25 साल का इंतज़ार और टूटे वादे: गर्जिया चौकी पर उफना सुंदरखाल के ग्रामीणों का गुस्सा, सांसद अनिल बलूनी के इस्तीफे की मांग
रामनगर (नैनीताल):डिजिटल भारत और 21वीं सदी के तमाम दावों के बीच उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो शासन-प्रशासन के विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे सुंदरखाल, देवीचौड़ा, धनगढ़ी और चौफुला खत्ता के ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। अपने मूल अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे सैकड़ों ग्रामीणों और महिलाओं ने गर्जिया चौकी गेट के सामने एक विशाल धरना प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
ग्रामीणों के इस आक्रोश की सबसे बड़ी वजह क्षेत्र में बढ़ती समस्याएं और जनप्रतिनिधियों की कथित अनदेखी है। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक उनकी चार प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।

क्या हैं ग्रामीणों की 4 मुख्य मांगें?
धरना स्थल पर जमा ग्रामीणों ने एक स्वर में अपनी लंबित समस्याओं को रखा और सरकार को चेताया कि अब झूठे आश्वासनों का दौर खत्म हो चुका है। ग्रामीणों ने प्रमुख रूप से चार मांगें उठाई हैं:
- राजस्व ग्राम का दर्जा: सुंदरखाल, देवीचौड़ा, चौफुला और धनगढ़ी खत्ता को बिना किसी देरी के तत्काल ‘राजस्व ग्राम’ घोषित किया जाए।
- कोसी नदी से सुरक्षा: हर साल तबाही मचाने वाली कोसी नदी के कटाव और बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए ठोस और मजबूत तटबंध (बाँध) का निर्माण किया जाए।
- सोलर फेंसिंग और बाड़बंदी: जंगली जानवरों के आतंक से इंसानों, मवेशियों और लहलहाती फसलों की सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र में प्रभावी सोलर फेंसिंग और मजबूत तार बाड़ लगाई जाए।
- 24 घंटे बिजली आपूर्ति: अंधकार में जीवन जीने को मजबूर क्षेत्र के हर घर और बसावट को निर्बाध बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।
सांसद अनिल बलूनी पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप
धरना सभा के दौरान ग्रामीणों का सबसे ज्यादा गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर फूटा। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर लोकसभा सांसद अनिल बलूनी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अनिल बलूनी ने खुद इन दूरस्थ गांवों का दौरा किया था। उन्होंने ग्रामीणों से वादा किया था कि चुनाव जीतते ही क्षेत्र को राजस्व ग्राम बनाया जाएगा और तमाम बुनियादी सुविधाएं घर-घर पहुंचाई जाएंगी। लेकिन चुनाव बीते 2 साल का वक्त होने को है और ज़मीनी हकीकत में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है।
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो जनप्रतिनिधि वन गांव के लोगों से किए अपने वादों को पूरा नहीं कर सकते, उन्हें पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि अब जनता को गुमराह करने वाली राजनीति स्वीकार नहीं है।
“आज़ादी वोट से नहीं, आंदोलन से मिली थी”
धरना स्थल पर पहुंचे समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार ने उत्तराखंड के 25 सालों के राजनीतिक इतिहास पर गहरा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राज्य गठन को 25 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान 10 साल कांग्रेस और 15 साल भाजपा सत्ता में रही, लेकिन दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने वन ग्रामवासियों के साथ केवल छल किया है।
मुनीष कुमार ने ग्रामीणों का आह्वान करते हुए कहा, “देश को आजादी महज वोट देने से नहीं, बल्कि एक संगठित आंदोलन से मिली थी। आज वन ग्रामों को भी अपने अधिकारों के लिए उसी तरह एकजुट होकर बड़ा आंदोलन खड़ा करना होगा। राजनीतिक दलों का पिछलग्गू बनने के बजाय अपनी ताकत पहचाननी होगी।”
वहीं, स्थानीय निवासी दीपक जोशी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वन गांव के लोग रोज रात को जंगली जानवरों के खौफ और अंधेरे के साए में जीने को मजबूर हैं। मानसून आते ही कोसी नदी का जलस्तर बढ़ता है और उनके घर व खेत तबाह हो जाते हैं। अब राजनीतिक दलों के झूठे वादों पर भरोसा करने का समय बीत चुका है।
संघर्ष से ही मिलेगी जीत: प्रेम राम
ग्राम स्तरीय समिति के अध्यक्ष प्रेम राम ने जनसभा को संबोधित करते हुए ग्रामीणों में नया जोश भरा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब जनता ने अपने हक के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ी है, तब-तब जीत हासिल हुई है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से इस लड़ाई को और अधिक उग्र और मजबूत बनाने की अपील की।
सभा को महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी और ललिता रावत, किसान नेता ललित उप्रेती, महेश जोशी, व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, मनोनीत ग्रामप्रधान अंजलि रावत, कमला देवी, केशव आर्य, पूरन प्रधान, युवा कृष्णा, गणेश, मनमोहन और वीरू ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सूरज कुमार ने किया।
महिलाओं और युवाओं की भारी भागीदारी
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं की भी भारी मौजूदगी देखने को मिली। कड़ाके की धूप और प्रशासनिक बंदिशों की परवाह किए बिना जगमोहन, योगेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, गुड्डू भाई, हरीश, दिनेश, नंदू किशोर, उत्तम चंद, उत्तम राम, खीमराम, मधुर देवी, अंजलि, दीपा, गीता, मोहिनी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण गर्जिया चौकी के सामने डटे रहे।
ग्रामीणों के इस तीखे रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में रामनगर का यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है, जिससे शासन और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ना तय है।