उत्तराखंड: मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई के खिलाफ भड़के संगठन, रामनगर में जोरदार प्रदर्शन
रामनगर (नैनीताल):उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र (Sidcul Industrial Area) में मजदूरों के अधिकारों की आवाज उठाने वाले श्रमिक नेताओं पर जिला प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट के तहत की जा रही कार्रवाई का विरोध अब पूरे प्रदेश में तेज होने लगा है। इसी कड़ी में रामनगर के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र संगठनों ने एकजुट होकर उप जिलाधिकारी (SDM) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने हरिद्वार प्रशासन और फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस दमनकारी नीति को तत्काल रोकने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया, जिसमें इंकलाबी मज़दूर केंद्र के उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी और श्रमिक नेता जय प्रकाश को भेजे गए गुंडा एक्ट के नोटिस की कड़ी भर्त्सना की गई।
क्या है पूरा मामला? क्यों भड़का है आक्रोश?
दरअसल, हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में लंबे समय से मजदूर सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम के कानूनन डबल भुगतान की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। इस आंदोलन को इंकलाबी मज़दूर केंद्र के उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी और जय प्रकाश का नेतृत्व और समर्थन मिल रहा था।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि मजदूरों के जायज हक की आवाज को दबाने के लिए हरिद्वार प्रशासन ने पूंजीपतियों और सिडकुल एसोसिएशन के दबाव में आकर दोनों मजदूर नेताओं पर न सिर्फ फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं, बल्कि अब उन्हें ‘गुंडा एक्ट’ (Gunda Act) का नोटिस थमाकर जिला बदर करने की चेतावनी भी दे दी है। संगठनों ने इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सरेआम हत्या करार दिया है।
‘पूंजीपतियों पर कार्रवाई के बजाय मजदूरों का दमन कर रही सरकार’
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में संगठनों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, सिडकुल की कंपनियों में स्थायी प्रकृति के कामों पर भी ठेके के तहत मजदूरों को नियोजित किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी श्रम अभ्यास (Unfair Labour Practice) की श्रेणी में आता है।
ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु:
“सिडकुल के उद्योगपति और ठेकेदार बड़े पैमाने पर श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। मजदूरों को न तो न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है और न ही ओवरटाइम का नियमानुसार डबल भुगतान मिल रहा है। प्रशासन को असल में इन जालसाज फैक्ट्री मालिकों पर मुकदमा दर्ज करना चाहिए था, लेकिन सरकार और पुलिस उलटे पीड़ित मजदूरों और उनके नेताओं की आवाज को ही कुचलने में लगी है।”
समझौते के बावजूद पुलिसिया उत्पीड़न का आरोप
नाराज प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सिडकुल में मजदूरों की स्वतः स्फूर्त हड़ताल के बाद कानून के दायरे में रहकर श्रमिक नेताओं द्वारा मजदूरों की कमेटियां चुनी गई थीं और उनकी मांगों का मांग-पत्र श्रम विभाग को दिया गया था। इसके बाद प्रशासन और श्रम विभाग की मध्यस्थता में त्रिपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें खुद अपर जिलाधिकारी (ADM) और मजदूर नेता पंकज बवाड़ी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इसके बावजूद, थाना सिडकुल पुलिस ने कंपनी मालिकों और सिडकुल एसोसिएशन के साथ मिलीभगत करके इस त्रिपक्षीय समझौते को ताक पर रख दिया और श्रमिक नेताओं के खिलाफ अन्यायपूर्ण तरीके से मुकदमे दर्ज कर दिए।
आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने रखीं ये 5 प्रमुख मांगें:
रामनगर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने साफ किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन पूरे उत्तराखंड में उग्र रूप धारण करेगा। ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:
- नोटिस तत्काल निरस्त हो: मजदूर नेता पंकज बवाड़ी और जय प्रकाश को गुंडा एक्ट के तहत भेजे गए नोटिस और पूरी कार्यवाही को तुरंत वापस लिया जाए।
- फर्जी मुकदमे रद्द हों: थाना सिडकुल पुलिस द्वारा दर्ज किए गए सभी फर्जी मुकदमे निरस्त किए जाएं और पूर्व में हुए त्रिपक्षीय समझौते को सख्ती से लागू किया जाए।
- दमनकारी नीतियां बंद हों: मजदूरों के शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से धरना-प्रदर्शन करने के अधिकार को न छीना जाए।
- कानूनी लाभ मिले: सिडकुल के सभी मजदूरों को न्यूनतम वेतनमान, ओवरटाइम का डबल भुगतान और नियमानुसार बोनस दिया जाना सुनिश्चित किया जाए।
- चार लेबर कोड वापस हों: मजदूर विरोधी चारों नए लेबर कोड्स को रद्द किया जाए और औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही ठेकेदारी प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए।
प्रदर्शन में ये लोग रहे मुख्य रूप से शामिल
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्र के कई प्रमुख एक्टिविस्ट और जनसंगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से इंकलाबी मज़दूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, भुवन चंद्र, सोमल, राजू सिंह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव व राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, आसिफ, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंवाल, गीता देवी, गीता आर्य, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, योगेश सती और मो. अय्यूब सहित भारी संख्या में लोग शामिल थे।