रामनगर (उत्तराखंड):अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस यानी ‘मई दिवस’ के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ उत्तराखंड के रामनगर में भी मजदूरों के हक और हुकूक की आवाज बुलंद की गई। समाजवादी लोक मंच के तत्वावधान में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में न केवल शिकागो के शहीद मजदूरों को याद किया गया, बल्कि वर्तमान में जेलों में बंद श्रमिक नेताओं की रिहाई और मजदूरों के शोषण के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
ध्वजारोहण और शहीदों को श्रद्धांजलि
बुधवार सुबह 8 बजे रामनगर के पैठ पड़ाव स्थित समाजवादी लोक मंच के कार्यालय पर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ठेका मजदूर कल्याण समिति के अध्यक्ष किशन शर्मा ने लाल झंडा फहरा कर ध्वजारोहण किया। इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं और मजदूर नेताओं ने शिकागो के उन वीर शहीद मजदूर नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 8 घंटे कार्य दिवस की मांग के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
श्रमिक नेताओं की गिरफ्तारी पर भारी आक्रोश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किशन शर्मा ने दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में न्यूनतम वेतन वृद्धि और 8 घंटे से अधिक काम करने पर नियमानुसार दोगुने ओवरटाइम की मांग करना भी अपराध बना दिया गया है। दिल्ली-एनसीआर में इन जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों मजदूरों और संगठनों के कार्यकर्ताओं पर संगीन मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
दमन के खिलाफ एकजुटता की अपील
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता कमलेश कुमार ने अपने संबोधन में विशेष रूप से उन नेताओं के नाम लिए जिन्हें हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बिगुल मजदूर दस्ता के आदित्य आनंद, मनीषा चौहान, रुपेश राय, सृष्टि गुप्ता, पत्रकार सत्यम वर्मा और इंकलाबी मजदूर केंद्र के नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।
एडवोकेट कमलेश ने चेतावनी देते हुए कहा, “पूरी दुनिया के मजदूरों ने दशकों के संघर्ष और महान कुर्बानियां देकर ‘8 घंटे का कार्य दिवस’ हासिल किया था। लेकिन आज साम्राज्यवादी कंपनियों और कॉर्पोरेट घरानों के इशारे पर सरकारें मजदूरों से यह अधिकार छीन रही हैं। 9 से 12 घंटे का कार्य दिवस कानूनन थोपा जा रहा है, जो न केवल अमानवीय है बल्कि देश के स्थापित कानूनों का खुला उल्लंघन है।”
सिस्टम बदलने की जरूरत: मुनीष कुमार
समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने आंकड़ों के जरिए मजदूरों की वास्तविक स्थिति को सामने रखा। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में न्यूनतम वेतन की मांग भले ही 10 हजार से बढ़कर 14 हजार तक पहुंच गई हो, लेकिन महंगाई के अनुपात में मजदूरों के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है।
मुनीष कुमार ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “पूंजीपति वर्ग मजदूरों को केवल उतनी ही मजदूरी देता है जिससे वे अगले दिन काम पर आने के लिए जीवित रह सकें। केवल चेहरे या सरकारें बदलने से मजदूरों का भला नहीं होगा। अगर हम वाकई मजदूरों का जीवन स्तर सुधारना चाहते हैं, तो हमें इस शोषणकारी ‘सिस्टम’ को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।”
इन नेताओं ने भी रखे विचार
सभा को इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मौ. आसिफ ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि एकजुटता ही मजदूरों का सबसे बड़ा हथियार है। कार्यक्रम का कुशल संचालन महिला एकता मंच की कौशल्या द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रमिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने मजदूर एकता के नारे लगाकर अपने संकल्प को दोहराया।
