हरिद्वार में कांवड़ मेले के चरम के बीच जल हादसा
हरिद्वार।धर्मनगरी हरिद्वार में इस समय कांवड़ मेले का रोमांच और आस्था अपने चरम पर है। हरकी पैड़ी से लेकर शहर के तमाम प्रमुख गंगा घाटों पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। चारों ओर बम-बम भोले के जयकारों की गूंज है। लेकिन इसी बीच एक दुखद हादसे ने मेले की खुशियों और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता के बादल मंडरा दिए हैं।
शनिवार को हरिद्वार के नमामि गंगे घाट पर पवित्र गंगा में स्नान करते समय दो कांवड़िये गहरे पानी में बह गए और लापता हो गए। घटना के बाद घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मच गई। हालांकि, मौके पर तैनात जल पुलिस की मुस्तैदी से एक कांवड़िए को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दो अन्य युवक तेज बहाव की चपेट में आकर पानी में समा गए।

रेलिंग पार करना पड़ा भारी, एक की बची जान
हादसे का शिकार हुए श्रद्धालुओं की पहचान उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मेठरा निवासी 20 वर्षीय पंकज (पुत्र शुक्रपाल सिंह) और बुलंदशहर जिले के पोड़री निवासी 22 वर्षीय आनंद कश्यप (पुत्र नरेंद्र कश्यप) के रूप में हुई है। वहीं, दिल्ली निवासी गौतम (पुत्र मुंशीलाल) को जल पुलिस के जवानों ने समय रहते सुरक्षित बचा लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, तीनों युवा कांवड़िये नमामि गंगे घाट पर स्नान कर रहे थे। आस्था और उत्साह के अतिरेक में तीनों श्रद्धालु सुरक्षा के लिए लगाई गई रेलिंग को पार कर गंगा के गहरे हिस्से की ओर चले गए। गंगा नदी के पानी की गहराई और उसके तेज बहाव का सटीक अंदाजा न होने के कारण पंकज और आनंद अचानक असंतुलित होकर गहरे पानी में समाने लगे।
साथ में मौजूद गौतम भी पानी के थपेड़ों में फंस गया। घाट पर तैनात जल पुलिस के जवानों ने जैसे ही कांवड़ियों को डूबते देखा, बिना समय गंवाए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गौतम को तो सकुशल बाहर निकाल लिया, लेकिन पंकज और आनंद कश्यप देखते ही देखते तेज बहाव में आंखों से ओझल हो गए।

SDRF, गोताखोर और बोट्स की मदद से सर्च ऑपरेशन तेज
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरंत ही जल पुलिस के साथ-साथ राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और पीएसी आपदा राहत दल की विशेषज्ञ टीमों को मौके पर रवाना किया गया।
गंगा के घाटों और निचले इलाकों में मोटर बोट और अनुभवी गोताखोरों की मदद से लापता दोनों कांवड़ियों की तलाश के लिए व्यापक रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। देर शाम तक पुलिस और बचाव दल गंगा की लहरों को खंगालते रहे, लेकिन समाचार लिखे जाने तक लापता युवकों का कोई सुराग नहीं मिल सका था। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है।
सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी के अनुसार:
“नमामि गंगे घाट पर स्नान के दौरान तीन कांवड़िये गहरे पानी में चले गए थे। जल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को सकुशल बचा लिया है, जबकि दो अन्य कांवड़िये लापता हैं। एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें लगातार गंगा में तलाश कर रही हैं। सभी घाटों पर लगातार लाउडस्पीकर से अपील की जा रही है कि श्रद्धालु सुरक्षित क्षेत्रों में ही स्नान करें।”
प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद बेपरवाही पड़ रही भारी
हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान गंगा और गंगनहर के तेज बहाव में डूबने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में नहाने उतरे चंडीगढ़ के चार नाबालिग कांवड़िये (उम्र 16 से 18 वर्ष) डूब गए थे। उस हादसे में एसडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद चारों के शव बरामद किए थे।
लगातार हो रहे इन हादसों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मेले में उमड़ रही करोड़ों की भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हरिद्वार पुलिस और जल पुलिस की ओर से हर घाट पर स्पष्ट बैरिकेडिंग की गई है और चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।
श्रद्धालुओं से अपील: सुरक्षा मानकों का पालन करें
हरिद्वार पुलिस और प्रशासन ने कांवड़ यात्रा में आ रहे सभी शिवभक्तों से बार-बार अपील की है कि:
- गंगा स्नान करते समय केवल निर्धारित और चिन्हित घाटों का ही उपयोग करें।
- सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई चेन और रेलिंग को कतई पार न करें।
- पानी के तेज बहाव और गहराई को नजरअंदाज न करें।
- किसी भी आपात स्थिति में घाट पर तैनात जल पुलिस या एसडीआरएफ के जवानों की मदद लें।
कांवड़ यात्रा का मर्म आस्था और अनुशासन में निहित है। ऐसे में थोड़ी सी बेपरवाही या जलधारा को कम आंकने की भूल किसी के भी परिवार की खुशियों को मातम में बदल सकती है।