बिहार राज्यसभा चुनाव में बड़ा ‘खेला’: तेजस्वी की AIMIM संग घेराबंदी, कांग्रेस के 3 विधायक ‘नॉट रीचेबल’ ने बढ़ाई धड़कनें।

पटना/नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के उच्च सदन यानी राज्यसभा की खाली सीटों के लिए आज तीन राज्यों—बिहार, हरियाणा और ओडिशा—में मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस चुनावी रण में सबसे अधिक ‘सियासी पारा’ बिहार में चढ़ा हुआ है, जहाँ पल-पल बदलती परिस्थितियों ने महागठबंधन और एनडीए दोनों खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हो रही इस वोटिंग में ‘खेला’ होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जहाँ संख्या बल के खेल में सेंधमारी की आशंका गहरा गई है।

बिहार का सियासी समीकरण: तेजस्वी की रणनीति बनाम अपनों की बेरुखी

​बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित हो रहा है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सुबह-सुबह विधानसभा पहुँचकर अपना मत डाला, लेकिन उनके चेहरे की गंभीरता विपक्ष की अंदरूनी उथल-पुथल को बयां कर रही थी। तेजस्वी के लिए राहत की बात यह रही कि AIMIM के सभी पांच विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए मतदान किया, जिससे महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की उम्मीदों को थोड़ा बल मिला है।

​हालांकि, विपक्षी खेमे के लिए सबसे बड़ा झटका कांग्रेस की ओर से लगा है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के 3 विधायक ‘आउट ऑफ रीच’ यानी नॉट रीचेबल बताए जा रहे हैं। कल रात से ही इन विधायकों का फोन बंद है और वे पार्टी द्वारा तय किए गए होटल पनाश भी नहीं पहुँचे। क्रॉस वोटिंग के इस अघोषित डर ने कांग्रेस और आरजेडी के रणनीतिकारों को पसीने ला दिए हैं। अगर ये तीन विधायक वोटिंग से दूर रहते हैं या पाला बदलते हैं, तो अमरेंद्र धारी सिंह की राह मुश्किल हो सकती है।

एनडीए का दबदबा और दिग्गजों की साख

​दूसरी ओर, सत्ताधारी एनडीए गठबंधन पांचों सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के दिग्गज नेता नितिन नवीन, और आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा जैसे नाम इस चुनावी दंगल में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की उपस्थिति ने इस मुकाबले को और भी हाई-प्रोफाइल बना दिया है। एनडीए की रणनीति स्पष्ट है—विपक्ष में सेंध लगाकर अपनी बढ़त को और मजबूत करना।

ओडिशा और हरियाणा में भी कांटे की टक्कर

​बिहार के बाहर भी स्थिति कमोबेश वैसी ही है। ओडिशा में चार सीटों के लिए हो रहे चुनाव ने उस वक्त नाटकीय मोड़ ले लिया जब कांग्रेस ने अपने एक लापता विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यहाँ तक कि विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोपों में बेंगलुरु से दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।

​वहीं हरियाणा की दो सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध के बीच जंग तेज है, लेकिन भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है। प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 31 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है, जिससे छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका ‘किंगमेकर’ वाली हो गई है।

शाम को होगा दूध का दूध और पानी का पानी

​कुल 37 खाली सीटों में से 26 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं, लेकिन बाकी 11 सीटों (बिहार-5, ओडिशा-4, हरियाणा-2) पर असली परीक्षा आज है। बिहार राज्यसभा चुनाव के ये नतीजे केवल सीटों का गणित नहीं बदलेंगे, बल्कि राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। तेजस्वी यादव की मॉनिटरिंग और कांग्रेस की बेचैनी यह बता रही है कि बिहार की मिट्टी में आज कोई बड़ा ‘खेला’ होने जा रहा है। शाम को मतगणना शुरू होते ही साफ हो जाएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

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