धर्मनगरी में मानवता शर्मसार, सजगता ने बचाई मासूम की अस्मत
हरिद्वार: देवभूमि हरिद्वार, जहाँ लाखों श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ कदम रखते हैं, वहाँ के मुख्य रेलवे स्टेशन परिसर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। रेलवे स्टेशन के टिकट घर स्थित महिला शौचालय में एक साढ़े चार साल की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था; जनता की तत्परता और जीआरपी हरिद्वार (GRP Haridwar) की मुस्तैदी ने एक मासूम की गरिमा को सुरक्षित बचा लिया और दरिंदे को उसके अंजाम तक पहुँचाया।
घटना का विवरण: जब मासूम की चीख से दहल उठा स्टेशन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश से आया एक परिवार तीर्थाटन के पश्चात वापसी की प्रतीक्षा में हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर रुका हुआ था। परिवार के साथ उनकी साढ़े चार साल की मासूम बेटी भी थी। यात्रा की थकान के बीच बच्ची ने जब शौचालय जाने की इच्छा जताई, तो पिता ने उसे पास ही स्थित शौचालय भेज दिया। पिता को आभास भी नहीं था कि वहां पहले से ही एक ‘नरपिशाच’ अपनी गंदी नजरें टिकाए बैठा है।
जैसे ही मासूम ने शौचालय के भीतर प्रवेश किया, घात लगाकर बैठे आरोपी ने बिजली की गति से अंदर घुसकर दरवाजा बंद कर लिया। एकांत पाकर उसने मासूम के साथ दरिंदगी की कोशिश (Attempted Rape) शुरू कर दी। वह अबोध बच्ची अपनी रक्षा के लिए चीखने-चिल्लाने लगी। उसकी करुण पुकार जब शौचालय की दीवारों को चीरकर बाहर निकली, तो वहां मौजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।
जनता का साहस और आरोपी की गिरफ्तारी
बच्ची की चीख सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने जब दरवाजा अंदर से बंद पाया, तो बिना समय गंवाए साहस का परिचय दिया। लोगों ने सामूहिक बल का प्रयोग कर शौचालय का दरवाजा तोड़ दिया। अंदर का दृश्य देख लोगों का खून खौल उठा; आरोपी मासूम को अपनी गिरफ्त में लिए हुए था। जनता ने तुरंत बच्ची को सुरक्षित छुड़ाया, लेकिन भीड़ का लाभ उठाकर आरोपी वहां से भागने में सफल रहा।

घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस (GRP Police) सक्रिय हो गई। एसपी जीआरपी अरुणा भारती के निर्देशन और थाना प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक के नेतृत्व में स्टेशन परिसर की तत्काल घेराबंदी की गई। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों और स्थानीय मुखबिरों की सहायता से सर्च ऑपरेशन चलाया। चंद घंटों की मशक्कत के बाद आरोपी को रेलवे स्टेशन परिसर के पास से ही दबोच लिया गया।
अपराधिक इतिहास और कानूनी कार्रवाई
पकड़े गए आरोपी की पहचान गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी के रूप में हुई है। पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी घुमंतू प्रवृत्ति का है और वह अक्सर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर वारदातों को अंजाम देने की फिराक में रहता है। पुलिस अब उसके पिछले अपराधिक इतिहास (Criminal History) को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पहले भी ऐसी घटनाओं में संलिप्त रहा है या नहीं।
जीआरपी ने आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता
यह घटना हमें सचेत करती है कि सार्वजनिक स्थानों पर मासूम सुरक्षा (Child Safety) को लेकर हमें और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन जैसी व्यस्त जगह पर इस तरह का दुस्साहस कानून के भय पर भी सवाल उठाता है। हालांकि, स्थानीय जनता की सजगता और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रशंसनीय है, जिसके कारण एक अपराधी आज सलाखों के पीछे है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि भविष्य में किसी मासूम को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
