देहरादून:उत्तराखंड में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने उत्तराखंड के 7 जिलों के लिए ‘Extremely Heavy Rain Alert’ यानी अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने अगले 24 घंटे को राज्य के लिए बेहद नाजुक बताते हुए हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इस बीच, कुमाऊं के काशीपुर में रिकॉर्डतोड़ 206 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो इस सीजन में अब तक की सर्वाधिक है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश की लाइफलाइन कही जाने वाली 195 सड़कें अभी भी पूरी तरह से ठप हैं।
NDMA का सचेत एप पर रेड अलर्ट, इन 7 जिलों पर मंडराया संकट
एनडीएमए (NDMA) के ‘सचेत’ ऐप द्वारा जारी चेतावनी के मुताबिक, अगले 24 घंटों के भीतर उत्तराखंड के सात प्रमुख जिलों में आफत की बारिश हो सकती है। इन संवेदनशील जिलों में देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत शामिल हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन के अनुसार, इन क्षेत्रों में अचानक फ्लैश फ्लड (जलभराव), भूस्खलन, पहाड़ियों से मलबा गिरने और छोटे नदी-नालों के उफान पर आने की तीव्र आशंका है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की रिपोर्ट बताती है कि मानसून की सक्रियता इस समय अपने चरम पर है।
काशीपुर और जसपुर में रिकॉर्डतोड़ बारिश, नदियां उफान पर
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उधम सिंह नगर जिले में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली है। काशीपुर में जहां 206 मिमी बारिश हुई, वहीं जसपुर में 190 मिमी, लक्सर में 180 मिमी, कोटद्वार और रुड़की में 160-160 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा हरिद्वार में 122 मिमी, धौलछीना में 124.4 मिमी, नैनीताल में 119 मिमी, बेतालघाट में 118.5 मिमी और नई टिहरी में 115 मिमी पानी बरसा है। लगातार हो रही इस बारिश से गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सरयू, गोमती और काली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हरिद्वार में गंगा नदी खतरे के निशान (294 मीटर) से नीचे 291 मीटर पर बनी हुई है।
195 सड़कें बंद, लोक निर्माण विभाग को ₹58 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
लोक निर्माण विभाग (PWD) के रोड क्लोजर डैशबोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस मानसून सीजन में 9 जुलाई 2026 तक कुल 885 सड़कें प्रभावित हुई हैं। इनमें से 680 सड़कों को कड़ी मशक्कत के बाद खोल दिया गया है, लेकिन 195 सड़कें अब भी बंद हैं। बंद सड़कों में सबसे बुरा हाल पौड़ी जिले का है, जहां अकेले 143 सड़कें बंद हैं। पीएमजीएसवाई (PMGSY) की 326 सड़कें इस आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 70 सड़कें ऐसी हैं जिनकी निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी उन्हें बहाल नहीं किया जा सका है। लोक निर्माण विभाग का अनुमान है कि बंद सड़कों को दोबारा पूरी तरह सुचारू करने के लिए करीब ₹5805.33 लाख (58.05 करोड़ रुपए) के बजट की आवश्यकता होगी।
कई जिलों से आपदा की खबरें: हरिद्वार में रेस्क्यू, उत्तरकाशी में नदी का कटाव
बारिश के चलते राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हादसों की खबरें आ रही हैं:
- हरिद्वार: मायापुर क्षेत्र के कोल्हाकर्मी श्मशान घाट के पीछे पहाड़ी से अचानक भारी पत्थर गिरने लगे। मलबे में 4 लोगों के फंसे होने की आशंका थी, लेकिन एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
- रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि के भुनका गांव में भारी बारिश के कारण एक गौशाला ढह गई, जिसमें दबकर दो मवेशियों की मौत हो गई। जिले की 9 ग्रामीण सड़कें अभी भी बंद हैं।
- उत्तरकाशी: हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी तेजी से जमीन का कटाव कर रही है, जिससे किनारे बसे गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने आनन-फानन में 105 मीटर के दायरे में बोल्डर डालकर सुरक्षा कार्य शुरू किया है। खतरे को देखते हुए तीन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का नोटिस दिया गया है। वहीं, यमुनोत्री हाईवे स्यानाचट्टी के पास लगातार लैंडस्लाइड के कारण रुक-रुक कर बाधित हो रहा है।
- टिहरी: ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 34) नगुण के पास पिछले 12 घंटों से पूरी तरह बंद है, जिससे यात्रियों की लंबी कतारें लग गई हैं।
- चमोली व नैनीताल: चमोली में बिजली की लाइनें टूटने से करीब 20 गांवों में अंधेरा छाया हुआ है, जबकि नैनीताल में 5 राज्य मार्ग और 18 ग्रामीण सड़कें बंद हैं।
चारधाम यात्रा पर असर, सरकार ने जारी की सख्त एडवाइजरी
खराब मौसम और भूस्खलन के बीच भी आस्था का सैलाब थमा नहीं है। चारधाम यात्रा में अब तक कुल श्रद्धालुओं का आंकड़ा 43.68 लाख के पार पहुंच चुका है। बदरीनाथ धाम में 14.62 लाख, केदारनाथ में 13.95 लाख, गंगोत्री में 6.38 लाख और यमुनोत्री में 6.86 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब में भी 1.85 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे हैं। राहत की बात यह है कि ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे और केदारनाथ हाईवे फिलहाल सुचारू रूप से खुले हुए हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने 1 अप्रैल से अब तक आपदा की घटनाओं में 20 लोगों की मौत और 23 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें, अनावश्यक यात्रा टालें और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन के आधार पर ही अपनी यात्रा का प्लान बनाएं।