उत्तरकाशी।जिला कांग्रेस कमेटी ने जनपद में आयोजित हो रहे तथाकथित ‘हिंदू सम्मेलनों’ पर तीखा प्रहार करते हुए इसे सत्ता बचाने का एक हताश प्रयास करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 9 वर्षों में विकास के हर पैमाने पर विफल रही सरकार अब पहाड़ की भोली-भाली जनता को धर्म के नाम पर भ्रमित कर रही है।
धर्म का डर दिखाकर वोट बैंक की घेराबंदी
कांग्रेस कमेटी ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि जब धरातल पर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे नदारद हैं, तब समाज को बाँटने की राजनीति तेज कर दी गई है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा:
”पहाड़ की शांत वादियों में यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि सत्ता न मिलने पर धर्म खतरे में पड़ जाएगा। असल में धर्म नहीं, बल्कि उन लोगों की राजनीतिक जमीन खतरे में है जो विकास के नाम पर भ्रष्टाचार को चरम पर ले गए हैं।”
अंकिता भंडारी हत्याकांड और वीआईपी के नाम पर मौन क्यों?
पार्टी ने इन सम्मेलनों के उद्देश्य पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि क्या इन मंचों से पहाड़ की बहू-बेटियों की सुरक्षा की आवाज गूंजी? कांग्रेस ने पूछा कि बहन अंकिता भंडारी के हत्यारों और उन्हें संरक्षण देने वाले ‘वीआईपी’ को सजा दिलाने की मांग इन आयोजनों में क्यों नहीं उठी?
शंकराचार्य का अपमान और सनातन की परिभाषा पर सवाल
कांग्रेस ने तीखे शब्दों में कहा कि सनातन धर्म सत्य और न्याय का प्रतीक है। पार्टी ने सवाल किया:
- क्या इन सम्मेलनों में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुए दुर्व्यवहार पर विरोध जताया गया?
- क्या यह आयोजन केवल आगामी चुनावों के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण का जरिया मात्र हैं?
“कपड़े बदलने की तरह दल बदलने वालों से रहे सावधान”
जिला कमेटी ने क्षेत्र के दलबदलू नेताओं पर भी हमला बोला। कांग्रेस का कहना है कि जिनके पास अपनी कोई विचारधारा नहीं है, वे कपड़े बदलने की तरह दल बदल रहे हैं। लेकिन उत्तरकाशी की जागरूक जनता विकास और जनहित के मुद्दों पर निर्णय लेना बखूबी जानती है।
2027 के लिए संकल्प: विकास और समरसता की नई दिशा
कांग्रेस ने जनता को विश्वास दिलाया कि वर्ष 2027 में उत्तरकाशी में भाई-भतीजावाद और निजी स्वार्थ की राजनीति का अंत होगा। पार्टी एक नई सोच और समरसता की विचारधारा के साथ गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं की मजबूत आवाज बनकर उभरेगी।
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।
