देहरादून। उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2024 को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब नवनियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियों की वैधता पर काले बादल मंडराने लगे हैं। उत्तर प्रदेश से D.El.Ed (डीएलएड) की डिग्री हासिल कर उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षक बने 152 शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी के शैक्षणिक और निवास संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
यह मामला केवल अन्य राज्य से हासिल की गई डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत किए गए स्थायी निवास प्रमाणपत्र (डोमिसाइल) और अनिवार्य पात्रता शर्तों के साथ हुई संभावित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
डोमिसाइल और योग्यता के खेल पर गहराया शक
शिक्षा विभाग द्वारा जारी भर्ती नियमों के अनुसार, अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना और नियमानुसार निर्धारित मानकों के तहत डीएलएड उत्तीर्ण होना अनिवार्य था। शिकायत मिली है कि कई अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के संस्थानों से डीएलएड करने के बाद फर्जी या अनुचित तरीके से उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया और नौकरी हासिल कर ली।
इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है और अभ्यर्थियों के स्थायी निवास की प्रमाणिकता से लेकर पात्रता की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
11 जिलों में हड़कंप, पौड़ी जिले में सबसे ज्यादा 43 शिक्षक निशाने पर
विभाग ने राज्य के 11 जिलों में तैनात कुल 152 शिक्षकों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया है। केवल हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले ही फिलहाल इस जांच के दायरे से बाहर हैं।
सबसे ज्यादा हड़कंप पौड़ी गढ़वाल जिले में देखने को मिल रहा है, जहाँ अकेले 43 नवनियुक्त शिक्षक जांच के घेरे में आए हैं। संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले सप्ताह तक चिन्हित शिक्षकों के अभिलेखों की बिंदुवार जांच करें और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दें।
विभाग ने साफ किया है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की पुष्टि होती है, तो संबंधित शिक्षकों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
2400 से अधिक पदों की भर्ती पर मंडराया खतरा
यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर और संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2024 की इस भर्ती के जरिए 2400 से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। यदि 152 शिक्षकों के मामले में नियमों के उल्लंघन का खुलासा होता है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया के अन्य अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की भी वृहद स्तर पर जांच का रास्ता खुल सकता है। राज्य सरकार फर्जी डोमिसाइल और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है।
आगे क्या होगा और क्या पड़ेगा असर?
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से 152 शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। मामले में आगे की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:
- DEO की रिपोर्ट: सभी जिला शिक्षा अधिकारी अभिलेखों की सुनवाई पूरी कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेंगे।
- शिक्षकों का पक्ष: संबंधित शिक्षकों को अपनी प्रमाणिकता साबित करने का अंतिम मौका दिया जाएगा।
- कड़ी जांच: यदि मामले में फर्जीवाड़े का बड़ा नेटवर्क सामने आता है, तो प्रकरण को पुलिस या विजिलेंस जांच के लिए भेजा जा सकता है।
यदि जांच के बाद इन 152 शिक्षकों की नियुक्तियां निरस्त होती हैं, तो प्राथमिक विद्यालयों में एक बार फिर शिक्षकों के पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में शिक्षा विभाग को प्रतीक्षा सूची (Waiting List) से अभ्यर्थियों को मौका देना पड़ सकता है या फिर नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी।