देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के आगामी देहरादून दौरे से ठीक पहले प्रशासन और कांग्रेस के बीच तकरार चरम पर पहुंच गई है। देहरादून पुलिस और जिला प्रशासन ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए परेड ग्राउंड में दी गई अनुमति को आखिरी वक्त पर वापस ले लिया है। अनुमति निरस्त होने के बाद अब इस कार्यक्रम का स्थान बदल दिया गया है। आगामी 17 जुलाई को होने वाला यह बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम अब देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा।
अनुमति रद्द होने पर आधी रात को बैरिकेडिंग तोड़ घुसे कांग्रेसी, जमकर हुआ हंगामा
प्रशासन द्वारा 14 जुलाई की शाम को अचानक परेड ग्राउंड की अनुमति रद्द किए जाने की खबर जैसे ही फैली, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। देर रात कांग्रेस के तमाम बड़े नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में एकत्र हुए और वहां से मार्च करते हुए परेड ग्राउंड की तरफ बढ़े।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही परेड ग्राउंड के चारों तरफ भारी सुरक्षा बल तैनात कर रखा था और मजबूत बैरिकेड्स लगाए थे। हालांकि, आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ दिया और आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस और कांग्रेसी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

ताला तोड़कर मैदान में दाखिल हुए नेता, ट्रकों से शिफ्ट किया सामान
हंगामे के बीच कांग्रेस कार्यकर्ता परेड ग्राउंड के मुख्य गेट पर पहुंच गए। सुरक्षा के लिहाज से गेट पर ताला लटका हुआ था, लेकिन कार्यकर्ताओं ने गेट से छलांग लगाकर अंदर प्रवेश किया और मुख्य द्वार का ताला तोड़ दिया। मैदान के अंदर कांग्रेस नेताओं ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत समेत पार्टी के तमाम दिग्गज मोर्चे पर डटे रहे।
काफी देर तक चले हंगामे और प्रशासन के अड़ियल रुख को देखते हुए आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने टकराव टालने का फैसला किया। नेताओं ने निर्णय लिया कि वे प्रशासन द्वारा सुझाए गए बन्नू स्कूल मैदान में ही राहुल गांधी के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाएंगे। इसके तुरंत बाद आधी रात को ही परेड ग्राउंड से मंच निर्माण और रैली की तैयारियों का सामान लदे ट्रकों को बन्नू स्कूल मैदान के लिए रवाना कर दिया गया।

भाजपा सरकार राहुल गांधी के खौफ से डर गई है: गणेश गोदियाल
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सूबे की धामी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सरकार के इस तानाशाहीपूर्ण निर्णय से कांग्रेस डरने वाली नहीं है। सरकार की नीयत में साफ तौर पर खोट नजर आ रहा है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना होता है, लेकिन इस कदम से भाजपा सरकार पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। वे चाहे जितनी अड़चनें पैदा कर लें, 17 जुलाई को देहरादून में होने वाली राहुल गांधी की रैली ऐतिहासिक होगी।”
गोदियाल ने आगे कहा कि जहां भी देश का नौजवान खड़ा होता है, वहां बदलाव की एक नई लकीर खिंच जाती है। उत्तराखंड की जनता अब भाजपा की नीतियों से त्रस्त आ चुकी है और राज्य को इस गर्त से निकालने के लिए सत्ता परिवर्तन की सख्त जरूरत है।
पैसे जमा कराने के बाद भी परमिशन कैंसिल करना तानाशाही: यशपाल आर्या
वहीं, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने प्रशासन की इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “परेड ग्राउंड पूरी तरह से खाली है। इसके बावजूद हमारा कार्यक्रम रोकने के लिए यह साजिश रची गई। हमने नगर निगम से बकायदा अनुमति मांगी थी, जो हमें मिल भी गई थी। कांग्रेस ने इसके लिए 1 लाख 77 हजार रुपए का पूरा शुल्क भी सरकारी खजाने में जमा कराया था। इसके बाद भी ऐन वक्त पर अनुमति निरस्त करना यह साबित करता है कि भाजपा सरकार राहुल गांधी से बुरी तरह डरी और सहमी हुई है।”
क्या है राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम?
आपको बता दें कि राहुल गांधी ने इन दिनों देश के युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए राष्ट्रव्यापी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत की है। राजस्थान के कोटा से शुरू हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिला स्तर तक जाकर छात्रों से बातचीत करना है। इसके तहत एनएसयूआई (NSUI) और कांग्रेस के अन्य अग्रिम संगठन मिलकर छात्रों के बीच पेपर लीक, भर्ती घोटाले, शिक्षा का बाजारीकरण, महंगी फीस और बदहाल शिक्षा व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
उत्तराखंड में 17 जुलाई को होने वाला यह कार्यक्रम बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक पंडित इसे साल 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।
2027 के महामुकाबले के लिए कांग्रेस की बड़ी बिसात
उत्तराखंड के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले 10 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज है। कांग्रेस को 2017 और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में लगातार दो बार करारी हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के पास महज 19 विधायक हैं। राज्य के राजनीतिक इतिहास में अब तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में से तीन बार बीजेपी और दो बार कांग्रेस ने सरकार बनाई है। लगातार दो बार सत्ता से बाहर रहने के बाद कांग्रेस 2027 के चुनाव में किसी भी कीमत पर वापसी चाहती है, और राहुल गांधी की यह रैली इसी चुनावी शंखनाद का हिस्सा है।