हक की आवाज़: “दोहरे शोषण के खिलाफ महिलाओं को खड़ा करना होगा एक बड़ा सामाजिक आंदोलन”

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उपपा ने आमडंडा खत्ते में आयोजित की विचार गोष्ठी, पुरुष प्रधान मानसिकता पर प्रहार

रामनगर।अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर आज उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) द्वारा आमडंडा खत्ते में एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता और वर्तमान व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

सांस्कृतिक चेतना के साथ आगाज़

कार्यक्रम की शुरुआत ‘युवा सांस्कृतिक कला मंच’ के नन्हे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत प्रेरक गीतों से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह में जोश भर दिया। गोष्ठी का सफल संचालन किरन आर्या द्वारा किया गया।

व्यवस्था परिवर्तन की मांग

​मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा:

​”आज भी महिलाएं जन्म से लेकर घर और बाहर तक दोहरे शोषण का शिकार हो रही हैं। इस दमनकारी चक्र को तोड़ने के लिए महिलाओं को स्वयं एक सशक्त सामाजिक आंदोलन की मशाल थामनी होगी। बिना एकजुट हुए अत्याचारों से मुक्ति संभव नहीं है।”

इतिहास के पन्नों से: संघर्ष की गाथा

​’साइंस फॉर सोसाइटी (यूनाइटेड)’ के प्रवक्ता गिरीश आर्य ने महिला दिवस के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिवस मात्र औपचारिकता नहीं, बल्कि संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने 1910 के कोपेनहेगन सम्मेलन और क्लारा जेटकिन के उन ऐतिहासिक प्रस्तावों को याद किया, जिनमें:

  • ​काम के घंटों को 12 से घटाकर 8 करना।
  • ​समान कार्य के लिए समान वेतन।
  • ​कार्यस्थल पर सुरक्षा और मताधिकार जैसे मौलिक मुद्दे शामिल थे।

लालमणी और पार्टी कार्यकर्ता आसिफ ने भी संबोधित करते हुए कहा कि 1908-09 के मजदूर आंदोलनों ने महिलाओं को जो अधिकार दिलाए थे, आज की पूंजीवादी और पुरुष प्रधान मानसिकता वाली व्यवस्था उन्हें फिर से छीनने की कोशिश कर रही है। घर हो या बाहर, असुरक्षा का माहौल एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

जन-भागीदारी का उमड़ा सैलाब

​गोष्ठी में वक्ताओं के रूप में मेघा, सरस्वती देवी, नंदी देवी, निर्मला देवी, नवीन चन्द्र, दिनेश चन्द्र सहित कई प्रबुद्ध जनों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर ललिता देवी, नीता देवी, भावना, सरिता रावत, शांति देवी, जशोदा, देवकी देवी और पुष्पा देवी सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय महिलाओं और ग्रामीणों ने भागीदारी कर एकजुटता का संकल्प लिया।

निष्कर्ष: गोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि महिलाएं अपनी सुरक्षा और हक के लिए न केवल जागरूक होंगी, बल्कि इस शोषक व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज को और बुलंद करेंगी।

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