उत्तराखंड शिक्षक भर्ती: अल्मोड़ा में फर्जी TET प्रमाणपत्र से बने थे शिक्षक, 3 सहायक अध्यापक तत्काल प्रभाव से निलंबित
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए दस्तावेजों के सत्यापन के बाद तीन सहायक अध्यापकों के टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) प्रमाणपत्र अमान्य और संदिग्ध पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया पर विभागीय जांच बैठा दी गई है।
भैसियाछाना विकासखंड का मामला, शिकायत के बाद खुली पोल
यह पूरा मामला अल्मोड़ा जिले के भैसियाछाना विकासखंड स्थित तीन सरकारी प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ा हुआ है। इसी वर्ष इन विद्यालयों में नए सहायक अध्यापकों की तैनाती की गई थी। नियुक्ति के कुछ ही समय बाद शिक्षा विभाग को शिकायत प्राप्त हुई कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए कुछ शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र प्रामाणिक नहीं हैं और इनमें धांधली की गई है।
शिकायत को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग ने त्वरित कदम उठाए और संबंधित अध्यापकों के शैक्षणिक व पात्रता दस्तावेजों का पुन: सत्यापन (Verification) शुरू कराया।
परीक्षा एजेंसी की जांच में खुले राज
विभाग ने संदेह के घेरे में आए टीईटी प्रमाणपत्रों को जांच के लिए सीधे परीक्षा आयोजित कराने वाली आधिकारिक संस्था के पास भेजा। संस्था द्वारा भेजी गई सत्यापन रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तीनों शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्र अमान्य और फर्जी हैं।
जांच रिपोर्ट मिलते ही शिक्षा विभाग ने तीनों सहायक अध्यापकों पर निलंबन की गाज गिरा दी। अधिकारियों के अनुसार पहली नज़र में ये दस्तावेज देखने में बिल्कुल असली लग रहे थे, लेकिन तकनीकी और आधिकारिक सत्यापन के दौरान इनकी वैधता पूरी तरह खारिज हो गई।
कारण बताओ नोटिस जारी, बर्खास्तगी की लटक रही तलवार
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि निलंबित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस और आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। फिलहाल मामले की विस्तृत और गहन जांच की जा रही है। जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कठोर कानूनी व सेवा-संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने इस पूरी कार्रवाई से स्पष्ट संदेश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी किसी अन्य दस्तावेज में अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।