उत्तरकाशी में यमराज बने गुलदार से भिड़ गई मां: खेत में निराई कर रही 12वीं की छात्रा पर हमला, दरांती-लाठी से बचाई बेटी की जान
सब-हेडिंग: मौत से आंखें मिलाने वाली साहसी मां की कहानी
उत्तरकाशी (डुंडा)। पहाड़ों में इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष नया नहीं है, लेकिन जब बात औलाद की जान पर आ जाए, तो एक मां हर खतरे से भिड़ने का जज्बा रखती है। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया उत्तरकाशी जिले के खट्टुखाल डुंडा से सामने आया है। यहाँ खेत में अपनी मां और बहन के साथ काम कर रही 12वीं की छात्रा पर अचानक एक खूंखार गुलदार (तेंदुए) ने जानलेवा हमला कर दिया।
छात्रा जब तक संभल पाती, गुलदार उसे अपने पंजों में दबोच चुका था। चीख-पुकार के बीच मौत सामने खड़ी थी, लेकिन मां की ममता ढाल बनकर आगे आ गई। मां ने बिना अपनी जान की परवाह किए पास पड़ी दरांती, लाठी और पत्थरों से सीधे गुलदार पर पलटवार कर दिया। मां के इस अदम्य साहस के आगे आखिर गुलदार को भी घुटने टेकने पड़े और वह छात्रा को छोड़कर नीचे जंगल की तरफ भाग निकला।
दोपहर का वक्त और अचानक झाड़ियों से निकला काल
घटना खट्टुखाल डुंडा स्थित एक खेत की है। 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा ऋषिता राणा पुत्री स्व. विरेन्द्र सिंह राणा अपनी मां और बहन के साथ घर के पास वाले खेत में निराई-गुड़ाई का काम कर रही थी। माहौल पूरी तरह शांत था और तीनों अपने काम में मग्न थीं। तभी पास की घनी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने अचानक ऋषिता पर छलांग लगा दी।
गुलदार का हमला इतना तेज और अचानक था कि ऋषिता को संभलने या भागने का जरा भी मौका नहीं मिला। गुलदार ने झपट्टा मारकर छात्रा को जमीन पर पटक दिया और उसके पैरों को अपने नुकीले दांतों व पंजों में जकड़ लिया।
दरांती और पत्थरों से खेला जान पर बाजी का खेल
अपनी बेटी को खूंखार गुलदार के पंजों में फंसा देख मां और बहन की रूह कांप गई, लेकिन भय के उस भयावह क्षण में मां ने हिम्मत नहीं हारी। मां ने पलक झपकाते ही पास में रखी दरांती और लाठी उठा ली। बिना एक पल गंवाए, मां सीधे गुलदार पर टूट पड़ीं।
एक तरफ ऋषिता दर्द से कराह रही थी, तो दूसरी तरफ मां लगातार गुलदार पर दरांती और लाठियों से वार कर रही थीं। साथ में मौजूद बहन ने भी हिम्मत दिखाते हुए आसपास पड़े भारी पत्थरों से गुलदार पर हमला करना शुरू कर दिया।
पहाड़ की मां का यह आक्रामक रूप देखकर गुलदार भी घबरा गया। उसे अहसास हो गया कि यहाँ शिकार करना आसान नहीं है। परिजनों के इस जोरदार और साहसिक विरोध के बाद आखिरकार गुलदार छात्रा को छोड़कर नीचे ढलान की ओर जंगल में भाग गया।
अस्पताल में चल रहा इलाज, पैरों पर गहरे घाव
गुलदार के पंजों और दांतों से ऋषिता के पैरों में बेहद गंभीर चोटें आई हैं। गुलदार के भागते ही परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ छात्रा को तुरंत उठाकर ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुंडा’ ले गए।
अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऋषिता को आपातकालीन उपचार दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा के पैरों में गहरे घाव हैं और उसका इलाज जारी है। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन हमले का खौफ अभी भी उसके चेहरे पर साफ देखा जा सकता है।
गांव में दहशत का माहौल, वन विभाग से सुरक्षा की गुहार
इस दिल देहला देने वाली घटना के बाद से खट्टुखाल डुंडा और आसपास के इलाकों में भारी दहशत का माहौल है। ग्रामीण अब अपने खेतों में जाने और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में गुलदार की सक्रियता काफी समय से देखी जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- प्रभावित क्षेत्र में तुरंत वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए।
- इलाके में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए।
- पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा और मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाए।
साहस को सलाम
पहाड़ी जीवन जितना सुंदर है, उतना ही कठिनाइयों और खतरों से भरा भी है। लेकिन खट्टुखाल डुंडा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मां का कलेजा किसी भी खतरे से बड़ा होता है। ऋषिता की मां द्वारा दिखाए गए इस अदम्य साहस की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है। यदि मां ने समय रहते अपनी जान पर रखकर दरांती न उठाई होती, तो आज एक बड़ा हादसा हो सकता था।
रिपोर्टउत्तरकाशी (डुंडा)। पहाड़ों में इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष नया नहीं है, लेकिन जब बात औलाद की जान पर आ जाए, तो एक मां हर खतरे से भिड़ने का जज्बा रखती है। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया उत्तरकाशी जिले के खट्टुखाल डुंडा से सामने आया है। यहाँ खेत में अपनी मां और बहन के साथ काम कर रही 12वीं की छात्रा पर अचानक एक खूंखार गुलदार (तेंदुए) ने जानलेवा हमला कर दिया।छात्रा जब तक संभल पाती, गुलदार उसे अपने पंजों में दबोच चुका था। चीख-पुकार के बीच मौत सामने खड़ी थी, लेकिन मां की ममता ढाल बनकर आगे आ गई। मां ने बिना अपनी जान की परवाह किए पास पड़ी दरांती, लाठी और पत्थरों से सीधे गुलदार पर पलटवार कर दिया। मां के इस अदम्य साहस के आगे आखिर गुलदार को भी घुटने टेकने पड़े और वह छात्रा को छोड़कर नीचे जंगल की तरफ भाग निकला।दोपहर का वक्त और अचानक झाड़ियों से निकला कालघटना खट्टुखाल डुंडा स्थित एक खेत की है। 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा ऋषिता राणा पुत्री स्व. विरेन्द्र सिंह राणा अपनी मां और बहन के साथ घर के पास वाले खेत में निराई-गुड़ाई का काम कर रही थी। माहौल पूरी तरह शांत था और तीनों अपने काम में मग्न थीं। तभी पास की घनी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने अचानक ऋषिता पर छलांग लगा दी।गुलदार का हमला इतना तेज और अचानक था कि ऋषिता को संभलने या भागने का जरा भी मौका नहीं मिला। गुलदार ने झपट्टा मारकर छात्रा को जमीन पर पटक दिया और उसके पैरों को अपने नुकीले दांतों व पंजों में जकड़ लिया।दरांती और पत्थरों से खेला जान पर बाजी का खेलअपनी बेटी को खूंखार गुलदार के पंजों में फंसा देख मां और बहन की रूह कांप गई, लेकिन भय के उस भयावह क्षण में मां ने हिम्मत नहीं हारी। मां ने पलक झपकाते ही पास में रखी दरांती और लाठी उठा ली। बिना एक पल गंवाए, मां सीधे गुलदार पर टूट पड़ीं।एक तरफ ऋषिता दर्द से कराह रही थी, तो दूसरी तरफ मां लगातार गुलदार पर दरांती और लाठियों से वार कर रही थीं। साथ में मौजूद बहन ने भी हिम्मत दिखाते हुए आसपास पड़े भारी पत्थरों से गुलदार पर हमला करना शुरू कर दिया।पहाड़ की मां का यह आक्रामक रूप देखकर गुलदार भी घबरा गया। उसे अहसास हो गया कि यहाँ शिकार करना आसान नहीं है। परिजनों के इस जोरदार और साहसिक विरोध के बाद आखिरकार गुलदार छात्रा को छोड़कर नीचे ढलान की ओर जंगल में भाग गया।अस्पताल में चल रहा इलाज, पैरों पर गहरे घावगुलदार के पंजों और दांतों से ऋषिता के पैरों में बेहद गंभीर चोटें आई हैं। गुलदार के भागते ही परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ छात्रा को तुरंत उठाकर ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुंडा’ ले गए।अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऋषिता को आपातकालीन उपचार दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा के पैरों में गहरे घाव हैं और उसका इलाज जारी है। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन हमले का खौफ अभी भी उसके चेहरे पर साफ देखा जा सकता है।गांव में दहशत का माहौल, वन विभाग से सुरक्षा की गुहारइस दिल देहला देने वाली घटना के बाद से खट्टुखाल डुंडा और आसपास के इलाकों में भारी दहशत का माहौल है। ग्रामीण अब अपने खेतों में जाने और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं।घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में गुलदार की सक्रियता काफी समय से देखी जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने मांग की है कि:प्रभावित क्षेत्र में तुरंत वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए।इलाके में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए।पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा और मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाए।साहस को सलामपहाड़ी जीवन जितना सुंदर है, उतना ही कठिनाइयों और खतरों से भरा भी है। लेकिन खट्टुखाल डुंडा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मां का कलेजा किसी भी खतरे से बड़ा होता है। ऋषिता की मां द्वारा दिखाए गए इस अदम्य साहस की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है। यदि मां ने समय रहते अपनी जान पर रखकर दरांती न उठाई होती, तो आज एक बड़ा हादसा हो सकता था।
रिपोर्ट:कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।