हल्द्वानी (उत्तराखंड)। देवभूमि के हल्द्वानी स्थित विशेष पोक्सो कोर्ट (अपर सत्र न्यायाधीश) ने एक 12 वर्षीय बालिका के साथ हुए गंभीर यौन अपराध के मामले में न्याय की मिसाल पेश करते हुए कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त को दोषी ठहराया और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा मुकर्रर की है। इसके साथ ही दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है और पीड़िता को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए भारी मुआवजे की संस्तुति की गई है।
कोर्ट का कठोर रुख: 20 साल की जेल और जुर्माना
विशेष पोक्सो कोर्ट की न्यायाधीश सविता चमोली की अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त सुरेश चौधरी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि जुर्माने की पूरी 20 हजार रुपये की राशि पीड़िता को सौंपी जाएगी, ताकि उसे राहत मिल सके।
मामले की सामाजिक संवेदनशीलता और पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), नैनीताल को भी अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता को 4 लाख रुपये की प्रतिकर (मुआवजा) राशि का भुगतान करे।
दिसंबर 2023 का है पूरा मामला
मामले की जानकारी देते हुए विशेष अभियोजन अधिकारी (पोक्सो) उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि यह सनसनीखेज घटना दिसंबर 2023 में घटित हुई थी। अभियुक्त सुरेश चौधरी मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मंगलपुरी का निवासी है, जो घटना के समय हल्द्वानी क्षेत्र में ही रह रहा था।
12 साल की नाबालिग पीड़िता के साथ हुई इस दरिंदगी के बाद पीड़िता के बयानों और परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर स्थानीय थाना मुखानी में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त सुरेश चौधरी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 5/6 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (क) और 376 (ख) के तहत आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया था।
पुलिस की मजबूत विवेचना और 10 गवाहों की गवाही
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक (एसआई) गुरविंदर कौर को सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने मामले से जुड़े तमाम भौतिक, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के दो महीने के भीतर यानी 2 मार्च 2024 को अदालत के समक्ष अपना विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया।
अदालत में चले इस मुकदमे के दौरान राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी बेहद मजबूत रही। अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व विशेष अभियोजन अधिकारी उपेन्द्र शर्मा और अधिवक्ता प्रतिभा पंत ने किया। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कुल 10 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया अंतिम फैसला
अदालत ने पुलिस की विवेचना, केस डायरी, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स, 10 गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों को गहराई से परखा। तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि सुरेश चौधरी पर लगे आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराध समाज पर गहरा आघात करते हैं और ऐसे अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। सभी साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात विशेष पोक्सो कोर्ट ने अभियुक्त सुरेश चौधरी को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा का ऐलान कर दिया। Court के इस फैसले का क्षेत्र में स्वागत किया जा रहा है और इसे न्याय प्रक्रिया में जनविश्वास को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।