देहरादून:उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार, 13 जून को 158वीं पासिंग आउट परेड (Passing Out Parade) बेहद भव्य और गौरवमयी माहौल में संपन्न हुई। इस बार आईएमए से कुल 515 जेंटलमैन कैडेट्स पास आउट होकर देश-विदेश की सेनाओं में मुख्य अधिकारी के रूप में शामिल हुए हैं। इनमें से भारतीय सेना को 481 नए जांबाज सैन्य अफसर मिले हैं। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बतौर मुख्य अतिथि इस भव्य परेड की समीक्षा की और युवाओं का हौसला बढ़ाया।

94 साल के इतिहास में पहली बार: 9 महिला कैडेट्स ने रचा इतिहास
भारतीय सेना और देश की आधी आबादी के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। आईएमए के 94 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पहले महिला बैच की 9 महिला कैडेट्स यहां से पास आउट होकर सेना में अधिकारी बनी हैं।

बता दें कि जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद महिलाओं के लिए एनडीए के दरवाजे खोले गए थे। आज ये जांबाज बेटियां कड़े प्रशिक्षण के बाद देश की रक्षा पंक्ति का मुख्य हिस्सा बनने जा रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विशेष रूप से इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह पल न केवल भारतीय सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में मील का पत्थर है, बल्कि भारत के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-Led Development) का सबसे बड़ा और प्रेरक उदाहरण है।

सुबह 6:45 बजे शुरू हुआ रोमांच, चैटवुड ग्राउंड में गूंजी कदमताल
शनिवार सुबह करीब पौने सात बजे ऐतिहासिक चैटवुड बिल्डिंग के सामने जैसे ही ‘कंपनी सार्जेंट मेजर’ ने अपनी पोजिशन ली, पूरा परिसर देशभक्ति के जोश से भर उठा। कैडेट्स ने पूरी गरिमा और सटीकता के साथ चैटवुड ग्राउंड में मार्च किया। इसके तुरंत बाद भारतीय सैन्य अकादमी के निशान (ध्वज) को परेड स्थल पर लाया गया, जिसे सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और दर्शकों ने खड़े होकर सलामी दी।

परेड के दौरान देश और दुनिया के शीर्ष सैन्य अधिकारियों का स्वागत किया गया। अतिथियों के क्रम में सबसे पहले मेजर जनरल सचिन मलिक का स्वागत हुआ। इसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह और फिर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा परेड स्थल पर पहुंचे। करीब सवा सात बजे उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे।

शाही बग्गी से पहुंचीं राष्ट्रपति, किया परेड का निरीक्षण
ठीक सुबह 7:30 बजे मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन हुआ। राष्ट्रपति पारंपरिक और विशेष पटियाला कोच (घोड़ा बग्गी) में सवार होकर परेड ग्राउंड में पहुंचीं, जो बेहद आकर्षक और भव्य दृश्य था। राष्ट्रपति ने परेड की समीक्षा की और कैडेट्स के अनुशासन और शानदार कदमताल की जमकर तारीफ की। परेड के शानदार मार्च पास्ट के बाद पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया।

मेधावी जांबाजों को मिला सम्मान: विशाल कुमार को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ऑफिसर कैडेट्स को पदक देकर सम्मानित किया। इस साल के मुख्य विजेता निम्नलिखित रहे:

- स्वॉर्ड ऑफ ऑनर एवं गोल्ड मेडल: विशाल कुमार
- सिल्वर मेडल (ओवरऑल मेरिट): प्रिंस राज
- ब्रॉन्ज मेडल (ओवरऑल मेरिट): तेजस भट्ट
- सिल्वर मेडल (TGC – टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स): हृषभ मिश्रा
- सिल्वर मेडल (TES – टेक्निकल एंट्री स्कीम): करण पांडेय
- सिल्वर मेडल (SCO – स्पेशल कमीशन ऑफिसर्स): बोधराज थापा
- सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट: जैफ सादिद अल्वी (बांग्लादेश)
- चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर: इंफाल कंपनी

मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स भी बने सैन्य अधिकारी
भारतीय सैन्य अकादमी सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी बेहतरीन ट्रेनिंग के लिए जानी जाती है। इस बार भी भारत के 16 मित्र देशों के 34 जेंटलमैन कैडेट्स आईएमए से सफलतापूर्वक पास आउट हुए हैं। इनमें बांग्लादेश के जैफ सादिद अल्वी को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट के पुरस्कार से नवाजा गया। ये सभी विदेशी अधिकारी अब अपने-अपने देशों की सेनाओं को मजबूत करेंगे, जिससे भारत के वैश्विक संबंध और सुदृढ़ होंगे।

राष्ट्रपति का युवा अफसरों को गुरुमंत्र: ‘नेतृत्व का मतलब सिर्फ कमान संभालना नहीं’
परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए सैन्य अधिकारियों को देश सेवा का सच्चा पाठ पढ़ाया। उन्होंने युवाओं को लीडरशिप का असली अर्थ समझाते हुए कहा, “लीडरशिप सिर्फ आदेश देने या कमान संभालने तक सीमित नहीं है। यह आपके उच्च चरित्र, करुणा, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता का प्रतीक है।” उन्होंने विश्वास जताया कि आईएमए से निकले यह युवा अफसर भारतीय सेना की समृद्ध परंपराओं को अक्षुण्ण रखेंगे और हर परिस्थिति में तिरंगे का मान बढ़ाएंगे।