रामनगर। उत्तराखंड के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शुमार रामनगर शहर में इन दिनों व्यापारी, करदाता और कर अधिवक्ता जीएसटी से जुड़ी समस्याओं को लेकर खासे परेशान हैं। स्थानीय राज्य कर कार्यालय में पूर्णकालिक अधिकारी की तैनाती न होने से रोजमर्रा के विभागीय कार्य ठप पड़ रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने राज्य कर विभाग, कुमाऊँ संभाग (हल्द्वानी) की संयुक्त आयुक्त हेमा बिष्ट से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द समस्या के समाधान की पुरजोर मांग की।
स्थानांतरण के बाद गहराया संकट
दरअसल, यह पूरा मामला जुलाई 2026 में हुए अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद शुरू हुआ। रामनगर राज्य कर कार्यालय में नए राज्य कर अधिकारी की नियुक्ति तो कर दी गई, लेकिन उन्हें मुख्य काम के साथ-साथ हल्द्वानी सेक्टर के ‘एसआईआर’ (SIR) से जुड़े कार्यों का भी अतिरिक्त दायित्व सौंप दिया गया। दो अलग-अलग जगहों का कार्यभार होने के कारण अधिकारी रामनगर कार्यालय को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। नतीजा यह हो रहा है कि रामनगर के करदाताओं की फाइलों का निपटारा अटका हुआ है।
व्यापारियों और अधिवक्ताओं की बढ़ीं मुश्किलें
रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. पूरन चन्द्र पाण्डे और उपसचिव एडवोकेट डॉ. मनु अग्रवाल ने विभागीय स्थिति पर चिंता जताते हुए संयुक्त आयुक्त के सामने जमीनी हकीकत रखी। उन्होंने बताया कि रामनगर एक बड़ा और तेजी से उभरता हुआ व्यापारिक केंद्र है। यहाँ हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े व्यापारी, उद्योगपति, करदाता और कर अधिवक्ता जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, स्क्रूटनी और शिकायतों के निवारण के सिलसिले में राज्य कर कार्यालय पहुँचते हैं।
अधिकारी के नियमित रूप से उपलब्ध न रहने की वजह से अधिवक्ताओं की सुनवाई सही समय पर नहीं हो पा रही है। समयबद्ध तरीके से काम न होने से करदाताओं पर अनावश्यक पेनल्टी और कानूनी पेचीदगियों का खतरा मंडराने लगता है, जिससे पूरे व्यापारिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
“रामनगर जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र में आधे-अधूरे समय के लिए अधिकारी का होना प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करता है। इससे न केवल राजस्व प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि करदाताओं का विश्वास भी डगमगाता है।”
टैक्स बार एसोसिएशन ने रखीं दो प्रमुख मांगें
अपनी मांगों को मजबूती से रखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने विभाग के सामने स्पष्ट विकल्प रखे हैं:
- अतिरिक्त प्रभार से मुक्ति: वर्तमान राज्य कर अधिकारी को हल्द्वानी सेक्टर के एसआईआर संबंधी अतिरिक्त जिम्मेदारियों से तुरंत मुक्त किया जाए, ताकि वे केवल रामनगर कार्यालय के कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।
- वैकल्पिक नियुक्ति: यदि प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से वर्तमान अधिकारी को मुक्त करना संभव न हो, तो बिना किसी देरी के किसी अन्य राज्य कर अधिकारी को रामनगर के जीएसटी संबंधी कार्यों के निष्पादन के लिए पूर्णकालिक रूप से अधिकृत किया जाए।
संयुक्त आयुक्त ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद संयुक्त आयुक्त हेमा बिष्ट ने ज्ञापन स्वीकार किया और मामले की संवेदनशीलता को समझा। उन्होंने टैक्स बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे प्रकरण का प्रशासनिक परीक्षण कराएंगी और नियमों के तहत जो भी जरूरी कदम होंगे, वे शीघ्र उठाए जाएंगे।
उम्मीद जताई जा रही है कि विभाग इस दिशा में जल्द ही ठोस फैसला लेगा, जिससे रामनगर के सैकड़ों व्यापारियों, करदाताओं और अधिवक्ताओं को विभागीय सुस्ती और पेंडिंग पड़े कामों से स्थायी राहत मिल सकेगी।