देवप्रयाग हादसा: 400 मीटर गहरी खाई में मिली दिल्ली की युवती, SDRF के जांबाजों ने देवदूत बनकर बचाई जान


ऋषिकेश-देवप्रयाग: उत्तराखंड की पहाड़ियों में कब, कहाँ और कैसे मौत झपट्टा मार दे, कोई नहीं जानता। लेकिन कभी-कभी इंसान की किस्मत और बचाव दलों की फुर्ती मौत के मुंह से भी जिंदगी खींच लाती है। ऐसा ही कुछ मंगलवार सुबह देवप्रयाग के पास स्थित ‘तोताघाटी’ में देखने को मिला, जहाँ दिल्ली के दो पर्यटकों के लिए SDRF की टीम साक्षात देवदूत बनकर आई।

खौफनाक मंजर: 400 मीटर नीचे मलबे में तब्दील हुई कार

सुबह का वक्त था, जब ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर दौड़ रही एक टाटा टिगोर कार (DL 11 CD 3154) अचानक अनियंत्रित होकर तोताघाटी के पास गहरी खाई में समा गई। चश्मदीदों की मानें तो कार देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गई। सूचना मिलते ही 108 सेवा, स्थानीय पुलिस और व्यासी स्थित SDRF पोस्ट से इंस्पेक्टर कविंद्र सजवाण के नेतृत्व में टीम तत्काल रवाना हुई। मौके पर पहुंचकर जब टीम ने नीचे झांका, तो खाई की गहराई देखकर हर कोई दंग रह गया। करीब 400 मीटर नीचे कार के परखच्चे उड़े हुए थे।

सांस रोक देने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन

वक्त कम था और चुनौतियां बड़ी। SDRF के जवानों ने बिना समय गंवाए रस्सियों के सहारे ऊबड़-खाबड़ और सीधी ढलान वाली खाई में उतरना शुरू किया। नीचे पहुंचने पर सबसे पहले 22 वर्षीय अनीश (निवासी दिल्ली) घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत स्ट्रेचर के जरिए ऊपर भेजा गया। लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी। अनीश ने बताया कि कार में उसके साथ 20 साल की युवती सोहनी भी थी।

​खाई में चारों ओर झाड़ियां और बड़े पत्थर थे, जिससे युवती का पता लगाना मुश्किल हो रहा था। टीम ने हार नहीं मानी और मलबे के आसपास गहन सर्च ऑपरेशन जारी रखा। काफी खोजबीन के बाद सोहनी भी घायल हालत में झाड़ियों के बीच मिल गई। उसे सुरक्षित बाहर निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

मौत को मात देकर लौटी सोहनी

इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद आमतौर पर बचने की उम्मीद कम होती है, लेकिन सोहनी की हिम्मत और रेस्क्यू टीम की मेहनत रंग लाई। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद तत्काल एम्बुलेंस से एम्स ऋषिकेश भेजा गया। डॉक्टरों की टीम घायलों की निगरानी कर रही है। दिल्ली से आए इन पर्यटकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है।

तोताघाटी: जहाँ हर मोड़ पर है खतरा

यह हादसा फिर से याद दिलाता है कि उत्तराखंड के पहाड़ी मार्ग, खासकर तोताघाटी जैसे संवेदनशील जोन, जरा सी चूक को माफ नहीं करते। अक्सर बाहरी राज्यों से आने वाले चालक पहाड़ी मोड़ों और ढलान का अंदाजा नहीं लगा पाते, जो बड़े हादसों का कारण बनता है।

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