अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील: पंतनगर में सबसे ज्यादा 113.8 मिमी बारिश दर्ज, चारधाम यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए प्रशासन की गाइडलाइन जारी।
देहरादून: उत्तराखंड में मॉनसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ों पर आफत की बारिश का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। जगह-जगह हो रहे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण राज्य की कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में इस वक्त राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों समेत करीब 71 सड़कें पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है।
मौसम विभाग (IMD) और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड में मॉनसून अब पूरी तरह सक्रिय मोड में आ चुका है। इसके साथ ही बारिश जनित आपदाओं का खतरा भी चरम पर पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटे राज्य के लिए अत्यंत संवेदनशील रहने वाले हैं।
9 जुलाई को इन 5 जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9 जुलाई को राज्य के पांच प्रमुख जिलों— देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चम्पावत में कहीं-कहीं अत्यंत भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और अत्यंत तीव्र बारिश के दौर (Spells) पड़ने की संभावना है।
इसके अलावा टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में भी भारी वर्षा का अनुमान लगाया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 10 से 12 जुलाई तक भी पर्वतीय जिलों में भारी बारिश का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है, जबकि 14 जुलाई तक पूरे प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश लगातार जारी रहेगी।
24 घंटे में कहां कितनी हुई बारिश? पंतनगर में सबसे ज्यादा वर्षा
पिछले 24 घंटों के भीतर उत्तराखंड में औसतन 15.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस दौरान सबसे ज्यादा मार ऊधमसिंह नगर के पंतनगर पर पड़ी है, जहां रिकॉर्ड 113.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
राज्य के प्रमुख वर्षा वाले क्षेत्रों का आंकड़ा इस प्रकार है:
- पंतनगर: 113.8 मिमी
- भगवानपुर: 68.0 मिमी
- ऋषिकेश: 54.0 मिमी
- मुक्तेश्वर: 44.8 मिमी
- धनोल्टी: 44.0 मिमी
- नैनीताल: 43.0 मिमी
- चमोली: 36.4 मिमी
- टिहरी: 33.0 मिमी
- चम्पावत: 32.0 मिमी
आपदा की मार: 20 लोगों ने गंवाई जान, चमोली-पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित
इस मानसून सीजन में बारिश और भूस्खलन के कारण अब तक कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से अब तक विभिन्न आपदा संबंधी घटनाओं में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त 9 बड़े पशुओं और 670 छोटे पशुओं की भी हानि हुई है। आपदा के कारण कई जिलों में मकान आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और टिहरी सबसे संवेदनशील बने हुए हैं।
सड़कों की बात करें तो चमोली जिला इस वक्त सबसे बड़ी मुसीबत झेल रहा है। बंद पड़ी 71 सड़कों में से 2 स्टेट हाईवे, 1 बीआरओ (BRO) रोड, 16 पीडब्ल्यूडी (PWD) सड़कें और 52 ग्रामीण/पीएमजीएसवाई (PMGSY) सड़कें शामिल हैं।
जिलेवार बंद सड़कों की स्थिति:
- चमोली: 19 सड़कें बंद
- पिथौरागढ़: 15 सड़कें बंद
- बागेश्वर: 11 सड़कें बंद
- नैनीताल व टिहरी: 6-6 सड़कें बंद
- देहरादून: 5 सड़कें बंद
- रुद्रप्रयाग व पौड़ी: 3-3 सड़कें बंद
खराब मौसम के बावजूद चारधाम यात्रा पर 43 लाख से अधिक श्रद्धालु
भले ही पहाड़ों पर मौसम का मिजाज तल्ख है, लेकिन आस्था के आगे चुनौतियां बौनी साबित हो रही हैं। इस मानसून के बीच भी चारधाम यात्रा लगातार जारी है और अब तक 43 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं।
- बदरीनाथ धाम: 14,58,572 श्रद्धालु
- केदारनाथ धाम: 13,93,964 श्रद्धालु
- गंगोत्री धाम: 6,85,111 श्रद्धालु
- यमुनोत्री धाम: 6,37,331 श्रद्धालु
- हेमकुंड साहिब: 1,82,461 श्रद्धालु
मौसम विभाग की इस गंभीर चेतावनी के बाद शासन-प्रशासन ने चारधाम यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है।
नदियों का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट मोड पर
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, लगातार हो रही बारिश से गंगा और अलकनंदा जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सभी नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
प्रमुख नदियों का वर्तमान जलस्तर:
- हरिद्वार में गंगा: 291.15 मीटर
- श्रीनगर में अलकनंदा: 532.75 मीटर
- रुद्रप्रयाग में अलकनंदा: 623.20 मीटर
- कर्णप्रयाग में पिंडर: 768.20 मीटर
- धारचूला में काली नदी: 888.40 मीटर
मुख्यमंत्री और प्रशासन की आम जनता से अपील
मौसम विभाग के भारी बारिश के रेड और ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF), जिला पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों को ‘हाई अलर्ट’ (High Alert) पर रखा गया है। संवेदनशील और भूस्खलन संभावित इलाकों में भारी मशीनें (जेसीबी) तैनात की गई हैं ताकि बंद सड़कों को तुरंत खोला जा सके।
प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और विशेष रूप से चारधाम यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा करने से बचें। नदियों, नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों के पास न जाएं। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम विभाग की ताजा अपडेट और सड़कों की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें। पहाड़ों पर मानसून अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए आने वाले दिनों में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।