उत्तराखंड (उत्तराखंड)। उफनती नदियां और अचानक बदलता मौसम इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों के लिए भी काल बन जाता है। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर यमुना नदी के किनारे देखने को मिला, जहाँ 10 से 12 बेजुबान मवेशी उफनती नदी की तेज धार में फंस गए। हालांकि, सही समय पर मिली सूचना और बड़कोट फायर सर्विस टीम की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया और सभी बेजुबानों की जिंदगी सकुशल बचा ली गई।
कैसे फँसे उफनती नदी के बीच मवेशी?
घटना नौगांव स्थित यमुना नदी के पुल के पास की है। हर रोज की तरह मवेशी नदी के आसपास चर रहे थे। अचानक नदी के जलस्तर में आई तेजी और पानी के बहाव के कारण किनारे पर मौजूद गाय और बैल पानी के तेज घेरे में आ गए। देखते ही देखते करीब 10 से 12 मवेशी चारों तरफ से पानी से घिर गए।
पानी का बहाव इतना तेज था कि जानवरों के लिए खुद तैरकर बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। मवेशी अपनी जान बचाने के लिए नदी के बीच बने एक छोटे से टीलेनुमा हिस्से पर खड़े होकर असहाय स्थिति में मदद का इंतजार कर रहे थे।

एक कॉल और हरकत में आया तंत्र
जब स्थानीय निवासी गणेश ने यमुना नदी के पास गायों और बैलों को इस तरह जिंदगी और मौत से जूझते देखा, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए फोन पर बड़कोट फायर सर्विस टीम को इसकी खबर दी। गणेश द्वारा दी गई सटीक जानकारी के कारण राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी देरी के शुरू हो सका।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम एक्शन मोड में आ गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा राहत उपकरणों और वाटर रेस्क्यू गियर के साथ फायर सर्विस की टीम तुरंत नौगांव स्थित यमुना पुल के लिए रवाना हुई।

फायर सर्विस का हैरत अंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन
मौके पर पहुँचकर फायर सर्विस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी का तेज बहाव और मवेशियों को घबराहट से बचाना था। जरा सी चूक किसी भी बेजुबान को नदी के तेज बहाव में बहा सकती थी।
रेस्क्यू टीम के जांबाजों ने बिना वक्त गंवाए अपनी रणनीति बनाई:
- सुरक्षा डोरियों का इस्तेमाल: टीम के सदस्यों ने खुद को और मवेशियों को सुरक्षित बांधने के लिए मजबूत रेस्क्यू रस्सियों का सहारा लिया।
- मवेशियों को शांत करना: तेज पानी और इंसानों को पास आते देख मवेशी घबरा रहे थे। टीम ने सबसे पहले उन्हें शांत किया ताकि वे रेस्क्यू के दौरान भड़क न जाएँ।
- एक-एक कर सुरक्षित निकासी: जांबाजों ने नदी की उफनती लहरों में उतरकर एक-एक गाय और बैल को सहारा दिया और खींचकर नदी के सुरक्षित किनारे तक पहुँचाया।

सभी 10-12 मवेशी सुरक्षित, ग्रामीणों ने जताई राहत
कड़ी मशक्कत और जोखिम भरे इस ऑपरेशन के बाद आखिरकार फायर सर्विस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली। नदी में फंसे सभी 10 से 12 मवेशियों को बिना किसी नुकसान के पूरी तरह सुरक्षित और सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होते ही मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और फायर सर्विस टीम के इस सराहनीय और त्वरित कार्य की जमकर तारीफ की। अगर जरा सी भी देर हो जाती, तो पानी का स्तर बढ़ने से सभी मवेशी बह सकते थे।

आपदा के समय सतर्कता ही बचाव है
पहाड़ी इलाकों में नदियों के जलस्तर का कोई भरोसा नहीं होता। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत होती है। फायर सर्विस टीम की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया कि चाहे इंसानी जान हो या बेजुबान जानवर, हर एक जिंदगी अनमोल है।
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।