उत्तरकाशी: उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क और तकनीकी खामियां विकास कार्यों के आड़े आने लगी हैं। विकासखंड डुंडा में ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था के खिलाफ ग्राम प्रधानों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रधान संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ऑनलाइन प्रणाली की जगह पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था को तुरंत बहाल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और आगामी विधानसभा चुनावों का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे।
यह फैसला डुंडा में आयोजित प्रधान संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अगुवाई ब्लॉक अध्यक्ष विनोद पडियार ने की। बैठक में विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सरकार की नई डिजिटल नीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
VB-GRAM-G योजना और ऑनलाइन हाजिरी पर कड़ा एतराज
सरकार द्वारा संचालित वीबी-ग्राम-जी (VB-GRAM-G यानी विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन) योजना के तहत मजदूरों की हाजिरी अब ऑनलाइन (डिजिटल) माध्यम से दर्ज करने का नियम बनाया गया है। ग्राम प्रधानों ने इसी व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है।
प्रधानों का तर्क है कि मैदानी इलाकों और पहाड़ी ढलानों की धरातलीय सच्चाई में जमीन-आसमान का अंतर है। पहाड़ों में हर दिन नेटवर्क की लुका-छिपी चलती रहती है, ऐसे में मजदूरों की हाजिरी समय पर दर्ज नहीं हो पाती।
पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां बनीं सबसे बड़ी बाधा
उत्तरकाशी जैसे सीमांत और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिले में इंटरनेट कनेक्टिविटी एक बहुत बड़ी चुनौती है। कई गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल फोन का नेटवर्क ढूंढने के लिए पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ता है।
ऑनलाइन व्यवस्था से पैदा हो रही प्रमुख समस्याएं:
- विकास कार्य ठप: समय पर हाजिरी दर्ज न होने के कारण मजदूरों को काम पर रखने में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे पंचायतों में निर्माण कार्य रुक गए हैं।
- मजदूरों का नुकसान: तकनीकी खामियों के चलते दिनभर मेहनत करने वाले ग्रामीणों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती, जिससे उनका भुगतान अटक जाता है।
- जनता में भारी असंतोष: काम बंद होने से स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी और रोष दोनों बढ़ रहा है।
- चुनावी बहिष्कार का ऐलान: यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 103 ग्राम पंचायतों के प्रधान आगामी विधानसभा चुनावों में न तो खुद हिस्सा लेंगे और न ही चुनाव प्रचार में सहयोग करेंगे।
- जनसमर्थन जुटाने की तैयारी: प्रधान अब गांव-गांव जाकर मजदूरों और ग्रामीणों को इस डिजिटल समस्या के प्रति जागरूक करेंगे, ताकि इसे एक बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी