भी सहम गया और पीछे हट गया।
दिखाई गजब की सूझबूझ, गुलदार को कमरे में किया कैद
किरण पांडे का साहस यहीं नहीं रुका। पिता को गुलदार के चंगुल से छुड़ाने के तुरंत बाद उसने गजब की हाजिरजवाबी और सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही तेंदुआ कमरे के एक कोने की तरफ बढ़ा, किरण ने फुर्ती दिखाते हुए घायल पिता को बाहर निकाला और कमरे का दरवाजा बाहर से कसकर बंद कर दिया। इस तरह उसने उस आदमखोर तेंदुए को घर के अंदर ही कैद कर दिया। यदि किरण ने यह सूझबूझ न दिखाई होती, तो गुलदार भागकर गांव के अन्य लोगों या बच्चों को भी अपना निवाला बना सकता था।
वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन और ग्रामीणों की राहत
घर के अंदर गुलदार के कैद होने की खबर आग की तरह पूरे सिमल्टा गांव में फैल गई, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा हो गया। आनन-फानन में इस घटना की सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) सुनील कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम पिंजरा और आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची।
वन विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घर के अंदर कैद तेंदुए को पकड़ना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, इसलिए यह रेस्क्यू अभियान देर रात तक चलता रहा। आखिरकार वन कर्मियों की कड़ी मशक्कत के बाद गुलदार को सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद कर लिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए गुलदार को जल्द ही रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। गुलदार के पकड़े जाने के बाद ही सिमल्टा गांव के डरे-सहमे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
घायल बुजुर्ग अस्पताल में भर्ती, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
गुलदार के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बुजुर्ग सुरेश चंद्र पांडे को तत्काल चंपावत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस घटना को लेकर उप प्रभागीय वनाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि वन विभाग की ओर से पीड़ित परिवार को नियमानुसार हर संभव आर्थिक और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने वन्यजीवों के बढ़ते मूवमेंट को देखते हुए ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय सतर्क रहें। यदि आबादी क्षेत्र के आसपास किसी भी जंगली जानवर या तेंदुए की हलचल देखी जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय वनकर्मियों को दें ताकि समय रहते किसी भी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।