चमोली में भीषण सड़क हादसा: देवाल-पेंस मार्ग पर 500 मीटर गहरी खाई में गिरी बोलेरो, कैल नदी में समाने से मासूम समेत 4 की मौत, पूरे गांव में पसरा मातम
देवाल (चमोली): उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीमांत जिले चमोली के देवाल क्षेत्र से एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहाँ यात्रियों से भरी एक बोलेरो कार अचानक अनियंत्रित होकर लगभग 500 मीटर गहरी खाई में लुढ़कते हुए सीधे कैल नदी में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में एक 5 वर्षीय मासूम बच्चे सहित चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हादसा इतना भयावह था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और वह खाई के तलहटी में बह रही नदी के किनारे जा अटका। दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों, पुलिस प्रशासन और राहत-बचाव टीमों (SDRF व DDRF) ने मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

कुंनार के पास हुआ दर्दनाक हादसा
यह दर्दनाक दुर्घटना देवाल-पेंस मोटर मार्ग पर कुंनार नाम की जगह के पास हुई। बताया जा रहा है कि वाहन में कुल 8 लोग सवार थे, जो अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। चमोली के दुर्गम रास्तों पर जैसे ही बोलेरो कुंनार के पास पहुंची, चालक ने अचानक वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अनियंत्रित होते ही गाड़ी सड़क से नीचे सीधे गहरी खाई की तरफ मुड़ गई और कई सौ मीटर नीचे लुढ़कती चली गई। चीख-पुकार के बीच गाड़ी सीधे कैल नदी के किनारे पत्थरों से टकराकर रुकी। हादसा देखकर आस-पास के लोग सहम गए और तुरंत घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी।
चमत्कारी रूप से बची महिला और मासूम बच्ची की जान
इस भयंकर हादसे के बीच एक चमत्कारिक बात यह रही कि वाहन के खाई में गिरने के दौरान ही एक महिला और एक साल की मासूम बच्ची वाहन से बाहर छिटक गईं। गाड़ी के लुढ़कने के शुरुआती दौर में ही बाहर गिर जाने के कारण उनकी जान बच गई, हालांकि उन्हें भी गंभीर चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए खाई में उतरकर दोनों को सुरक्षित निकाला और तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।

दुर्गम खाई और नदी किनारे चलाया गया बड़ा सर्च अभियान
स्थानीय जनप्रतिनिधि महावीर बिष्ट ने घटना की गंभीरता को देखते हुए बताया कि ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए प्रत्यक्षदर्शियों की निशानदेही पर नदी किनारे और झाड़ियों के बीच खोजबीन शुरू कर दी थी। कुछ ही देर में थराली और देवाल से पुलिस बल, जिला प्रशासन के अधिकारी, डीडीआरएफ (DDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की रेस्क्यू टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गईं। खाई की गहराई बहुत ज्यादा होने और इलाका बेहद दुर्गम होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बचाव दलों ने नदी के तेज बहाव और पत्थरों के बीच व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे और नदी के किनारे फंसे शवों और घायलों को रस्सी के सहारे खाई से बाहर निकाला गया।
हादसे में जान गंवाने वाले और घायलों की सूची
जिला प्रशासन और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वालों में शामिल हैं:
- जानकी (उम्र 25 वर्ष)
- अर्जुन सिंह (उम्र 55 वर्ष)
- आलम सिंह (उम्र 45 वर्ष)
- दीपू (उम्र 5 वर्ष)

वहीं, इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के नाम इस प्रकार हैं:
- उमा देवी (उम्र 28 वर्ष)
- हर्षिका (उम्र 1 वर्ष)
- खड़क सिंह (उम्र 38 वर्ष)
- हरेंद्र सिंह (उम्र 38 वर्ष – वाहन चालक)
जिलाधिकारी चमोली और प्रशासन का बयान
चमोली के जिलाधिकारी (DM) गौरव कुमार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि देवाल और थराली के बीच पेंस मोटर मार्ग पर एक छोटा यात्री वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में गिरा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, डीडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर तैनात की गई थीं। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चार शवों को बाहर निकाल लिया गया है। घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने सभी मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और कानूनी औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं।
एक ही गांव पेंस में पसरा मातम, देर शाम तक रोते रहे परिजन
प्रारंभिक जांच और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना का शिकार हुए सभी लोग और मृतक एक ही गांव ‘पेंस’ के रहने वाले थे। जैसे ही पेंस गांव में यह खबर पहुंची कि उनके गांव के चार लोगों की इस हादसे में असमय मौत हो गई है, वैसे ही पूरे गांव और आस-पास के क्षेत्रों में सन्नाटा पसर गया। एक ही गांव के चार चूल्हे बुझने से ग्रामीणों में गहरा शोक है। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण और सगे-संबंधी देर शाम तक घटनास्थल से लेकर अस्पताल के चक्कर काटते रहे और घायलों की सलामती की दुआएं मांगते रहे। पहाड़ी रास्तों पर बार-बार होने वाले इन हादसों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और सड़कों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।