रामनगर (उत्तराखंड): प्रसिद्ध पर्यटन नगरी रामनगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य मार्गों पर प्रतिदिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम के कारण स्थानीय निवासियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भारी मानसिक व शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान और वैकल्पिक मार्गों के सुचारू उपयोग को लेकर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान से उनके कार्यालय में मुलाकात की।
केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने नगर क्षेत्र की सुस्त यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए व्यापक चर्चा की। उप जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि पुलिस-प्रशासन और नगर पालिका द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ या यातायात नियंत्रण अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन कोई ठोस, स्थाई और वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण ये अस्थाई अभियान अपने मूल मकसद में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाते। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर की जनता को जाम से स्थाई निजात दिलाने के लिए 5 मुख्य सुझावों वाला एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।
यातायात सुधार और जाम से मुक्ति के लिए 5 प्रमुख सुझाव व मांगें:
- गर्जिया-भंडारपानी पुराने मार्ग को खोलना (वैकल्पिक मार्ग): गर्जिया झूला पुल कोसी नदी से भंडारपानी को जाने वाले पुराने सड़क मार्ग को तुरंत यातायात के लिए बहाल किया जाए। इस मार्ग के खुलने से पर्वतीय क्षेत्रों (पहाड़) से आने-जाने वाले वाहन बिना रामनगर मुख्य बाजार या नगर क्षेत्र में प्रवेश किए सीधे हल्द्वानी, काशीपुर, अमगढ़ी और सीतावनी की ओर निकल सकेंगे। इससे मुख्य बाजार का ट्रैफिक लोड 30 से 40 फीसदी तक कम हो जाएगा।
- वन विभाग की खाली भूमि पर विशाल पार्किंग का निर्माण: रामनगर वन प्रभाग के रेंज कार्यालय परिसर से लगी मुख्य मार्ग की खाली पड़ी जमीन का उपयोग वाहनों की पार्किंग के लिए किया जाए। इसके लिए प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) और शासन-प्रशासन को तत्काल संयुक्त प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए। यहाँ पार्किंग बनने से जहां वन विभाग और सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, वहीं मुख्य मार्ग के किनारे बेतरतीब खड़े रहने वाले बस, टेम्पो, जिप्सी, ट्रक और निजी वाहनों से होने वाले जाम का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा।
- ग्रामीण व पर्यटन रूटों पर नियमित सिटी बस व टेम्पो सेवा: ढिकुली, मोहान, गर्जिया, कानिया, पीरूमदारा, और सांवल्दे ढेला रूटों पर तेजी से आबादी बढ़ी है। बड़ी संख्या में रिसॉर्ट, होटल, वेडिंग डेस्टिनेशन और पर्यटन गतिविधियां होने के कारण यहाँ चौबीसों घंटे आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों, पर्यटकों और मजदूरों की सुविधा के लिए प्रशासन इन रूटों पर सरकारी या अनुबंधित सिटी बस और टेम्पो सेवा नियमित रूप से शुरू करे और उनका किराया निर्धारित करे।
- व्यस्ततम चौराहों पर पीक आवर्स में अतिरिक्त पुलिस बल: नगर के सबसे व्यस्त चौराहों जैसे लखनपुर, कोसी रोड, भवानीगंज, टेढ़ा रोड और कोसी बैराज पर पीक आवर्स (व्यस्ततम समय) के दौरान यातायात पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए। वाहनों के आवागमन को मैन्युअल और तकनीकी रूप से व्यवस्थित करना बेहद जरूरी है ताकि चौराहे ही जाम का केंद्र न बनें।
- आंतरिक और लिंक मार्गों का सुदृढ़ीकरण व डामरीकरण: मुख्य मार्ग के समानांतर चलने वाले आंतरिक या लिंक मार्गों जैसे कोसी रोड, नंदा लाइन, कोटद्वार रोड और गैस गोदाम रोड की तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण किया जाए। इन सड़कों को भारी वाहनों या पीक-आवर के हल्के ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार किया जाना चाहिए ताकि मुख्य सड़क पर दबाव कम रहे।
उप जिलाधिकारी का आश्वासन और प्रशासनिक पहल
प्रतिनिधिमंडल की बातों और जनहित से जुड़े इन व्यवहारिक सुझावों को उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि रामनगर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए इन बिंदुओं पर त्वरित कदम उठाए जाएंगे और संबंधित विभागों (वन विभाग, लोनिवि, नगर पालिका और यातायात पुलिस) के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही उन्होंने स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन कर स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें।
इस महत्वपूर्ण वार्ता और ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी, केंद्रीय सचिव लालमणि, देवभूमि व्यापार मंडल रामनगर के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, नगर संयोजक आसिफ, सुनील पर्नवाल और वरिष्ठ पत्रकार व संपादक जीएस बिष्ट प्रमुख रूप से शामिल रहे।