उत्तरकाशी: कहते हैं कि अगर इरादों में फौलाद और दिल में जुनून हो, तो गरीबी की बेड़ियाँ भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। जनपद के वीरपुर डुंडा के एक साधारण से आँगन से निकले बंशीलाल सिंह राणा ने आज अपनी मेहनत के दम पर वो मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा उत्तराखंड गर्व कर रहा है।

भावुक क्षण: माटी को चूमा और माता-पिता को किया याद
IAS कैडर में पदोन्नति के बाद जब बंशीलाल पहली बार अपने पैतृक गांव पहुँचे, तो ढोल-दमाऊ की थाप और फूलों की बारिश के साथ उनका ‘शाही स्वागत’ हुआ। गांव की माटी पर कदम रखते ही अधिकारी भावुक हो उठे। उन्होंने सबसे पहले अपने दिवंगत माता-पिता, स्वर्गीय गोवर्धन और स्वर्गीय बैसाखी देवी की स्मृतियों को नमन किया। ग्रामीणों की आँखें भी नम थीं, सबका एक ही स्वर था— “आज माता-पिता जीवित होते तो बेटे की इस कामयाबी पर स्वर्ग भी मुस्कुरा उठता।”

साधारण परिवार, असाधारण हौसला
दो भाई और तीन बहनों के इस भरे-पूरे परिवार ने अभावों में भी एक-दूसरे का संबल कभी नहीं छोड़ा। राजकीय इंटर कॉलेज, डुंडा से शिक्षा की नींव रखने वाले बंशीलाल बचपन से ही मेधावी थे। सीमित संसाधनों के बीच पला-बढ़ा यह युवा आज देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के कैडर तक पहुँच गया है।

जश्न में डूबा गांव: युवाओं के लिए बने प्रेरणापुंज
पूरे गांव में दिवाली जैसा माहौल था। महिलाओं ने मंगल गान गाए और युवाओं ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर जमकर नृत्य किया। बंशीलाल ने युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए कहा— “अपनी परिस्थितियों को कभी कमजोरी मत बनने दो, उन्हें अपनी ताकत बनाओ और आसमान छू लो।”

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी वरिष्ठ नागरिक सेवक राम भंडारी, पूर्व प्रधान नारायण सिंह नेगी, सरिता रावत, राजेश नेगी, हेमराज निजन, ओमप्रकाश भट्ट, गौरव नौटियाल, बृजमोहन नौटियाल, भारत सिंह बिष्ट समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे।
रिपोर्ट:कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।
