रामनगर (नैनीताल): अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस यानी ‘मई दिवस’ के अवसर पर रामनगर में मजदूर संगठनों और जागरूक नागरिकों का जोश चरम पर रहा। मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल शिकागो के अमर शहीदों को याद किया गया, बल्कि वर्तमान समय में मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।

शहीद पार्क से भगत सिंह चौक तक गूँजे नारे
कार्यक्रम का आगाज स्थानीय शहीद पार्क में एक श्रद्धांजलि सभा के साथ हुआ। यहाँ उपस्थित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं और मजदूर नेताओं ने शिकागो के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा के उपरांत शहर की मुख्य सड़कों पर एक विशाल जुलूस निकाला गया। गूँजते हुए नारों और क्रांतिकारी गीतों के साथ यह जुलूस नगर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ भगत सिंह चौक पर पहुँचा, जहाँ एक जनसभा के साथ इसका समापन हुआ।
मई दिवस की विरासत और मौजूदा चुनौतियां
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मई दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव और सभा के संचालक रोहित रुहेला ने कहा कि 1886 में शिकागो के मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर जो शहादत दी थी, उसकी विरासत आज भी हमें शोषण के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देती है। वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि देश में मजदूरों का दमन बढ़ रहा है और उनके कानूनी अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
श्रमिक नेताओं की रिहाई की मांग
इस आयोजन का एक मुख्य केंद्र बिंदु मानेसर और नोएडा के मजदूर आंदोलनों से जुड़े साथियों का मुद्दा रहा। सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की गई कि मानेसर और नोएडा में फर्जी मुकदमों के आधार पर जेल में बंद किए गए मजदूरों और उनके नेताओं को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए। वक्ताओं ने इसे सरकार और प्रशासन की तानाशाही करार दिया।
विभिन्न संगठनों की एकजुटता
रामनगर के इस आयोजन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। सभा को संबोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे:
- नवेन्दु मठपाल (शिक्षक नेता)
- नंदराम (प्राथमिक शिक्षक संघ)
- चंद्र बल्लभ छिम्वाल (वन निगम कर्मचारी संघ)
- भुवन चंद्र (इंकलाबी मज़दूर केंद्र)
- शारदा देवी (प्रगतिशील भोजन माता संगठन)
- गिरीश चंद्र (समाजवादी लोक मंच)
- सुमित (आइसा – AISA)
- प्रीति (परिवर्तनकामी छात्र संगठन)
- तुलसी छिंवाल (प्रगतिशील महिला एकता केंद्र)
वक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि जब तक मजदूरों को उनका हक नहीं मिल जाता और दमनकारी नीतियां वापस नहीं ली जातीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
रामनगर में आयोजित यह मई दिवस कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह क्षेत्र के मजदूरों, शिक्षकों और छात्रों की एकजुटता का प्रतीक बना। भगत सिंह चौक पर हुए समापन ने यह संदेश दिया कि हक की लड़ाई सड़कों से ही जीती जाएगी।
