रामनगर: पूछड़ी और कालूसिद्ध को राजस्व ग्राम बनाने की जद्दोजहद तेज, वनाधिकार समिति ने सौंपा संयुक्त दावा


रामनगर। क्षेत्र की दशकों पुरानी मांग को अमली जामा पहनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ग्राम वनाधिकार समिति पूछड़ी (नई बस्ती) व कालूसिद्ध ने ‘वनाधिकार कानून 2006’ के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु अपना संयुक्त दावा उपखंड स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। समिति के प्रतिनिधियों ने सहायक समाज कल्याण अधिकारी (सचिव, उपखंड समिति) को ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ विस्तृत पत्रावली सौंपी।

ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति की अध्यक्ष धना तिवारी ने बताया कि अधिनियम की धारा 3(1)(h) के अनुसार, 13 दिसंबर 2005 से पूर्व वन भूमि पर बसे समुदायों को राजस्व ग्राम का मालिकाना हक प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के निर्देशन में दिसंबर 2024 (पूछड़ी) और मार्च 2025 (कालूसिद्ध) में समितियों का विधिवत गठन किया गया था। विगत 22 मार्च को आयोजित खुली बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से इस दावे का पुरजोर समर्थन किया।

कालूसिद्ध समिति के सचिव सत्या पटवाल ने बताया कि ग्रामीण यहाँ 4-5 पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, जिसके साक्ष्य रामनगर और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के पुराने वर्किंग प्लान्स (कार्य योजनाओं) में दर्ज हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी कानून के तहत हाल ही में रामपुर लेटी व चौपड़ा जैसे वन ग्रामों को भी राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया है, जिससे क्षेत्रवासियों की उम्मीदें जगी हैं।

मनोनीत ग्राम प्रधान अंजलि रावत ने कहा कि 1983 से मतदाता सूची में नाम, 1999 से संचालित प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी सुविधाओं का मौजूद होना यह सिद्ध करता है कि यह एक स्थापित बस्ती है। वनाधिकार कानून 2006 ही वह एकमात्र मार्ग है जिससे वन क्षेत्र में बसे इन लोगों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग के पास 1966 के रिकॉर्ड न होने की स्थिति में ग्रामीणों के ऐतिहासिक साक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द राजस्व ग्राम की घोषणा की जाए।

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