देहरादून। उत्तराखंड में मानसूनी बारिश अब आफत बनकर बरस रही है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। शनिवार को पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी समेत कई जिलों में भीषण लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की घटनाएं सामने आई हैं। मलबे और बोल्डर गिरने के कारण चारधाम यात्रा मार्ग समेत राज्य की 173 से अधिक सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों यात्री और स्थानीय लोग जगह-जगह फंस गए हैं। मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए राज्य के 7 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
पौड़ी और रुद्रप्रयाग में भारी नुकसान, बाल-बाल बची जान
बारिश और भूस्खलन के कारण सबसे ज्यादा नुकसान पौड़ी जिले में देखने को मिला है। यहाँ देर रात गुमखाल-सतपुली मार्ग पर एक चलती पिकअप गाड़ी पर पहाड़ी से अचानक भारी मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर आ गिरे। मलबे के दबाव से वाहन पूरी तरह पिचक गया। गनीमत रही कि ड्राइवर ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और गाड़ी से कूद गया, जिससे उसकी जान बच गई।

वहीं, रुद्रप्रयाग में शनिवार सुबह सिरोबगड़ के पास बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) पर भारी भूस्खलन हुआ। इस प्रमुख मार्ग के बंद होने से केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जाने वाले करीब 800 से 1000 श्रद्धालु बीच रास्ते में ही फंस गए। हालांकि, प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब एक घंटे की भारी मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर हाईवे को यातायात के लिए सुचारू किया।
यमुनोत्री हाईवे का 100 मीटर हिस्सा बहा, 27 घंटे फंसे रहे यात्री
उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी में कुदरत का सबसे खतरनाक रूप देखने को मिला, जहाँ यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 100 मीटर हिस्सा भरभराकर ढह गया और नदी में बह गया। मार्ग पर भारी मलबा आने से लगभग 1000 तीर्थयात्री पिछले 27 घंटों से फंसे रहे। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी यात्रियों को पैदल मार्ग के जरिए सुरक्षित निकाल लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस हाईवे को दोबारा खोलने में कम से कम दो दिन का समय लग सकता है। इसके अलावा गंगोत्री हाईवे भी कई जगहों पर भूस्खलन के कारण प्रभावित है।

नदियां उफान पर, कई जिलों में हादसे
लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तरकाशी के हर्षिल में भागीरथी (गंगा) नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां भी रौद्र रूप धारण कर उफान पर बह रही हैं। रामनगर में कोसी नदी का पानी प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के पास स्थित प्रसाद की दुकानों में घुस गया, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया।
ऋषिकेश में भी बीन नदी के तेज बहाव के बीच एक स्कूटी सवार बहने लगा, जिसे स्थानीय ग्रामीणों ने देवदूत बनकर सुरक्षित बाहर निकाला। हरिद्वार के बैरागी कैंप में गंगा किनारे स्टंट करना दो युवकों को भारी पड़ गया; उनकी थार गाड़ी नदी के तेज बहाव में समा गई। हालांकि, दोनों को बचा लिया गया और पुलिस ने गाड़ी को सीज कर दिया है। नैनीताल में हाईकोर्ट के पास एक विशाल पेड़ गिरने से दो राहगीर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें एसडीआरएफ (SDRF) ने मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

IIT रुड़की में सड़कों पर चलीं नावें, वीडियो वायरल
मैदानी इलाकों का हाल भी बेहाल है। भारी बारिश के चलते आईआईटी (IIT) रुड़की परिसर के अंदर भीषण जलभराव हो गया। हालात इतने खराब हो गए कि हॉस्टल और कैंपस की सड़कों पर छात्रों को नाव चलानी पड़ी। छात्रों द्वारा परिसर में बोटिंग करने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।

मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने शनिवार को देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर, चंपावत, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की आशंका जताई है।

आगामी दिनों का पूर्वानुमान:
- 12 जुलाई: राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज बौछारें पड़ने की संभावना है।
- 13 जुलाई: गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के ज्यादातर जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा और कुछ क्षेत्रों में तेज दौर पड़ सकते हैं।
- 14 जुलाई: प्रदेश के सभी जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ मानसूनी बारिश और बौछारें पड़ने का अनुमान है।

प्रशासन ने चारधाम यात्रियों और पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा कर रहे लोगों से अपील की है कि वे मौसम की सटीक जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और नदी-नालों के किनारे जाने से बचें।