रामनगर (उत्तराखंड):उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मोहान में स्थित देश की एकमात्र सरकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा बनाने वाली कंपनी ‘इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (IMPCL) के विनिवेश (निजीकरण) का मामला अब गरमाता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस मुनाफे वाले उपक्रम को एक निजी कंपनी को बेचे जाने के प्रस्ताव के खिलाफ फैक्ट्री गेट पर कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है।
अब इस आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का भी खुला समर्थन मिलने लगा है। शुक्रवार को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपा) और इंकलाबी मजदूर केंद्र के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलित कर्मचारियों को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया और सरकार के इस फैसले को उत्तराखंड के संसाधनों की खुली लूट करार दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, आंदोलन को दिया धार
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी और इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रूहेला के नेतृत्व में एक विशेष प्रतिनिधिमंडल मोहान स्थित IMPCL फैक्ट्री गेट पहुंचा। वहां उन्होंने ‘आईएमपीसीएल कर्मचारी संघ’ के पदाधिकारियों से विस्तृत वार्ता की और उनके इस हक की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का वादा किया।
इस दौरान आईएमपीसीएल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत और सचिव भूपेंद्र सिंह अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को एक ज्ञापन सौंपा और वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि यह कारखाना उत्तराखंड की अस्मिता और रोजगार से जुड़ा है, जिसे बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
1000 करोड़ की सरकारी कंपनी मात्र 121 करोड़ में बेचने का आरोप
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
”IMPCL सरकारी क्षेत्र की देश की इकलौती कंपनी है जो प्रामाणिक आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाती है। साल 1978 में अपनी स्थापना के बाद से यह कंपनी लगातार मुनाफे में चल रही है। इसके बावजूद सरकार इसका निजीकरण कर रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस कंपनी के पास 200 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति (Assets) है और 1200 से अधिक दवाइयां बनाने का लाइसेंस है, उसे मात्र 121 करोड़ रुपये में ‘स्काईमैप फार्मा’ (Skymap Pharma) नामक एक निजी कंपनी को सौंपा जा रहा है।”
रावत ने आगे कहा कि IMPCL एक स्थापित और विश्वसनीय ब्रांड है। यदि इसकी वास्तविक मार्केट वैल्यू (बाजार मूल्य) आंकी जाए, तो यह 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। ऐसे में इस बेशकीमती सरकारी धरोहर को कौड़ियों के दाम अपने चहेते उद्योगपतियों को बेचना एक बहुत बड़ा घोटाला है।
नियमों को ताक पर रखकर हुआ सौदा, हाई कोर्ट पहुंचा मामला
कर्मचारी संघ के महामंत्री बी. एस. अधिकारी ने इस सौदे में कानूनी कमियों और नियमों के उल्लंघन का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस तानाशाही फैसले के खिलाफ कर्मचारियों ने माननीय उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया है और एक याचिका दायर की है।
अधिकारी ने मुख्य कानूनी पेंच को उजागर करते हुए कहा कि:
- फॉरेस्ट लैंड का उल्लंघन: IMPCL कारखाना जिस जमीन पर स्थापित है, वह वन विभाग (Forest Department) द्वारा लीज पर दी गई है। नियमतः इस जमीन के मालिकाना हक या व्यावसायिक सौदे के लिए वन विभाग से कोई अनुमति (NOC) नहीं ली गई है।
- अनुभवहीन कंपनी को ठेका: जिस ‘स्काईमैप फार्मा’ कंपनी को यह कारखाना बेचा गया है, वह खुद एक घाटे में चल रही कंपनी है। सबसे बड़ी बात यह है कि उस कंपनी के पास आयुर्वेदिक दवाएं बनाने का कोई पूर्व अनुभव ही नहीं है।
नेताओं और सांसदों के नकारापन पर फूटा गुस्सा
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने प्रदेश के भाजपा विधायकों और सांसदों को आड़े हाथों लिया। ध्यानी ने तीखे शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के जनप्रनिधियों के नकारापन और मौन के कारण ही राज्य के संसाधन लगातार लूटे जा रहे हैं। एचएमटी (HMT) के बाद अब आईएमपीसीएल जैसे चलते हुए मुनाफे वाले उद्योगों को बंद या निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, जिससे सैकड़ों स्थानीय युवाओं और किसानों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार छिन जाएगा।
इन सभी नेताओं से आगे आने का आह्वान:
प्रभात ध्यानी और रोहित रूहेला ने उत्तराखंड को बचाने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से:
- सल्ट (अल्मोड़ा) विधायक महेश जीना
- रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट
- नैनीताल विधायक सरिता आर्या
- अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा
- नैनीताल सांसद अजय भट्ट
- गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी
- सूबे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, और सभी सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक, छात्र तथा महिला संगठनों से IMPCL मोहान को बचाने के लिए खुलकर सामने आने और इस निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करवाने की मांग की है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के सचिव लालमणि, नगर संयोजक आसिफ समेत बड़ी संख्या में फैक्ट्री के श्रमिक, कर्मचारी और मजदूर उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।