रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इंसानी लापरवाही का खामियाजा एक बार फिर एक बेजुबान जानवर को भुगतना पड़ा है। अल्मोड़ा जिले के रानीखेत स्थित खनियां गाँव से एक ऐसा ही दिल देहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ प्लास्टिक कचरे की वजह से एक जंगली सियार (गीदड़) की जान दांव पर लग गई। हालांकि, समय रहते स्थानीय युवाओं की मुस्तैदी और सूझबूझ के कारण इस सियार को एक सुरक्षित जीवनदान मिल गया। सियार को रेस्क्यू किए जाने की यह घटना अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
दौड़ लगा रहे युवाओं की पड़ी नजर
मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना शाम के वक्त की है जब रानीखेत के खनियां गाँव के पास ‘ललित अकादमी’ के युवा रोज की तरह अपनी दौड़ (रनिंग प्रैक्टिस) लगा रहे थे। इसी दौरान अकादमी के संचालक ललित बिष्ट और अन्य युवाओं की नजर सड़क के किनारे तड़प रहे एक जंगली जीव पर पड़ी। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह एक सियार था, जिसका मुंह एक प्लास्टिक के डिब्बे के अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था।
डिब्बे में मुंह फंसने से तड़प रहा था सियार
संचालक ललित बिष्ट ने बताया कि डिब्बा काफी मजबूत और प्लास्टिक का था, जिसके कारण सियार चाहकर भी उसे अपने मुंह से निकाल नहीं पा रहा था। मुंह पूरी तरह बंद होने के कारण सियार बेहद परेशान था, सांस लेने में तकलीफ की वजह से वह जोर-जोरे से चिल्ला रहा था और घबराहट में इधर-उधर गिर-पड़ रहा था। सियार की हालत देखकर साफ था कि वह लंबे समय से इस मुसीबत में फंसा हुआ था। अगर समय रहते उस पर नजर नहीं पड़ती, तो दम घुटने या भूख-प्यास से उसकी जान भी जा सकती थी।
युवाओं ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू
सियार एक मांसाहारी और आक्रामक जंगली जीव माना जाता है, जो डरने या फंसने पर हमला भी कर सकता है। लेकिन युवाओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बेहद सूझबूझ का परिचय दिया। युवाओं की टीम ने मिलकर सबसे पहले तड़प रहे सियार को चारों तरफ से घेरकर सुरक्षित तरीके से पकड़ा। इसके बाद बड़ी सावधानी से उसके मुंह में फंसे प्लास्टिक के डिब्बे को धीरे-धीरे खींचकर बाहर निकाला। डिब्बा हटते ही सियार ने राहत की सांस ली और बिना देर किए तुरंत घने जंगल की तरफ दौड़ लगा दी।
लोग कर रहे हैं युवाओं की तारीफ
इस पूरी घटना की जानकारी जैसे ही आस-पास के लोगों को मिली, हर कोई युवाओं की इस बहादुरी और जीव दया की भावना की सराहना करने लगा। सोशल मीडिया पर भी इस नेक काम की तस्वीरें और बातें खूब शेयर की जा रही हैं। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ लोग ऐसी घटनाओं को देखकर मुंह फेर लेते हैं, वहीं इन युवाओं ने एक बेजुबान की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की है।
इंसान की गलती, बेजुबानों को सजा: बढ़ती प्लास्टिक की समस्या
इस घटना के बाद इलाके में इस बात की गंभीर चर्चा है कि किस तरह इंसानों की लापरवाही वन्यजीवों के लिए काल बन रही है। स्थानीय निवासियों ने चिंता जताते हुए कहा कि लोग अक्सर पर्यटन स्थलों, सड़कों के किनारे या जंगलों के पास प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलें और खाने-पीने का कचरा फेंक देते हैं। भोजन की तलाश में भटकते हुए ये बेजुबान जानवर इन डिब्बों में अपना मुंह डाल देते हैं और फिर जानलेवा हादसों का शिकार हो जाते हैं। यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि प्लास्टिक प्रदूषण हमारे पर्यावरण और वन्यजीवों को कितना नुकसान पहुँचा रहा है।
सियार (Jackal): प्रकृति का एक सतर्क जीव
विशेषज्ञों के अनुसार, सियार (Jackal), जिसे आम बोलचाल की भाषा में गीदड़ या शृंगाल भी कहा जाता है, कैनिडे (कुत्ते) के परिवार का एक मध्यम आकार का जंगली मांसाहारी और सर्वाहारी जीव है। यह अपनी चालाकी, रात के समय हवा में मुंह उठाकर अजीब आवाजें निकालने (हुंकार भरने) और भोजन की तलाश में हमेशा बेहद सतर्क रहने के लिए जाना जाता है। पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को संतुलित रखने में इन जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन लगातार बढ़ रहे मानवीय हस्तक्षेप और कचरे के कारण आज इनका अस्तित्व भी खतरे में पड़ रहा है।