उत्तरकाशी। उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक क्षेत्र से पिछले महीने रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। लगभग एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बबीता का कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम ने खोज अभियान को और व्यापक करते हुए अब नटीण के दुर्गम एवं घने जंगलों में संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों तक तलाशी अभियान पहुंचा दिया है।

खोजी दल जंगल के भीतर उन सभी स्थानों की गहन जांच कर रहा है, जहां किसी भी प्रकार की गतिविधि होने की आशंका हो सकती है। टीम पहले से चिन्हित खुदे हुए स्थानों की दोबारा खुदाई कर रही है। इसके अलावा जंगल में बने पानी के टैंकों और अन्य संदिग्ध जगहों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण सुराग को नजरअंदाज न किया जाए।
बता दें कि 29 मई 2026 को दयारा बुग्याल क्षेत्र के गोई कैंप से बबीता पांडे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। घटना के बाद से पुलिस, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, भारतीय सेना, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान तथा हेलीकॉप्टर की सहायता से बड़े पैमाने पर खोज अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लग सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपहरण की आशंका के आधार पर दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तकनीकी जांच भी शुरू की थी, लेकिन जांच एजेंसियों को अभी तक कोई निर्णायक सुराग नहीं मिला है।

मंगलवार को अभियान का नेतृत्व कर रहे सीओ जनक सिंह पंवार और सीओ बड़कोट चंचल शर्मा के नेतृत्व में पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम एक बार फिर क्षेत्र में पहुंची। अधिकारियों के निर्देशन में सर्च टीम ने दयारा ट्रेक के बाईं ओर स्थित नटीण के घने जंगलों में विशेष अभियान चलाया। यहां संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों की गहन तलाशी ली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्गम और घने जंगलों के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, इसलिए हर संभावित स्थान की बार-बार जांच की जा रही है।
सीओ जनक सिंह पंवार ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में पहले भी कई बार खोजबीन की जा चुकी है, लेकिन अब सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अभियान को और व्यापक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है, जबकि तकनीकी साक्ष्यों और उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस की प्राथमिकता बबीता पांडे का जल्द से जल्द पता लगाना है।
बबीता पांडे उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली हैं और एमबीए की छात्रा हैं। वह अपने परिवार की सबसे बड़ी संतान और दो भाइयों की इकलौती बहन हैं। उनके भाई हर्षित पांडे और तनुज पांडे रामनगर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। परिवार में माता-पिता और दादी भी शामिल हैं। बबीता के अचानक लापता होने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है और लगातार प्रशासन से खोज अभियान तेज करने की मांग कर रहा है।

जानकारी के अनुसार बबीता अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थीं। उन्होंने हर्षिल, लामा टॉप और गंगोत्री धाम का भ्रमण किया था। इसके बाद तीनों दयारा बुग्याल ट्रेक पर पहुंचे और गोई कैंप में ठहरे। बताया जाता है कि 29 मई की रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। तब से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले का एक बेहद लोकप्रिय ट्रेकिंग स्थल है, जो समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में बर्फ से ढके मैदान और गर्मियों में हरे-भरे बुग्याल इसे देश के सबसे खूबसूरत ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में शामिल करते हैं। यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर यहां पहुंचते हैं। हालांकि बबीता पांडे के रहस्यमय ढंग से लापता होने की घटना ने इस क्षेत्र को चर्चा के केंद्र में ला दिया है और पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।
रिपोर्ट:कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।