रामनगर : देश में शिक्षा सुधारों की मांग और लगातार होते पेपर लीक व भर्ती घोटालों के खिलाफ आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी भूख हड़ताल के समर्थन में अब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी लोक मंच के कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने और शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने की मांग को लेकर लखनपुर चौक पर एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया।
भारी बारिश के बीच लखनपुर चौक पर फूटा गुस्सा
इलाके में हो रही भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए। मूसलाधार बरसात के बीच समाजवादी लोक मंच के बैनर तले जुटे कार्यकर्ताओं और विभिन्न जनसंगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने का संचालन करते हुए ललित उप्रेती ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। ललित उप्रेती ने कहा कि वर्तमान सरकार का रवैया औपनिवेशिक काल की अंग्रेजी हुकूमत से भी ज्यादा क्रूर और दमनकारी हो चुका है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के छात्र नेता, काक्रोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता और प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भी ज्यादा समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सरकार छात्रों, युवाओं और नागरिकों की जायज समस्याओं का संवाद के जरिए समाधान निकालने के बजाय लाठी और दमन के दम पर आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है।
पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर उठाए गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने देश की वर्तमान परीक्षा प्रणाली और रोजगार व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की। ललित उप्रेती ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान शासनकाल में पेपर लीक होना और प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाले होना एक आम बात बन चुकी है। इन घोटालों ने देश के करोड़ों होनहार युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। परीक्षाओं की शुचिता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और इसके लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्रालय जिम्मेदार है। उन्होंने देश की जनता से अपील की कि युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए अब समय आ गया है कि समूचे देश के नागरिक एकजुट होकर इस जनविरोधी व्यवस्था के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष की शुरुआत करें।

नई शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा के कॉर्पोरेटाइजेशन का विरोध
धरने को संबोधित करते हुए समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने केंद्र सरकार के ‘विश्व गुरु’ वाले नारे को एक बड़ा जुमला करार दिया। मुनीष कुमार ने आरोप लगाया कि भारत को शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का दावा करने वाली सरकार असल में शिक्षा का पूरी तरह से निजीकरण करने पर तुली हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति के माध्यम से देश के शिक्षा क्षेत्र को विदेशी कंपनियों और बड़े पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने शिक्षण संस्थान खोलने की खुली छूट दी जा रही है। मुनीष कुमार ने स्पष्ट किया कि ये विदेशी संस्थान भारत के गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को शिक्षित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के शिक्षा बाजार से भारी मुनाफा कमाने के लिए आ रहे हैं। इससे आने वाले समय में उच्च शिक्षा आम जनता की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो जाएगी।
सरकार ने ठंडे बस्ते में डाले जनता के सुझाव
मुनीष कुमार ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में जब सरकार ने नई शिक्षा नीति के मसौदे पर पूरे देश से सुझाव और संशोधन मांगे थे, तब समाजवादी लोक मंच ने भी बेहद गंभीरता से विचार-विमर्श करके चार पृष्ठों का एक विस्तृत सुझाव और संशोधन प्रस्ताव सरकार को भेजा था। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सरकार ने जनसंगठनों द्वारा भेजे गए इन महत्वपूर्ण संशोधनों पर न तो कोई विचार किया, न ही उन्हें स्वीकार किया और न ही आज तक उस पत्र का कोई जवाब देना उचित समझा। इससे साफ पता चलता है कि सरकार केवल पूंजीपतियों के हित में नीतियां बनाना चाहती है और आम जनता के लोकतांत्रिक सुझावों की उसे कोई परवाह नहीं है।
केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की मांग
मंच ने सरकार के सामने बुनियादी शिक्षा सुधारों को लेकर अपनी मांगों को एक बार फिर दोहराया। समाजवादी लोक मंच की मुख्य मांगों में शिक्षा के निजीकरण पर तुरंत पूर्ण रोक लगाना, शिक्षा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश को प्रतिबंधित करना, और देश के प्रत्येक बच्चे को केजी (किंडरगार्टन) से लेकर पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) तक पूरी तरह से निशुल्क, वैज्ञानिक, गुणवत्तापूर्ण, समान और मातृभाषा में शिक्षा मुहैया कराना शामिल है। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली भोजन माताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सभी संविदा व तदर्थ शिक्षकों को तुरंत नियमित नियुक्ति देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
दोहरी शिक्षा प्रणाली के खिलाफ एकजुटता का आह्वान
धरने में मौजूद समाजवादी नेता जमन राम ने देश में चल रही दोहरी और तिहरी शिक्षा प्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अमीरों के बच्चों के लिए अलग और गरीबों के बच्चों के लिए अलग तरह की शिक्षा व्यवस्था देश के संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन है। उन्होंने शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और पाठ्यक्रम के सांप्रदायिकीकरण के खिलाफ समाज के हर तबके से एकजुट होने का आह्वान किया। जमन राम ने कहा कि जब तक जनता सड़कों पर नहीं उतरेगी, तब तक सरकार को जनहित के फैसले लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
इस विरोध प्रदर्शन और जनसभा को आइसा के सुमित कुमार, पछास के रवि सिंह, महिला एकता मंच की ललिता रावत, रेनू सैनी, मानवी, उपपा नेता मौ आसिफ, और व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल सहित प्रेमराम ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक सुर में जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारियों के प्रति अपनी पूर्ण एकजुटता प्रकट की और चेतावनी दी कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से नहीं हटाया गया और शिक्षा सुधारों को लागू नहीं किया गया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।