देहरादून।देहरादून में मां-बेटी के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर देने वाला एक खौफनाक मामला सामने आया है। पांच जुलाई को जिस 15 साल की नाबालिग बच्ची के अपहरण की गुहार लेकर महिला थाने पहुंची थी, उसकी सच्चाई जानकार पुलिस के भी होश उड़ गए। आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर महिला ने अपनी ही जिगर के टुकड़े को महज डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया था। पूरी रकम न मिलने और भंडाफोड़ होने के डर से उसने अपहरण का झूठा नाटक रचा था। राजपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग को मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद कर लिया है और आरोपी मां समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
क्या था पूरा मामला?
राजपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने पांच जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई है। उसने आरोप लगाया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी बच्ची का अपहरण कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और नाबालिग की तलाश के लिए विशेष टीम का गठन किया।
सर्विलांस और CCTV से खुला राज
पुलिस टीम ने मामले की तहकीकात के लिए मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय तंत्र का सहारा लिया। कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस की जांच की सुई उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की ओर घूमी। सटीक सूचना के आधार पर देहरादून पुलिस ने मुजफ्फरनगर में दबिश दी और मौके से मनीष तथा लवी कुमार नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इन दोनों के कब्जे से नाबालिग बच्ची को सकुशल मुक्त कराया।
1.5 लाख में सौदा, शादी के नाम पर आगे 2 लाख में बेची
कड़ाई से की गई पूछताछ में लवी कुमार ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसने पिंकी मलिक नाम की एक बिचौलिये के जरिए नाबालिग को उसकी सगी मां से 1.5 लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद उसने जबरन शादी कराने के मकसद से बच्ची को आगे मनीष नामक व्यक्ति को 2 लाख रुपये में बेच दिया था।
इस जानकारी के सामने आते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिचौलिये पिंकी मलिक को नई मंडी मुजफ्फरनगर से और नाबालिग की मां को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।
मां ने कबूला गुनाह, क्यों रची अपहरण की झूठी कहानी?
पूछताछ के दौरान महिला ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि एक पारिवारिक समारोह में उसकी मुलाकात पिंकी मलिक से हुई थी। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उसने अपनी मासूम बेटी का सौदा कर दिया। सौदे के 1.5 लाख रुपये में से उसे सिर्फ 80 हजार रुपये ही मिले थे, जबकि बाकी रकम बाद में देने का वादा किया गया था।
जब तय समय बीत जाने पर भी बकाया पैसा नहीं मिला और महिला को यह डर सताने लगा कि उसकी इस करतूत का पर्दाफाश हो जाएगा, तो उसने खुद को बचाने और पैसे वसूलने के इरादे से पुलिस के सामने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, मानव तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू
राजपुर थाना पुलिस के अनुसार, इस घिनौने अपराध के उजागर होने के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की सख्त धाराएं बढ़ा दी गई हैं।
पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- मनीष (निवासी: जानसठ, मुजफ्फरनगर)
- लवी कुमार (निवासी: फलावदा, मेरठ)
- पिंकी मलिक (निवासी: नई मंडी, मुजफ्फरनगर)
- पीड़िता की मां (निवासी: देहरादून)
पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त या मानव तस्करी के मामलों में शामिल रहा है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अंतरराज्यीय गिरोहों और संदिग्धों की भी पहचान की जा रही है।