मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना: रामनगर के राशिद और शन्नू ने पेश की ईमानदारी की अनूठी मिसाल
रामनगर (नैनीताल): आज के इस भौतिकवादी युग में, जहाँ इंसानियत अक्सर स्वार्थ की भेंट चढ़ जाती है और लोग चंद रुपयों के लालच में अपनों से मुँह मोड़ लेते हैं, वहीं देवभूमि उत्तराखंड के रामनगर से एक ऐसी खबर सामने आई है जो समाज के सामने एक आईना रखती है। यह कहानी केवल एक खोई हुई वस्तु के मिलने की नहीं है, बल्कि यह कहानी उस अटूट विश्वास की है जो हमें बताता है कि दुनिया आज भी अच्छे लोगों की वजह से टिकी हुई है।
योगा के दौरान खो गई थी ‘एक लाख बीस हजार’ की याद
घटना 28 अप्रैल की सुबह की है। भरतपुरी निवासी अनिता रावत, जो पेशे से गार्डन बर्ड स्कूल की प्रिंसिपल और अंग्रेजी की लेक्चरार हैं, अपने रोजमर्रा के नियम के अनुसार कोसी बैराज स्थित पार्क में योगा करने गई थीं। सुबह की ताजी हवा और एकांत में योगाभ्यास करते समय, कब उनके गले से कीमती सोने की चेन निकलकर घास में गिर गई, उन्हें इसका अहसास तक नहीं हुआ। वह शांत मन से योगा करके घर लौट आईं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके साथ एक बड़ा आर्थिक और भावनात्मक नुकसान हो चुका है।
सुबह करीब 10 बजे जब अनिता की नजर अपने गले पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक लाख बीस हजार रुपये की वह चेन उनके कठिन परिश्रम की कमाई थी। वह बदहवास होकर पार्क की ओर दौड़ीं, जमीन का कोना-कोना छाना, लेकिन वहाँ कुछ नहीं मिला। पूरा दिन प्रार्थनाओं और मायूसी के बीच बीता। उन्हें लगा कि अब वह चेन कभी वापस नहीं मिलेगी, क्योंकि आज के दौर में किसे पड़ी है कि कोई इतनी महंगी वस्तु वापस लौटाए।
ईमानदारी के दो फरिश्ते: राशिद और शन्नू
जिस वक्त अनिता रावत चैन खोने से परेशान थीं, उसी वक्त खताड़ी निवासी दो युवक, राशिद अली और शन्नू कुरैशी, पार्क में जॉगिंग कर रहे थे। किस्मत से वह सोने की चेन इन दोनों युवकों की नजरों के सामने आ गई। उन्होंने इधर-उधर देखा कि शायद कोई इसे ढूंढ रहा हो, लेकिन पार्क खाली था।
अमूमन लोग ऐसी महंगी चीज पाकर उसे अपनी किस्मत मान लेते हैं, लेकिन राशिद और शन्नू के संस्कार अलग थे। उन्होंने तय किया कि वह इस अमानत को इसके असली मालिक तक पहुँचाकर ही दम लेंगे। उनके मन में एक पल के लिए भी लालच नहीं आया। उन्होंने सोचा कि यदि कल कोई पार्क में इसे ढूंढने आता है, तो वे उसे सौंप देंगे, अन्यथा पुलिस की मदद लेंगे।

आंसुओं में बदली मायूसी: जब मिली अपनी अमानत
अगली सुबह, 29 अप्रैल को अनिता रावत एक क्षीण सी उम्मीद लेकर फिर पार्क पहुँचीं। उनके चेहरे पर छाई चिंता की लकीरें साफ बता रही थीं कि वह कुछ बहुत कीमती खो चुकी हैं। राशिद और शन्नू भी वहीं मौजूद थे। जब उन्होंने अनिता को लोगों से पूछताछ करते देखा, तो उन्हें यकीन हो गया कि यही उस चेन की असली मालिक हैं।
युवकों ने आगे बढ़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा, “बहन जी, आप घबराइए मत, आपकी अमानत हमारे पास सुरक्षित है।” यह सुनते ही अनिता की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने सबूत के तौर पर वह वीडियो भी दिखाया जो कल योगा करते समय बना था, जिसमें चेन गिरते हुए देखी जा सकती थी। युवकों ने बिना किसी देरी के वह चेन उन्हें सौंप दी। अनिता ने खुशी और कृतज्ञता में उन्हें इनाम देना चाहा, लेकिन दोनों ने हाथ जोड़कर मना कर दिया।
“ईश्वर देख रहा है”— युवाओं के शब्द बने प्रेरणा
जब ‘पहाड़ टुडे’ की टीम ने इन दोनों युवाओं से बात की, तो उनका जवाब सुनकर किसी का भी मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाए। राशिद और शन्नू ने कहा, “भले ही हमें चेन उठाते हुए किसी इंसान ने नहीं देखा, लेकिन हमारा खुदा तो देख रहा था। दूसरे की चीज पर नीयत खराब करके जो सजा मिलती है, वह इंसान कभी नहीं झेल सकता। हमें उस महिला के चेहरे पर जो मुस्कान देखकर सुकून मिला, वह किसी भी इनाम से बढ़कर है।”

अनिता रावत ने भावुक होते हुए कहा कि वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं, लेकिन आज इन दो युवाओं ने उन्हें जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ा दिया। उन्होंने कहा, “आज जहाँ लोग जाति और धर्म के नाम पर दीवारें खड़ी कर रहे हैं, वहीं राशिद और शन्नू भैया ने इंसानियत का वह आईना दिखाया है जिसकी समाज को सख्त जरूरत है। यह पृथ्वी आज भी इन्हीं जैसों की वजह से रहने लायक है।”
निष्कर्ष:
रामनगर की यह घटना एक संदेश है कि ईमानदारी का कोई धर्म नहीं होता और इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं। राशिद और शन्नू ने न केवल एक महिला की खोई हुई खुशी लौटाई, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति को करारा जवाब दिया है जो सांप्रदायिकता और स्वार्थ की राजनीति में डूबा रहता है।
रिपोर्ट: पहाड़ टुडे डेस्क
