रामनगर (उत्तराखंड)। देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर अब देशव्यापी आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध सामाजिक संगठन ‘नेकी की दीवार’ के संयोजक तारा घिल्डियाल ने केंद्र सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल उनके पद से हटाने की मांग की है। संगठन ने साफ किया है कि यदि सरकार ने समय रहते युवाओं की चिंताओं को दूर नहीं किया, तो पूरे उत्तराखंड सहित देश भर में एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
सोनम वांगचुक के अनशन से गरमाया माहौल
प्रेस को जारी एक तीखे बयान में तारा घिल्डियाल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किया जा रहा अनशन साधारण प्रदर्शन नहीं है। इस अनशन ने देश के करोड़ों युवाओं और सजग नागरिकों का ध्यान वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की खामियों और जनसरोकारों से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मुद्दों की ओर खींचा है।
उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही कथित अनियमितताओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके भविष्य पर गहरा आघात किया है। यदि केंद्र सरकार ने इन चिंताओं पर तुरंत संज्ञान लेकर कोई ठोस व पारदर्शी निर्णय नहीं लिया, तो देश के युवाओं का सरकारी व्यवस्थाओं से भरोसा हमेशा के लिए उठ जाएगा।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े सामाजिक संगठन
’नेकी की दीवार’ के संयोजक ने सीधे तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत होने वाली परीक्षाओं की शुचिता भंग होना एक अक्षम्य अपराध है। तारा घिल्डियाल ने मांग की है कि केंद्र सरकार इस पूरे प्रकरण की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करे।
”सरकार को बिना किसी देरी के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए। इसके साथ ही, परीक्षा प्रणाली में हुई सभी कथित गड़बड़ियों की एक निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि दोषियों को बेनकाब किया जा सके और युवाओं को न्याय मिल सके।” – तारा घिल्डियाल, संयोजक (नेकी की दीवार)
उत्तराखंड से शुरू होगा चरणबद्ध जनआंदोलन
दबाव की राजनीति और सरकार की उदासीनता पर प्रहार करते हुए तारा घिल्डियाल ने स्पष्ट किया कि संगठन इस मुद्दे को सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रखेगा। यदि केंद्र सरकार अनशनकारियों की जायज मांगों की अनदेखी करना जारी रखती है और युवाओं के हित में सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो ‘नेकी की दीवार’ की ‘प्रहरी विंग’ मैदान में उतरेगी।
संगठन की योजना के अनुसार, देवभूमि उत्तराखंड के हर जिले से इस आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसे बाद में एक व्यापक देशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा। घिल्डियाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस संभावित जनआंदोलन और इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर केंद्र सरकार की होगी।
संविधान के दायरे में होगा शांतिपूर्ण विरोध
आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता तारा घिल्डियाल ने यह भी भरोसा दिलाया कि उनका संगठन देश के कानून और संविधान का पूरा सम्मान करता है। ‘नेकी की दीवार’ द्वारा आयोजित किया जाने वाला प्रत्येक प्रदर्शन और आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर संचालित किया जाएगा।
उन्होंने अंत में दोहराया कि देश का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, अपारदर्शी परीक्षा प्रणालियां और जनहित के मुद्दों पर ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन हमेशा युवाओं के अधिकारों और एक साफ-सुथरी पारदर्शी व्यवस्था की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहेगा।