23 अप्रैल को पेशावर विद्रोह दिवस पर धरना: मजदूरों की रिहाई और 24 हजार न्यूनतम वेतन की मांग तेज


रामनगर। संयुक्त संघर्ष समिति ने 23 अप्रैल को पेशावर विद्रोह दिवस के अवसर पर एक बड़े धरना प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में गिरफ्तार किए गए मजदूरों और श्रमिक नेताओं की रिहाई समेत कई प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी। समिति ने यह निर्णय व्यापार भवन रामनगर में आयोजित एक बैठक के दौरान लिया, जिसमें विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में वक्ताओं ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हाल के दिनों में हुए श्रमिक आंदोलनों के दौरान 400 से अधिक मजदूरों और कई संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इनमें इंकलाबी मजदूर केंद्र और बिगुल मजदूर दस्ता से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हैं। समिति ने इन सभी की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए इसे श्रमिक अधिकारों का दमन करार दिया।

संयुक्त संघर्ष समिति ने अपने प्रस्ताव में मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग रखी है। इसके अलावा ओवरटाइम के लिए दोगुनी मजदूरी, सभी श्रमिकों को स्थायी नियुक्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे पीएफ और ईएसआई की सुविधाएं सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। समिति का कहना है कि मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर वर्ग गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, ऐसे में वेतन वृद्धि अत्यंत आवश्यक हो गई है।

बैठक के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों की समस्याओं को सुनने के बजाय आंदोलनों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन वर्तमान में इस अधिकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर देश की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद कुकिंग गैस सहित कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे आम जनता और मजदूर वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसी कारण देशभर में लाखों श्रमिक वेतन वृद्धि, ओवरटाइम की दोहरी मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।

संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने क्षेत्र के मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे 23 अप्रैल को दिन में 11 बजे लखनपुर चौक पर आयोजित धरना प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल मजदूरों के अधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

बैठक में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने देश की जनता से भी अपील की कि वे इस संघर्ष में एकजुट होकर मजदूर वर्ग का समर्थन करें।

इस बैठक में किसान संघर्ष समिति के महेश जोशी, उपपा नेता प्रभात ध्यानी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, भूवन चंद्र, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, गिरीश चंद्र और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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