उत्तराखंड में कुदरत का कहर: कुमाऊं में आंधी-तूफान से कई मकानों की छतें उड़ी, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट


देहरादून। पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और तपिश के बाद उत्तराखंड के मौसम ने करवट बदल ली है। कुमाऊं मंडल में मंगलवार को आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया और कई परिवारों के सिर से छत छिन गई है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आज भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

कुमाऊं में आंधी-तूफान ने मचाया तांडव

मंगलवार दोपहर बाद अचानक आए आंधी-तूफान ने कुमाऊं के कई जिलों में व्यापक असर डाला। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले की विभिन्न तहसीलों में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। बेरीनाग तहसील में तेज हवाओं के दबाव के कारण 4 मकानों की छतें उड़ गईं। वहीं, डीडीहाट तहसील में कुदरत का सबसे रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ 8 मकानों की छतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। सीमांत क्षेत्र धारचूला में भी 3 मकानों की छतें उड़ने और एक गौशाला के ढहने की खबर है।

हादसों में घायल और विस्थापन की स्थिति

देवलथल क्षेत्र में आंधी के दौरान एक विशाल पेड़ मकान के ऊपर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से एक व्यक्ति घायल हो गया। घायल को आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। जिन परिवारों के आशियाने इस तूफान की भेंट चढ़ गए हैं, उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोग फिलहाल अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के यहाँ शरण लेने को मजबूर हैं। प्रशासन ने तहसील स्तर पर टीमों को नुकसान के आकलन के लिए भेजा है और प्रभावितों को जल्द राहत सहायता देने का भरोसा दिया है।

गर्मी से राहत बनी बड़ी आफत

बीते एक हफ्ते से पूरा उत्तराखंड भीषण गर्मी की चपेट में था। मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ भी तप रहे थे, जिससे आम जनता त्रस्त थी। मंगलवार को जब बादलों ने आसमान घेरा तो लोगों को लगा कि गर्मी से निजात मिलेगी, लेकिन यह राहत मुसीबत बनकर आई। आंधी की गति इतनी तीव्र थी कि सड़कों पर लगे बिजली के खंभे और पुराने पेड़ ताश के पत्तों की तरह ढह गए। कई ग्रामीण इलाकों में बिजली की लाइनें टूटने से अंधेरा छा गया है, जिसे बहाल करने के लिए ऊर्जा निगम की टीमें जुटी हुई हैं।

इतिहास और प्राकृतिक आपदा की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है। यहाँ मौसम का मिजाज पल भर में बदल जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान का अचानक गिरना और तीव्र हवाओं का चलना अक्सर बड़े नुकसान का कारण बनता है। इतिहास में भी रैणी जैसी आपदाएं इस बात का प्रमाण हैं कि हिमालयी राज्यों में प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना कितना जरूरी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पेड़ के नीचे या कच्चे मकानों के पास शरण न लें और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।

आज के लिए मौसम विभाग की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट)

मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार, 29 अप्रैल के लिए भी प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पूर्वानुमान के मुताबिक, नैनीताल, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ तीव्र बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी जिलों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।

मैदानी जिलों में 50 किमी की रफ्तार से चलेगी हवा

पहाड़ों में बारिश के अलर्ट के बीच मैदानी जिले हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी मौसम विभाग ने सावधानी बरतने को कहा है। इन जिलों में भले ही भारी बारिश की संभावना कम हो, लेकिन 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं और धूल भरी आंधी भारी नुकसान पहुँचा सकती है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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