रामनगर।उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्र रामनगर में संरक्षण तकनीक और आउटडोर गियर के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ए एंड एस क्रिएशंस के फ्लैगशिप कंजर्वेशन ब्रांड ‘वनरक्षक’ ने कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के प्रवेश द्वार पर अपने विशेष रिटेल स्टोर का शुभारंभ किया है। भारत में यह ब्रांड का दूसरा स्टोर है, जो वन अधिकारियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं, सफारी ऑपरेटरों, प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए एक वन-स्टॉप सेंटर के रूप में काम करेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, उन्नत तकनीक, आउटडोर उपकरण और स्थानीय आजीविका को एक साझा मंच पर लाना है, जिससे कॉर्बेट आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव विशेषज्ञों को विश्वस्तरीय उपकरण आसानी से मिल सकें।

हाई-टेक कंजर्वेशन तकनीक से लेकर एडवेंचर गियर तक सब कुछ उपलब्ध
रामनगर स्थित इस नए स्टोर में आधुनिक वन प्रबंधन और वन्यजीव सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। यहाँ वन्यजीवों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप, GSM सर्विलांस सिस्टम, AI आधारित मॉनिटरिंग सॉल्यूशंस, ड्रोन, एडवांस्ड कम्युनिकेशन डिवाइसेज, वनाग्नि नियंत्रण उपकरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने वाले विशेष सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही, जंगलों में जाने वाले पर्यटकों, ट्रेकर्स और सफारी प्रेमियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आउटडोर गियर की पूरी श्रृंखला रखी गई है। इसमें दूरबीन (Binoculars), स्पॉटिंग स्कोप, हाई-पावर टॉर्च, विशेष आउटडोर गारमेंट्स, ट्रेकिंग बूट्स, बैकपैक, साइकिल और कैंपिंग का सामान शामिल है।

स्थानीय डीलर नेटवर्क से मिलेगी मजबूती
कॉर्बेट क्षेत्र में ब्रांड की पहुंच को मजबूत करने और स्टोर के सुचारू संचालन में स्थानीय डीलर टीम की मुख्य भूमिका है। दीपांकर खुल्बे और राहुल रौतेला इस क्षेत्र में अधिकृत डीलर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
स्थानीय नेटवर्क का उपयोग कर यह स्टोर सफारी ऑपरेटरों, नेचर गाइड्स, शोधकर्ताओं और पर्यटकों तक गुणवत्तापूर्ण उपकरणों की सीधी पहुँच सुनिश्चित करेगा। इससे क्षेत्र में काम कर रहे फील्ड स्टाफ और एडवेंचर गाइडों को अब दूर-दराज़ के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

‘मेक इन इंडिया’ और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
वनरक्षक मॉडल की एक सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय समुदायों और महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस स्टोर में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs), महिला कारीगरों और जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए गए प्रकृति-प्रेरित टिकाऊ उत्पादों को भी प्रदर्शित और बेचा जाएगा। इससे हस्तशिल्प और स्थानीय सामग्री को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुँचाने का सीधा बाज़ार मिलेगा।
यह पूरी पहल “मेक इन इंडिया” और “लोकल फॉर ग्लोबल” के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप है। ब्रांड भारतीय जंगलों की विशेष भौगोलिक और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी तकनीक विकसित कर रहा है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर ले जाने की योजना है।

संरक्षण और पर्यटन को जोड़ने वाला नया मॉडल
संस्थापक सुमित सभरवाल के अनुसार, रामनगर भारत के वन्यजीव परिदृश्य का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस स्टोर के माध्यम से एक ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास है जहाँ सुरक्षा में लगे कर्मियों से लेकर सफारी का आनंद लेने आए आम पर्यटकों तक, हर किसी को अपनी ज़रूरत का प्रामाणिक सामान मिल सके।
ए एंड एस क्रिएशंस, जिसकी शुरुआत 2004 में अनीता सभरवाल और सुमित सभरवाल द्वारा की गई थी, दो दशकों से भी अधिक समय से वन सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत है। कंपनी का लक्ष्य देश भर के प्रमुख टाइगर रिज़र्व और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास इसी तरह का समर्पित कंजर्वेशन रिटेल इकोसिस्टम विकसित करना है।
पर्यटन और आजीविका के लिए मील का पत्थर
रामनगर में इस विशेष कंजर्वेशन स्टोर की शुरुआत से न केवल जिम्मेदार इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कॉर्बेट और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार व सामुदायिक उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा होंगे। स्थानीय डीलर नेटवर्क की मदद से यह केंद्र पूरे क्षेत्र में वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।